उत्तिष्ठ कौन्तेय


१. कुछ माह पूर्व सेवानिवृत्त हुए सर्वोच्च न्यायालयके मुख्य न्यायाधीश श्री रंजन गोगईने राज्यसभाकी सदस्यता ग्रहण करनेके पश्चात कहा कि सर्वोच्च न्यायालय भी अब भ्रष्टाचारसे अछूता नहीं रहा है ! वहांके प्रसिद्ध अधिवक्ता न्यायाधीशोंकी निर्णय प्रक्रियामें व्यवधान उत्पन्न करतें हैं और यदि निर्णय उनके अनुसार न हो तो उस अभियोगके न्यायधीशोंपर आरोप लगाकर उन्हें प्रताडित करनेका प्रयास किया जाता हैं । वह स्वयं भी श्रीराम जन्मभूमि विवाद व ‘राफेल’ विवादके निर्णयके मध्य इसका अनुभव कर चुके हैं !
       समस्याओंके निदान हेतु व्यक्ति न्यायपालिकाकी शरण में जाता है; परन्तु वह भी भ्रष्टाचारमें लिप्त है एवं निष्पक्ष न्याय प्रदान करने में असमर्थ; अतः देशमें धर्म स्थापना व हिन्दू राष्ट्रकी आवश्यकता अब परम आवश्यक है ।
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२. बंगालके मुर्शिदाबाद जनपदका एक ‘विडियो’ समाजिक जालस्थलपर प्रसारित हो रहा है, जिसमें एक मौलवी पुलिसकी उपस्थितिमें भीडके समक्ष ‘कोरोना’का सबसे प्रभावी उपचार कुरानकी आयतें पढना बता रहा है, विडम्बना यह है कि भीड भी उसका समर्थन कर रही है ! इस प्रकरणके विरुद्ध विश्व हिन्दू परिषदने बिना विलम्ब मौलवीको बन्दी बनानेकी मांग की है ।
      इस्लामिक देशोंमें विषाणुकी स्थितिसे कोई अनभिज्ञ नहीं है तो ये आयतें वहां क्यों नहीं कममें आईं ? प्रशासनको ऐसे लोगोंको त्वरिछ्त त बन्दी बनाना चाहिए; क्योंकि अधिकतर मुसलमान मौलवियोंकी बातपर ही श्रद्धा रखते हैं और इसका परिणाम सभीको भोगना पड सकता है !
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३. बरेलीके गोविन्दापुर क्षेत्रमें मुस्कान नामक एक मुसलमान युवतीका एक हिन्दू युवकसे प्रेम करना उसके दोनों भाइयोंको इतना बुरा लगा कि उन्होंने अपनी मांको स्नानघरमें बंद कर दिया और बहनको मादक पदार्थ खिलाकर चारपाईके पाएसे पीट-पीटकर उसकी हत्या कर दी ! मुस्कान हिन्दू युवकके साथ हिमाचल प्रदेश चली गई थी; किन्तु पुलिसने उसे पकड लिया और न्यायालयको न सौंप कर, सीधे उसकी मांको सौंप दिया । पुलिसने दोनों आरोपी भाइयोंको बन्दी बना लिया है ।
      इससे ज्ञात होता है कि जिहादियोंके मनमें जिहादी विष इसप्रकार भरा है कि स्वयं हिन्दू युवतियोंका जीवन नष्ट करते हैं और उनके साथ यही प्रकरण हो और हिन्दू नाम कहीं भी सुन लें तो वे मरने और मारनेपर आ जाते हैं । वहीं हिन्दू कथित सर्वधर्मसमभाव एवं अज्ञानताके कारण उनसे भाईचारा दिखानेमें ही लगे रहते हैं !
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४. सामाजिक प्रसार माध्यम ऐप्प ‘टिक-टॉक’के माध्यमसे एक विडियो प्रसारित हो रहा है, जिसमें तीन मुसलमान मित्र बात कर रहे होते हैं, तभी चौथा आता है और वो ‘अस्सलाम वालेकुम’ बोल कर अभिवादन करता हैं, वह हाथ मिलाने और गले मिलनेको बोलता है; परन्तु एक मित्र कोरोनाके कारण मना करता है तो कट्टर मित्र उससे पूछता है कि क्या मृत्युके भयसे ‘सुन्नत’ छोड दोगे ? कलको भयसे इस्लाम छोड देंगे ? हम मुसलमान हैं, हम मृत्युसे भय नहीं तो इसके पश्चात सभी आपसमें हाथ मिलाते हैं और गले मिलते हैं ।
     सभी हिन्दू विरोधर ‘टिक-टॉक’को इनका खाता हटानेके लिए बाध्य करें और इस आपात कालमें ऐसे दुष्प्रचारके लिए भारत शासन इन सभी जिहादियोंको बन्दी बनाएं !
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५. शुक्रवार, २० मार्चको निर्भयाके अपराधियोंको फांसी दिए जानेके प्रकरणमें ‘एमनेस्टी इण्डिया’ने इसे भगरतके मानवाधिकारमें ‘एक और काला दाग’ बताते हुए दुष्कर्मियोंके लिए सहानुभूति प्रकट की ! एक अन्य व्यक्ति जयंत भट्टाचार्यने निर्भयाकी मांपर ‘गंदी मानसिकता’ और ‘रक्तकी लालसा’ रखनेका आरोप लगाया ! उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व उच्चतम न्यायालयके सेवानिवृत्त न्यायाधीश कुरियन जोसेफने पूछा था कि यदि दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराधके दोषियोंको फांसी दी जाती है तो क्या ये बंद हो जाएगा ?
       विचित्र है कि जघन्यसे जघन्य अपराधका यह प्रकरण , ‘एम्नेस्टी इंडिया’, पूर्व न्यायाधीश व भट्टाचार्य जैसे कथित बुद्धिजीवियोंको दुर्लभ नहीं लगता, कहीं ये किसी बाहरी शक्तिके समर्थनमें तो ऐसा नहीं कर रहे ? ऐसे दूषित मानसिकताके लोग ही आतंकियोंके पक्षधर बनते हैं और राष्ट्रके लिए घातक सिद्ध होते हैं; अतः ये भी दण्डके ही पात्र हैं !
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६. बंगालके उत्तर २४ परगनामें भारत-बांग्लादेश सीमाके निकट कोलकाता पुलिसने आतंकी संगठन ‘लश्कर-ए-तैयबा’से सम्बन्ध रखनेके आरोपमें मौलाना आजाद महाविद्यालयसे छात्रा तानिया परवीनको बन्दी बनाया है । पुलिसको सूचनि मिली थी कि उसके बैंक खातेमें कोट्यावधि रुपयोंका आए दिन लेन-देन हो रहा था । परवीनपर स्थानीय युवाओंको आतंकी गतिविधियोंमें सम्मिलित होनेके लिए भडकानेका आरोप भी है !
    तो मुसलमान युवतियां भी जिहादमें पीछे नहीं हैं ! शिक्षाका आश्रय लेकर ममता बैनर्जीके बंगालमें छात्राएं आतंकी बन रहीं हैं ! ऐसेमें ऐसे आतंक समर्थक बंगाल शासनको निरस्त करना चाहिए और ऐसे जिहादियोंको शिक्षा देनेका कोई लाभ है क्या ?, इसपर भी केन्द्र अवश्य विचार करे !
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७. देहलीके जहांगीरपुरीमें दो प्रदर्शनकारियोंको ‘कोरोना’ हुआ है । प्रथम प्रदर्शनकारीकी बहन, जो ११ मार्चको सऊदी अरबसे इस्लामी तीर्थयात्रा करके आई थी, उसे ‘कोरोना’ हुआ था, जिसके पश्चात उसे भी हुआ ।
प्रदर्शनकारीने बताया कि उसी बहनसे जब उसने भेंट की थी, उसके २ दिवस पश्चात उसे ‘कोरोना’ हुआ और वह प्रदर्शन स्थलपर भी जाता रहा !
     यदि शासन इस प्रदर्शनको अभी भी बन्द नहीं करेगा तो कहीं यह सम्पूर्ण देहलीके डूबनेका कारण न बन जाए !; अतः केन्द्र शासन इसपर त्वरित कार्यवाही करे !


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