उतिष्ठ कौन्तेय
१. हरियाणाके जींद जनपदमें स्थित नरवानाके दनौदा कला गांवके ६ मुसलमान परिवारोंने हिन्दू धर्म अपना लिया है । इनमेंसे एक परिवारके वृद्धकी शनिवार, १८ अप्रैलको मृत्यु होनेपर उन्होंने शवका दाहसंस्कार किया । इन परिवारोंने अपने नाम भी हिन्दू ही रखे हैं । इनमेंसे एक परिवारके मुखिया रमेशने बताया कि मुगलकालमें औरंगजेबके अत्याचारोंसे भयभीत होकर इनके परिवारने इस्लाम स्वीकार किया था । जब यह सत्य इन्हें ज्ञात हुआ तो इन सभी परिवारोंने धर्मपरिवर्तनका मन बना लिया तथा उपनयन संस्कारकर जनेऊ धारणकर ये सभी हिन्दू हो गए ।
यह आगामी हिन्दू राष्ट्रकी झलक मात्र है, जब अनेक अहिन्दू पन्थके लोग सत्यको जानकर सनातनका मार्ग अपनाएंगें !
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२. कोरोनाकी वैश्विक महामारीके लिए चीनको उत्तरदायी बताते हुए जर्मनकी कुलाधिपति (चांसलर) मर्केलेने १३० ‘बिलियन पौंड’की राशिका ‘बिल’ चीनको भेजा है । इसमें पर्यटन, चलचित्र उद्योग, हवाई सेवा (लुप्तहंसा) तथा समस्त लघु उद्योगोंकी हुई क्षतिका विस्तृत विवरण प्रेषित किया गया है, जिसके आधारपर प्रत्येक नागरिककी १७८४ ‘यूरो’की अनुमानित हानि बताई गई है । समाचारमें कहा गया है कि वैज्ञानिकोंद्वारा इस महामारीके बारेमें पूछनेपर भी चीनने कोई उत्तर न देकर छुपानेका प्रयास किया । उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व भी अमेरिका, फ्रांस व ब्रिटेन भी चीनको चेतावनी दे चुके हैं ।
जिस महामारीके बारेमें समयपर सत्य बताकर रोका जा सकता था; किन्तु चीनने अपनी कुत्सित मानसिकता दिखाते हुए उसे छुपाया । अब विश्वके सभी देशोंको मिलकर चीनका आर्थिक बहिष्कार करना चाहिए, यही उसके लिए उचित दण्ड होगा !
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३. महाराष्ट्रमें हुई तीन साधुओंकी पीडादायक हत्याके समाचारके प्रकरणमें वामपन्थी समाचार पत्र, ‘द टेलीग्राफ’ और ‘इंडियन एक्सप्रेस’ आदिने इस समाचारको ‘मात्र तीन लोगोंकी हत्या’का शीर्षक देकर बताया !
किसी भी जमाती अथवा मुसलमानके साथ हुआ छोटेसे छोटा समाचार भी शीर्ष पृष्ठपर प्रेषित करके बातको बढा चढाकर दिखानेका प्रयास करनेवाले समाचार पत्र साधुओंको ‘लोगोंकी हत्या’ बता रहे हैं, यही उनकी हिन्दूद्रोही मानसिकताको दर्शाता है ।
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४. शनिवार, १८ अप्रैलको राजस्थानके भरतपुरमें एक जिहादी फलविक्रेता चांद मुहम्मद अपने पुत्रके साथ फलोंपर थूक लगाकर विक्रय करता पाया गया ! ‘सीमा सुरक्षा बल’के (‘बीएसएफ’के) उपपुलिसकर्मी मुकेशके अनुसार उन्होंने विक्रेतासे फल लिए तो हाथपर किसी तरल पदार्थका अनुभव हुआ । इसके पश्चात उन्होंने घरके बाहर लगे ‘सीसीटीवी कैमरे’में देखा तो विक्रेता तराजू व केलोंपर थूक रहा था ! अब मुकेशकी परिवादपर (शिकायतपर) प्रकरण प्रविष्ट किया गया है और आरोपियोंकी खोज की जा रही है ।
यह प्रकरण इन विक्षिप्त जिहादियोंकी मानसिकताको दर्शाता है कि इनका उद्देश्य मात्र हिन्दुओंको किसी भी प्रकारसे मारना और कुटिल एवं घृणित लक्ष्य ‘गजवा-ए-हिन्द’को पाना है; परन्तु विचित्र है कि हिन्दू अब भी धर्मनिरपेक्षताका चोला ओढकर बैठे हैं और मौन रहते हैं !
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५. इन्दौरके टाटपट्टी बाखलमें पुलिस व स्वास्थ्य कर्मियोंपर प्रहार करनेवाला जिहादी आरोपी जावेद, जिसे ‘कोरोना’ संक्रमणके कारण ‘जबलपुर मैडिकल कॉलेज’में प्रविष्ट किया गया था और वह चिकित्सालयसे भाग निकला था, उसे अब नरसिंहपुर क्षेत्रमें बन्दी बना लिया गया है । इस आरोपीके विरुद्ध ‘रासुका’के अन्तर्गत अभियोग भी प्रविष्ट किया गया है ।
जिहादियोंके कुकृत्यके कारण आज इन्दौर सदृश अनेक महानगर महामारीका प्रकोप भोग रहे हैं ! हिन्दुओ क्या ऐसे घटनाएं आपको कुछ सीख दे रही हैं या अभी भी हिन्दू मुस्लिम भाई-भाईके तथाकथित भाईचारेके भ्रममें हैं ?
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६. रविवार, १९ अप्रैलको बाबरी मस्जिदके पक्षकार इकबाल अंसारीने कहा कि तबलीगी जमातपर देशद्रोहका अभियोग प्रविष्ट होना चाहिए । उन्होंने कहा कि तबलीगीके जमाती देशके ‘गद्दार’ हैं, वे देशमें ‘करोना’ जैसी महामारी फैलानेका षडयन्त्र कर रहे हैं । उन्होंने कहा कि हम देशके ‘वफादार’ मुसलमान हैं और हम महामारीको देशमें फैलने नहीं देंगे ।
विचित्र है कि अंसारीजी तो मुसलमानोंको देशभक्त बता रहे हैं । यदि मान भी लेते हैं, तो सभी मुसलमान या उनके नेता मुखर होकर क्यों ‘जमात’के विरुद्ध क्यों नहीं बोल रहे ?
(२१/०४/२०२०)
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