उत्तिष्ठ कौन्तेय
गोमांसको प्रोटीनको स्रोत बतानेवाली इरा त्रिवेदीको भारत शासनने अतुल्य भारत ‘वेबिनार’में प्रदान किया ‘मंच’
पर्यटनको प्रोत्साहन देनेवाले अभियान ‘अतुल्य भारत’द्वारा आयोजित ‘वेबिनार’के (अन्तर्जाल संगोष्ठीके) लिए इरा त्रिवेदीको योग प्रसार हेतु मंच प्रदान करनेपर हिन्दुओंने अपना रोष व्यक्त किया है । उल्लेखनीय है कि यह वही इरा त्रिवेदी है, जिसने २०१७ में अपने साक्षात्कारके मध्य गोमांसको ‘प्रोटीन’का श्रेष्ठ विकल्प व हिन्दू धर्मको पिछडा तथा इस्लामके ग्रन्थ कुरानको उन्नतिशील बताया था । इस वक्तव्यके पश्चात इराको दूरदर्शनके कार्यक्रमसे भी निष्कासित कर दिया गया था । अनेक व्यक्तिका कहना है कि शासनद्वारा ऐसे हिन्दूद्रोहियोंका प्रोत्साहन दुर्भाग्यपूर्ण है । उन्होंने प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदीको भी पत्र लिखकर कार्यक्रमसे सम्बन्धित मन्त्री व अधिकारियोंके पदच्युत करनेकी मांग भी की है । उल्लेखनीय है कि केन्द्र शासनने कुछ दिवस पूर्व ही ‘द वायर’के संस्थापक वरदराजनकी पत्नी नन्दिनी सुन्दरको भी केन्द्रीय शिक्षा समितिमें नियुक्त किया है ।
योगका जिसे ज्ञान नहीं, वह योगके कार्यक्रममें मंच और जिसे शिक्षाका ज्ञान नहीं, उसकी केन्द्रीय शिक्षा समितिमें नियुक्ति, यह सब बातें बताती हैं कि शासनकर्ताओंको भी शासन करने हेतु योग्य व्यक्तिका चुनाव कैसे करना है यह भी ज्ञान नहीं है ! वस्तुतः आजके भारतका यही कटु सत्य है । प्रखर क्षत्रिय वर्णके राजा भी राजकार्योंमें महर्षियोंका परामर्श लेते थे, जिससे उनके निर्णय उचित होते थे, वहीं आजके अधिकारी व नेतागण स्वयंको ही विद्वान मानते हैं और महर्षि या सन्त गौण हो गए हैं, तभी ऐसे निर्णय हो रहे हैं; अतः हिन्दू धर्मराज्यकी अत्यन्त आवश्यकता है, जिससे ऐसे अधर्म न हों । (२३.०६.२०)
**********
असममें सौरभ दासकी जिहादियोंने की निर्मम हत्या
असमके डिब्रूगढ जनपदके लेजाईमें एक और हिन्दू युवककी हत्याके पश्चात तनाव व्याप्त हो गया है । मृत युवकका अभिज्ञान (पहचान) सौरभ दासके रूपमें हुआ है । सूचनाके अनुसार शुक्रवार, १९ जूनकी रात्रि जिहादियोंने सौरभकी हत्याकर शवको सेसा नदीमें फेंक दिया ।
स्थानीय लोगोंके अनुसार, सौरभकी प्रेम सम्बन्धी विवादोंमें हत्या की गई है । वहीं कुछ लोगोंका कहना है कि सौरभ हत्यावाले दिन रहीमुद्दीन अहमदके घर गया था और उनके मध्य कहासुनी हो गई थी ।
सौरभ दासकी हत्याके विरोधमें शनिवार, २० जूनको लेजाई क्षेत्रके निवासियोंने राष्ट्रीय राजमार्ग-३७ को बन्द कर दिया और ‘टायर’ जलाकर विरोध किया । उत्तेजित भीडने दोषियोंको मृत्युदण्ड देनेकी मांग की ।
असम और देशके पूर्वी क्षेत्रोंमें जिहादीका दुस्साहस अत्यधिक बढने लगा है एवं हिन्दुओंकी हत्याएं भी बढ रही हैं । असममें अब हिन्दू सङ्गठित होकर विरोध कर रहे हैं, यह अच्छी बात है और इसे और बढाना चाहिए व ऐसे प्रसंगोंमें सम्पूर्ण भारतके हिन्दुओंने एक होना चाहिए !
वस्तुतः यदि वहांके हिन्दुओंने तभी अपना स्वर मुखरित किया होता, जब शासन रोहिङ्ग्याओंको वहां बसानेमें व्यस्त था, तो आज इतने हिन्दू युवा न मारे जाते !
(२३.०६.२०२०)
**********
देहली उपद्रवमें प्रयुक्त राजधानी विद्यालयके स्वामी फैजल फारुखको मिली प्रतिभूति
उत्तर-पूर्वी देहलीमें हुए हिन्दू विरोधी उपद्रवके समय जिहादियोंद्वारा दयालपुर क्षेत्रमें स्थित राजधानी विद्यालयको अपना गढ बनवाने और उपद्रवमें संलिप्त विद्यालयके स्वामी फैसल फारुखको न्यायालयने प्रतिभूति (जमानत) देते हुए कहा कि ‘पिंजरा तोड’, ‘पाॅपुलर फ्रंट आॅफ इण्डिया’ और ‘मरकज’से उसके सम्बन्धमें प्रथमदृष्टया कोई प्रमाण नहीं हैं । न्यायालयने यह भी कहा कि उपद्रवके समय फैजल उस स्थानपर था, इसे भी प्रमाणित करनेवाले साक्ष्य उपलब्ध नहीं हुए ।
इस प्रकरणमें महत्त्वपूर्ण बात यह थी कि वह निजामुद्दीन मरकजके प्रभावशावी व्यक्तियोंके सम्पर्कमें था । देहली पुलिसने जांचमें भी पाया था कि उपद्रवसे एक दिवस पूर्व वह देवबन्द भी गया था, अब ‘क्राइम ब्रांच’ देहली उपद्रवमें ‘निजामुद्दीन मरकज’की भूमिकाकी जांच कर रही है । पुलिसके अनुसार जिहादियोंने राजधानी विद्यालयकी छतसे गोलियां चलाईं तथा छतपर बडी गुलैलका प्रयोग पेट्रोल बम, एसिड, ईंट, पत्थरोंको दूरतक फेंकनेके लिए किया गया था और इसी मध्य जिहादियोंने राजधानी विद्यालयकी छतसे रस्सियोंकी सहायतासे ‘डीआरपी काॅन्वेंट विद्यालय’के परिसरमें उतरकर विद्यालयको आग लगा दी थी ।
इस प्रकार उपद्रवमें प्रमुख भूमिकावाले जिहादीको न्यायालयद्वारा मुक्त करना न्यायपालिकाकी स्थितिको उजागर करता है, इससे स्पष्ट है कि ऐसी व्यवस्था हिन्दुओंको न्याय नहीं दे सकती है ।
(२३.०६.२०२०)
**********
उत्तरप्रदेशमें डॉ. राहुल बनकर ‘प्लाज्मा डोनेशन’का लोभ देकर ‘गिरोह’ चलानेवाला अब्दुल करीम बनाया गया बन्दी
उत्तर प्रदेशके मुजफ्फरनगरका रहनेवाला अब्दुल करीम राणा, जो कि ‘ब्लड/प्लाज्मा डोनेशन स्कैम’में लिप्त था, उसे देहली पुलिसने पकडा है । उसने देहली विधानसभाके सभाध्यक्ष रामनिवास गोयलको डॉ. राहुल ठाकुरके छद्म हिन्दू नामसे भ्रमणभाष किया और कहा कि वो राम मनोहर लोहिया चिकित्सालयमें कार्यरत है । यह चलभाष क्रमाङ्क उन्हें गोयलके भतीजेने दिया था । उसको अपने ससुरके लिए ‘ब्लड/प्लाज्मा डोनेशन’की आवश्यकता थी, जिसके पश्चात उन्होंने सामाजिक जालस्थलपर प्रेषित किया था । वहींसे अब्दुलने उन्हें राहुल बनकर सम्पर्क किया । उन्होंने कहीं औरसे ‘ब्लड/प्लाज्मा’का प्रबन्ध कर लिया था; परन्तु बादमें काका गोयलके किसी सम्बन्धीको आवश्यकता पडी तो उन्होंने आरोपीका ही चलभाष क्रमाङ्क दे दिया । गोयलने अब्दुलको सम्पर्ककर मेदान्ता चिकित्सालय पहुंचनेकी बात की, तो उसने ‘कैब’के लिए ९५० ₹ अपने ‘गूगल पे’ खातेमें डलवाए । धन स्थानान्तरित होनेके पश्चात जब आरोपी न तो चिकिसालय पहुंचा और न ही उसने भ्रमणभाष उठाया तो पुलिसने ‘टेक्निकल सर्विलांस’का आश्रय लेते हुए हुए उसे पकड लिया । उसने दशकाधिक लोगोंको इसी तरह ठगनेकी बात स्वीकार की है !
जिहादी प्रायः लवजिहाद करें या कोई अन्य अनुचित कार्य, प्रायः छद्म हिन्दू नामोंका आश्रय लेकर हिन्दुओंके मध्य रहकर ही यह सब करते हैं और जिन प्रकरणमें ऐसा नहीं होता है, उसमें समाचार वाहिनियां हिन्दू नाम रख देती हैं ! इससे ही उनकी निकृष्ट मानसिकता ज्ञात होती है एवं ऐसा करने हेतु जिहादियोंको निश्चित ही प्रशिक्षित किया जाता है; क्योंकि ऐसी घटनाएं सम्पूर्ण भारतमें घटित हो रही हैं । (२३.०६.२०)
**********
देहलीका हिलाल अहमद हुआ आतङ्की सङ्गठनमें सम्मिलित
देहलीका हिलाल अहमद नामक व्यक्ति आतङ्की सङ्गठनमें सम्मिलित हुआ है । ‘PHD’ अध्ययन करनेके पश्चात वह कुछ दिनोंके लिए अपने मित्रोंके साथ कश्मीर घूमने गया था । वापस न लौटनेपर, उसके परिवारवालोंने ढूंढा; किन्तु कुछ भी ज्ञात नहीं हुआ । अभी पुलिसने उसकी जानकारी दी है कि वह ‘हिजबुल्ल मुजाहिद्दीन’में जा चुका है । पुलिसने उसे लौट आनेपर बन्दी नहीं बनाए जानेका आश्वासन भी दिया है । पुलिसका कहना है कि उसके बारेमें इस समय इतना ही जानकारी प्राप्त हुई है ।
‘पीएचडी’ करनेके पश्चात भी आतङ्की बननेवालेको पुलिस और शासन दोनों दिशाभ्रमित युवा बताते हैं, यही इस देशकी दुर्गतिका कारण है कि आतङ्कवादियों और उनके कथित धर्मको इस देशमें माननेको ही कोई सज्ज नहीं होता है, जिसका परिणाम हिन्दू भोगते हैं । (२३.०६.२०२०)
**********
अपशब्द बोलनेवाले कर्मचारीपर कार्यवाहीकी बातपर फेसबुकने साधा मौन
सामाजिक जालस्थलपर आपत्तिजनक टिप्पणी करनेके कारण समाचार पोर्टल ‘ऑपइंडिया’ने हिन्दूद्रोही पत्रकार प्रशान्तके साथ कार्य करनेवाले सिद्धार्थ मजूमदार नामके युवकसे बात की थी और पाया था कि ‘ट्विटर’पर अपमानजनक शब्दोंका प्रयोग करनेवाला यह युवक ‘फेसबुक’का ही कर्मचारी है । ‘फेसबुक’ने उसपर प्रतिक्रिया देते हुए बताया कि ऐसे प्रकरणको ‘फेसबुक’ गम्भीरतासे लेता है । यद्यपि कार्यवाहीकी बातपर उन्होंने बतानेसे मना कर दिया ।
उल्लेखनीय है कि सिद्धार्थ दूसरे खातेसे भारतीयोंको अपमानित करता है और मोदी शासनका अपमान करता है । ‘फेसबुक’के संज्ञानमें यह प्रकरण आनेके पश्चात अब भी सिद्धार्थ मजूमदार निरन्तर ‘ट्विटर’पर विषवमन कर रहा है !
यह प्रकरण ‘फेसबुक’ आदिके हिन्दूद्रोही होनेका स्पष्ट प्रमाण है ! हिन्दुओंने वैधानिक मार्गसे ऐसे हिन्दूद्रोहियोंका विरोधकर इनकी सत्यता सबके समक्ष लानी चाहिए ।
**********
२४ मुस्लिम बने हिन्दू
हरियाणाके पानीपत जनपदके गांव बडी आसनमें आज चार परिवारोंके २४ मुस्लिम समाजके लोगोंने हिन्दू धर्म अपनाया । गांवके शिव मन्दिरमें सनातन धर्मके अनुसार हवनकर, उनका यज्ञोपवीत संस्कार करवाया गया और जनेऊ धारण करवाकर उनका सनातन धर्ममें पुनरागमन हुआ ।
ज्ञातव्य है कि भारतमें जितने मुसलमान हैं वे मुगलकालमें भयवश या लोभके कारण मुसलमान बने हैं और इस्लामकी धर्मान्धताके कारण उनकी ऐसी मतिभ्रष्ट हुई कि वे न केवल हिन्दुओंके; अपितु हिन्दू संस्कृतिके भी शत्रु हो गए हैं । ऐसेमें यदि किसीको अपने मूल धर्मका बोध होता है और वह सनातन धर्म अपनाकर हिन्दू बनना चाहता है तो उनका स्वागत और सत्कार किया जाना चाहिए, इसीमें उनका, हमारा, सम्पूर्ण भारतका, भारतीय संस्कृतिका और विश्वका कल्याण निहित है ।
**********
‘कोरोनिल’के प्रसारपर रोकसे सामाजिक प्रसार माध्यमोंपर हिन्दुओंने रोष व्यक्त किया
गत दिवस पतंजलि आयुर्वेदके माध्यमसे योगके एक अंग ‘आसन’ को सिखानेवाले बाबा रामदेवने जयपुरकी एक संस्था ‘निम्स’के साथ कोरोनाकी एक औषधि ‘कोरोनिल’ प्रस्तुत की और प्रतिवाद किया कि इससे कोरोनाका संक्रमण समाप्त हो, रोगी स्वस्थ हो जाता है । रोगियोंपर किए परीक्षणमें इस औषधिके शतप्रतिशत सकारात्मक परिमाण सामने आए हैं । इस औषधिका मूल्य भी ६००₹ से कम है और यह पूर्णतः आयुर्वेदिक जडी बूटियोंसे बनी है । मध्याह्नमें प्रस्तुत इस औषधिके आनेके पश्चात भारत शासनके आयुष मन्त्रालयने एक वक्तव्य जारी कर इस औषधिके विज्ञापन और विक्रयपर रोक लगा दी, जिसकी प्रतिक्रियास्वरूप जनसामान्यने अपना रोष सामाजिक जालस्थलोंपर व्यक्त किया ।
आयुष मन्त्रालयको अपने निर्णयपर पुनर्विचार करना चाहिए और इस औषधिके प्रसारमें सहयोग करना चाहिए । जिस मन्त्रालयकी स्थापना आयुर्वेदके प्रसारके लिए की गई हो और जो स्वयं अपने माध्यमसे आयुर्वेदिक क्वाथका वितरण कर कोरोनाकी रोकथाम कर रहा है, वह किसी आयुर्वेदिक औषधिपर रोक कैसे लगा सकता है ? तथापि आयुष मन्त्रालयने यह निर्णय लिया है तो निश्चित ही इसपर कोई न कोई दबाव होगा, ऐसी आशंका जनताद्वारा व्यक्त की जा रही है । आगामी हिन्दू राष्ट्रमें आयुर्वेदके प्रसारमें व्यवधान उत्पन्न करनेवाले दण्डित किए जाएंगे !
Leave a Reply