उतिष्ठ कौन्तेय
१. महाराष्ट्रके पालघर स्थित तलासरी अहमदाबाद राजमार्गपर साधु-सन्तोंके वाहनपर कुछ लोगोंने ऐसा आक्रमण किया कि उसमें २ सन्तोंकी मृत्यु हो गई और उन्हें ले जा रहा चालक भी उसमें मारा गया है ! साधुओंको पीटनेपर कोलाहल हुआ तो घटना स्थलपर पहुंचकर पुलिसने उनको कुछ समयतक स्थानीय पुलिस चौंकीमें रखा, तदोपरान्त पुलिस वाहनमें बिठाया, उसके पश्चात भी आक्रमणकारियोंने पुलिससे हाथापाईकर सभी सन्तोंको शस्त्रोंसे तबतक मारा, जबतक वे मृत नहीं हो गए ! उसके उपरान्त चिकित्सावाहन न देकर, धूल भरे सामान वाहक वाहनमें उनके भगवा वस्त्रधारी शवोंको घसीटकर डाला गया ! इस प्रकरणमें ११० लोगोंके विरुद्ध अभियोग प्रविष्ट किया गया है; किन्तु किसी भी पदाधिकारीके विरुद्ध किसी प्रकारकी कार्यवाही नहीं की गई है और पुलिस अधिकारियोंने ‘मीडिया’को कोई तथ्य भी बतानेसे मना कर दिया ।
शिवाजी महाराजकी भूमिपर आज साधुजन भी सुरक्षित नहीं हैं और पुलिसका यह व्यवहार तो अत्यन्त लज्जाजनक है ! क्या यहां साधुओंके स्थानपर पादरी या कोई मौलवी होता, तब भी यही होता ? समाचार माध्यम भी मौन हैं; मौलवी या पादरी होता तो अवश्य लींचिंग बताते ! महाराष्ट्रमें हुआ यह कुकृत्य कथित हिन्दुत्वनिष्ठों शासकगणोंके और उद्धव ठाकरेके तुष्टिकरणका ही परिणाम है कि दुस्साहस इतना बढ गया है । सभी धर्मनिष्ठ हिन्दू महाराष्ट्र शासनका मुखर होकर विरोध करें !
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२. ओडिशा-जाजपुके एक गांव गोपीनाथपुरमें पचास जिहादियोंने मिलकर दो प्रशासनिक अधिकारियोंपर आक्रमणकर उस समय बन्धक बना लिया, जब वे ‘लॉकडाउन’के दिशानिर्देशोंका पालन कराने हेतु निरीक्षणपर निकले थे । उल्लेखनीय है कि जांचके समय मोटरसाइकिलपर सवार तीन युवक भाग खडे हुए, तब उनका पीछा करनेपर जमातियोंकी भीडने अधिकारियोंको बन्धक बना लिया, तो पुलिस दलने वहां पहुंचकर अधिकारियोंको बचाया ।
जिहादी ऐसा दुस्साहस कर सकते हैं कि वे न पुलिससे भयभीत होते हैं और न ही शासन-प्रशासनसे, उसके पश्चात भी आज देशमें ‘मीडिया’से लेकर राजनेताओंतक इनको, ‘भयभीत लोग’, ‘अल्पसंख्यक’ आदि कहकर समर्थन करते हैं, जिसका यह परिणाम है ! अब भी समय है, नेतागण नेत्र खोलकर सत्य देखें !
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३. देहलीके दुर्गा विहारके निवासी चिकित्सकने ‘आम आदमी पार्टी’के विधायक प्रकाश जारवालद्वारा किए जा रहे अत्यधिक उत्पीडनके चलते आत्महत्या कर ली है ! चिकित्सकके पुत्रके अनुसार विधायक उनके पितासे ५ लाख रुपए ले चुका था व उसके पश्चात भी सदैव धनकी मांग करता और न देनेपर उनके परिवारका उत्पीडन करता था । मृतकके शवके समीप मिले आत्महत्या लेखमें उनकी अन्तिम इच्छा, दोषीको कठोरसे कठोर दण्ड देनेकी है । अब विधायकके विरुद्ध दक्षिणी देहलीके थानेमें अभियोग प्रविष्ट हो चुका है ।
मुख्यमन्त्री अरविन्द केजरीवाल कहते हैं कि वे अच्छे लोगोंको राजनीतिमें लानेके लिए आए हैं, तो क्या वे इसप्रकारकी राजनीति करने आए हैं ? क्या उन्होंने अपने वचनानुसार इस विधायककी जांच नहीं करवाई ? यह प्रकरण ‘आप’की कथित परिवर्तिनकी राजनीतिका कटु सत्य उजागर करता है !
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४. दैनिक भास्करद्वारा किए गए ‘स्टिंग’के अनुसार मध्य प्रदेश, इन्दौरके ‘मच्छी और बंबई’ विपणीमें (बाजारमें) मछलियोंकी क्रय-विक्रयका आश्रय लेकर लाखों रुपएके ‘कोरोना’से सम्बन्धित चिकित्सकीय उपकरणों तथा औषधियोंका व्यापार चल रहा है, जिनका उपयोग मुसलमानोंद्वारा घरोंमें चोरी छुपे चिकित्साके लिए किया जा रहा है ! उल्लेखनीय है कि इसी माहमें १२ अप्रैलतक २२८ की मृत्यु हो चुकी है और उन्हें वही ‘कब्रिस्तानों’में दफनाया गया है ।
इससे स्पष्ट होता है कि जिहादियोंद्वारा प्रशासनसे छुपकर लोगोंके लिए सामानान्तर चिकित्सा व्यवस्था चलाई जा रही है और प्रशासन सुप्त है । गुप्तचर विभाग इस विषयमें त्वरित संज्ञान लेकर कार्यवाही करे !
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५. कराचीके ‘पीआईए बस्ती’में एक हिन्दू परिवारके इस्लाम अपनानेसे मना कर देनेपर मौलाना उस्मानने अन्य मुसलमान प्रचारकोंके साथ बसन्त कुमार (पीडित हिन्दू) और उनकी वृद्ध मांके साथ मारपीट की और मारनेकी चेतावनी दी । जिहादियोंने उनसे बार-बार ‘कलमा’ पढने और इस्लाम स्वीकार करनेके लिए कहा । यह प्रकरण बसन्तके भाईने एक वीडियो साझाकर बताया है । उसने कहा कि ‘लॉकडाउन’ होनेके पश्चात भी मौलाना उस्मान और शाहिद अन्य लोगोंको उनके घरकी छतपर नमाज पढवा रहे हैं !
हिन्दू परिवारोंकी इस दुर्दशाको देखते हुए, केन्द्र शासन ‘सीएए’को शीघ्रतासे लागू करे और पीडित हिन्दुओंको नागरिकता दे, ऐसी सभी हिन्दुओंकी मोदी शासनसे अपेक्षा है !
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६. राजस्थानमें गहलोत शासन राशन वितरण करते समय भेदभाव कर रहा है । कांग्रेस विधायक बिधूडीने राशन वितरणके समय एक वृद्ध महिलाके प्रधानमन्त्री मोदीको अच्छा बतानेपर राशन वापस रखनेको कहा । प्रसारित विडियोमें विधायक जी बोलते दिखाई दिए कि मोदी अच्छा है तो दिए जलाओ और राशन छोड जाओ । राजस्थानके भाजपा अध्यक्ष सतीश पुनियाने ‘रिपब्लिक’ प्रसार वाहिनीपर राशन वितरणपर भेदभाव करनेका आरोप लगाया है ।
इस महामारीके समयमें भी निकृष्ट राजनेता ओछी राजनीति कर रहे हैं । ऐसे लज्जाहीन लोग शासन करने योग्य हैं क्या ? राजस्थानके हिन्दू अगली बार मतदान देते समय अवश्य विचार करें !
(२०/०४/२०२०)
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