उतिष्ठ कौन्तेय


१. कोरोना महामारीके विरुद्ध लडनेवाले चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियोंके बचाव हेतु, १२३ वर्ष पुराने राजकीय नियमोंमें परिवर्तन करके, केंद्रीय मंत्रालयने अपराधियोंको सात वर्षतक कारावास और लगभग पांच लाख रुपएके आर्थिक दण्डतकका प्रावधान करते हुए, चिकित्सकोंको विरोध प्रदर्शन न करनेके लिए मनाया है । केंद्रीय मंत्रालयने इस सिद्धान्तको चिकित्सकों और चिकित्सालयपर आक्रमण करके तोड-फोड करने वालोंको अपराधकी श्रेणीमें मानकर कठोरता अपनाई है । इससे पहले भी मुरादाबाद तथा इंदौरमें भी चिकित्सकोंपर किए गए आक्रमणोंके पश्चात, उन्हें कोई सुरक्षा नहीं मिलनेपर, चिकित्साकर्मियोंने कार्य न करनेकी चेतावनी दी थी ।
         ऐसे आपात कालमें अपने प्राणोंको डावपर लगाकर सेवा करनेवालोंपर, आक्रमणकर्ताओंको भारी दण्ड देना अति आवश्यक है, किन्तु क्या सभी अपराधियोंको ढूंढकर उन्हें दण्डित करना शासनके लिए इतना सरल होगा, यह विचारणीय है ।
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२. पाकिस्तानी उग्रवादी ‘कैम्पों’से कोरोनासे संक्रमित बहुत बडी संख्यामें आंतकियोंको शस्त्र देकर पाकिस्तानकी सीमाओंसे, भारतमे प्रविष्ट करानेके प्रयासमें है | जम्मू काश्मीरके ‘डीजीपी’ने चिन्ता व्यक्त करते हुए बताया कि पाकद्वारा अब अपने कोरोना संक्रमितोंको औषधि न दे पानेकी स्थितिमें और असमर्थ होनेसे, भारतकी सीमा पार करानेका षड्यंत्र रचा जा रहा है । यह समाचार उन्होंने किसी पाकिस्तानीके दूरभाषके वार्तालापको ध्वनिबद्ध करनेके पश्चात बताई ।
       अपने नागरिकोंको स्वस्थ्य सेवाएं प्रदान करनेके स्थानपर सीमा पार कराकर भारतमें कोरोना संक्रमण फैलानेका कुत्सित विचार तो केवल पाकिस्तान ही कर सकता है । सीमा पार करनेवाले आंतकियोंको तुरन्त  केवल गोली मारना ही इस समस्याका एकमात्र उपाय है ।
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३. बुधवार, २२ अप्रैलको रात्रिमें ‘रिपब्लिक टीवी’ के संस्थापक अर्नब गोस्वामीके वाहनपर आक्रमणके प्रकरणमें मुम्बईके पुलिस उपायुक्तने (डीसीपी) अपराधियोंके ‘युवक कांग्रेस’ से होनेका वक्तव्य अब परिवर्तित करते हुए कहा है कि यह जांचका विषय है कि वे लोग ‘युवक कांग्रेस’के थे या नहीं ? उल्लेखनीय है कि अर्नबके सुरक्षाकर्मी और मुम्बई पुलिसके शिवाजी होस्मानीने जब कल अपराधियोंको पकडा था तो उन्होंने स्वयंको ‘युवक कांग्रेस’का बताया था और यह कहा था कि कांग्रेसपर की गई टिप्पणीको लेकर वे अरनबको पाठ पढाने आए थे ! जब अरनबने इसपर प्राथमिकी प्रविष्ट करवानेकी बात की थी तो पुलिस उपायुक्तने यह कहकर मना किया कि इसमें शीघ्रता न करें, हम स्वयं परिवाद प्रविष्ट करेंगे; परन्तु समाचार संकलित होनेतक उपायुक्तने योग्य कार्यवाही अभीतक नहीं की है !
       कांग्रेसद्वारा पोषित उद्धव शासनमें जब एक प्रसिद्ध राष्ट्रवादी पत्रकारके साथ यह हो सकता है तो साधरण नागरिकके साथ क्यों सकता है किंचित सोचें ! अपने प्रकरणमें कांग्रेस संविधानका राग आलापती है और अन्यको गुण्डोंसे पिटवाते हैं !  साथ ही इससे यह भी दिखता है कि नेताओंके आधीन आजकी वैधानिक व्यवस्था न्याय हेतु सक्षम नहीं है; अतः अब व्यवस्था परिवर्तन आवश्यक है !
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४. तेलंगानाके एक परिवारके विषयमें  ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ में प्रीति विश्वासद्वारा लिखित एक समाचार प्रकाशित हुआ था कि वहां एक हिन्दूकी मृत्यु होनेपर मुसलमानोंने मिलकर उसे कन्धा दिया और उसके अन्तिम संस्कारकी भी व्यवस्था की । उल्लेखनीय है कि खैरताबादके ५० वर्षीय वेणु महाराजकी १६ अप्रैलको एक चिकित्सालयमें मृत्यु हो गई थी । अब ज्ञात हुआ है कि पीडित परिवार इस झूठे समाचारके कारण व्यथित है और ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’के विरुद्घ कार्यवाहीपर विचार कर रहा है ।
         आज ‘मीडिया’का एक वर्ग, जिसे राजनीतिक दलोंका संरक्षण मिला है, वह ऐसी कथित भाईचारेके समाचार दिखाकर समाजमें छद्म दृष्टिकोण बनाते हैं और दिखाते हैं कि मुसलमानोंने हिन्दुओंकी सहायता की हो । अब समय आ गया है कि हिन्दू जाग्रत हों और इन ‘मीडिया’ वर्गोंका पूर्णतया बहिष्कार करें !
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६. बंगाल व केरलके पश्चात अब महाराष्ट्रसे भी हिन्दुओंके उत्पीडनके समाचारोंमें वृद्धि होने लगी है । प्रकरण महाराष्ट्रके ठाणे जनपदका है जहां गजानन चतुर्वेदीजीको केवल इसलिए बन्दी बना लिया गया क्योंकि उन्होंने एक धर्मांध युवकके हाथोंसे सामग्री क्रय करना स्वीकार नहीं किया । जिहादीने थानेमें जाकर उनकी परिवाद की व चतुर्वेदीजीपर धार्मिक भावनाओंको आहत करनेका अभियोग प्रविष्ट करवा दिया ।
      इसमे संदेह नहीं कि भारतमें कोरोना महामारीको व्यापक स्तरपर संक्रमण फैलानेका श्रेय केवल जिहादियोंको ही जाता है व कुछ दिवसों पूर्व सामाजिक जालस्थलोंपर‌ प्रसारित हुए अनेक ‘विडियो’ में भी इसके साक्ष्य प्रस्तुत हुए हैं । यदि ऐसी स्थितिमें व्यक्ति अपनी सुरक्षा हेतु तत्पर हो तो प्रशासन उसपर अन्याय क्यों कर रहा है ?
(२४/०४/२०२०)


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