उतिष्ठ कौन्तेय


१. जहां शासन महामारीके प्रसारको रोकने हेतु गृह-बन्दी (लॉकडाउन) घोषित कर युद्ध स्तरीय प्रयास कर रहा है वहीं जिहादी इसे विफल बनानेमें पूर्णतः प्रयासरत हैं । प्रकरण देहलीका हैं जहां मकसूद आलम नामक वाहन चालक अपने रुग्ण परिचितसे मिलने हेतु योजनाकर परिवारजनों सहित मिथ्या आज्ञा पत्र (पास) बनवा बिहार कूच करनेके प्रयासोंके मध्य दिल्ली पुलिसद्वारा बन्दी बना लिया गया । पुलिसको उसने यह भी सूचित किया कि उसे सैयद फहद नामक व्यक्तिने उन्हें यह मिथ्या अनुमति पत्र उपलब्ध करवाया था ।
    जहां योगी आदित्यनाथ जैसे आदर्श राजनेता नियम वचनोंका पालन कर अपने मृत पिताकी अंत्येष्टिमें भी सहभागी नहीं हो रहे हैं वही यह जिहादी असत्य कहानियां बना नियमोंके उल्लंघन सहजतासे कर रहे हैं । क्या ऐसे राष्ट्रदोही गृह बन्दीको सफल सिद्ध होने देंगे ?
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२. मार्गपर चलती सत्रह वर्षीय युवतीको बलपूर्वक खींचकर वाहनमें लेजाकर बलात्कार करनेके अपराधमें पुलिस प्रभारी श्रीवास्तवने दो मुसलमान युवकोंको बन्दी बनाया है । जब वह चिकित्सालयके निकटसे अपने मित्रके साथ जा रही थी, तो शफीक और आबिदने बिना रोक-टोक उसे  ८ किलोमीटर दूरीतक भोपालके भेल क्षेत्रमें ले जाकर उसका बलात्कार किया । उल्लेखनीय है कि यह घटना तब हुई जब पग-पगपर पुलिस दल करोनाके कारण उपस्थित थी । पांच दिवसके अंतरालमें यह दूसरी घटना बताई जा रही है ।
    ऐसी निकृष्ट मानसिकतायुक्त अपराधियोंको मृत्यु दंड ही मिलना चाहिए, अन्यथा कारावाससे निकलनेपर, वे पुनः वही दुःसाहस करते रहेंगे । इसमें सुरक्षाबलोंकी असतर्कताका भी भान होता है ।
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३. खाडी देशोंमें रह रहे कुछ भारतीयोंके विरुद्ध हो रहे षड्यंत्रद्वारा व्यथित करनेके समाचारका प्रमाण देते हुए एएमयूके भूतपूर्व छात्र नीरज शर्माने, वहां हिन्दुओंपर हो रहे शोषणके लिए, एएमयूके छात्र संगठनोंको सुनियोजित ढंगसे सम्पदायिक घृणा फैलाए जानेके लिए उत्तरदायी ठहराया । वहां हिन्दुओंके विरुद्ध अभियानमें पाकिस्तानसे सम्बंधित तथा एएमयूके सीएए विरोधमें लिप्त छात्र रह रहे हैं और ऐसे असामाजिक तत्व भारतकी छवि धूमिल करना चाहते हैं ।
    मुसलमान देशोंमें पूर्वसे ही कट्टरपंथियोंद्वारा भारतियोंको कष्ट दिया जा रहा है । हिन्दुओंको ऐसे देशोंसे लौटकर भारतमें बस जाना ही एक मात्र उपाय है ।
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४. महाराष्ट्रमें अब्दुल लतीफ नामक मुसलमानने अपना करोना संक्रमण छुपाया । उसकी मृत्यु हो गई ।  इस कारण उसकी पत्नि, बेटी, बेटा, बहु,  दामाद, पोता, भाई आदि संक्रमित हो गए । इतना ही नहीं, उनसे मिलनेवाले अनेक संक्रमित हो गए । इससे नागपुर करोनाका केन्द्र बन गया । ५५ व्यक्तियोंकी ‘रिपोर्ट’ सकारात्मक आई है अभी  १४४ की ‘रिपोर्ट’ आना बाकी है |
      इसे मूर्खताकी परिसीमा ही कहेंगे और क्या कि धर्मांध अपना न सही अपने परिवार और कुटम्बका भी ध्यान नहीं रखते हैं, और इस देशके धर्मनिरपेक्ष हिन्दू इनसे राष्ट्रनिष्ठाकी अपेक्षा रखते हैं !
(२५/०४/२०२०)


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