उत्तिष्ठ कौन्तेय
१. दिसम्बर, २०१२ में निर्भयाके साथ हुए क्रूर सामूहिक दुष्कर्म एवं हत्याकांडने समूचे देशमें आक्रोश पैदा कर दिया था । अब लम्बी प्रतीक्षाके पश्चात शुक्रवारको उन दोषियोंको फांसी दे दी गई, जिसपर संयुक्त राष्ट्रने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए विश्वके समस्त देशोंसे मृत्युदण्डपर पूर्णतः प्रतिबन्ध लगाने हेतु आग्रह किया है !
अपराधियोंके मनोबलको बढावा देनेवाली प्रतिक्रिया ऐसे वैश्विक स्तरीय संगठनको शोभा नहीं देती है ! आतंकवाद व महिलाओंके प्रति होते अपराधोंपर भी मृत्युदंडके प्रावधानपर अंकुश लगाना किसी भी रूपमें भारतको स्वीकार्य नहीं करना चाहिए व इस नियमको और कडा करना चाहिए !
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२. दक्षिणी कश्मीरके शोपियांसे आतंकी संगठन ‘लश्कर-ए-तैयबा’में सम्मिलित करानेके लिए युवाओंको भ्रमित कर रहे दो जिहादियोंको पुलिसने बन्दी बनाया है । पुलिसको सूचना मिली थी कि चोटीपोराका इरफान अहमद कुट्टे इमाम साहिब तथा आस-पासके युवाओंको आतंकी संगठनमें सम्मिलित कर रहा है । उसने अलोरा क्षेत्रके आदिल बशीर लोनको संगठनमें सम्मिलित करनेके लिए सज्ज कर लिया है ।
आतंकी बनानेवाले और बननेवाले दोनों ही विशिष्ट वर्गसे हैं, तदोपरिन्त आजतक भारत नेताओंको आतंकका नहीं ज्ञात हुआ, यह हमारे इस देशकी विडम्बना है !
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३. १९ मार्च, २०२० को राजस्थानके बारात नगरमें एक मौलवीको थानेसे छुडवानेके लिए लगभग तीन सौ मुस्लिम लोगोंने थानेपर पत्थरोंसे आक्रमणकर अनेक पुलिस कर्मचारियोंको चोटिल कर दिया !
कांग्रेस शासनमें जिहादियोंमे पुलिस और विधानका कोई भय नहीं रहा है तो सामान्य हिन्दुओंकी क्या स्थिति करेंगें ?, विचार करें । हिन्दुओ ! हिन्दूदरोही शासकगणोंको सत्ताहीन करें !
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४. कोरोनाके संक्रमणका प्रसार रोकनेके लिऐ प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदीने २२ मार्चको ‘जनता कर्फ्यू’का आह्वान किया; किन्तु ‘ऑल इण्डिया सूफी उलेमा काउंसिल’के अध्यक्ष हकीम कादरीने मुसलमान समुदायको भडकाते हुए कहा है कि ‘जनता कर्फ्यू’वाले दिवस घरके कामोंमें समय नष्ट न करके मस्जिदोंमें एकत्र होकर अपने बुरे कर्मोंके लिए अल्लाहसे क्षमा मांगे ! साथ ही मस्जिदोंकी प्रबन्धन समितियोंको प्रार्थनाओं और कुरान पढनेके लिए व्यवस्था करनेको कहा ।
इनके कर्मोंका भोग समूचे देशको न भोगना पडे; अतः केन्द्र त्वरित इन्हें बन्दी बनाए !
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