उत्तिष्ठ कौन्तेय
१. भारतके गुप्तचर विभागकी सूचनाके अनुसार निर्भया दुष्कर्म प्रकरणका वह कथित मुसलमानी बाल आरोपी, जिसे दिसम्बर माहमें ‘सुधार गृह’से मुक्त कर किया गया, वह बाहर आनेके पश्चात आतंकी गतिविधियोंमें लिप्त होनेके संदेहमें आया है । ‘आइबी’ने इस आरोपीके जिहादियोंसे सम्पर्कमें होनेकी चेतावनी जारी की है । इसका कारण ‘सुधार गृह’में उसकी मतिभ्रष्ट करनेवाला साथी है, जो २०११ के देहली उच्च न्यायालयमें बम विस्फोटका आरोपी कश्मीरी मुसलमान है !
यदि कलको यह कथित बाल जिहादी, कोई बडा अपराध करता है तो क्या इसके लिए इस जघन्य अपराधीको छोडनेवाला विधान, न्यायालय और हमारे नेतागण दोषी नहीं होंगें ? इससे ज्ञात होता है कि हमारी वर्तमान व्यवस्था एक सुरक्षित राष्ट्र नहीं दे सकती है; अतः इसमें परिवर्तन आवश्यक है !
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२. पूर्णतया ‘लॉकडाउन’ होनेके पश्चात भी झारखण्डके रांचीके मुसलमानी समुदायके एक कट्टरपन्थी इदरीश अब्दुल्लाह अंसारी नामक प्राध्यापकपर पाच सौसे अधिक बच्चियोंको पढानेके बहाने मदरसेका द्वार बंद करके बन्दी बनाए रखनेका आरोप लगा है । उल्लेखनीय है कि छात्राओंके परिजनोंद्वारा परिवाद करनेपर भी उनसे नहीं मिलने दिया गया ।
वहांसे एक बच्चीद्वारा सूचना देनेपर पुलिसने बन्द द्वार तोडकर बच्चियोंको बाहर निकाला ।
जब सामान्य विद्यालय भी सभी नियमोंका पालन कर रहे हैं तो जिहादी शिक्षा देनेवाले मदरसे कैसे यह दुस्साहस कर पा रहे हैं ? शासन ऐसे मदरसोंको त्वरित बन्द करनेका आदेश दे !
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३. अफगानिस्तानकी राजधानी काबुलमें गुरुद्वारेपर आतंकवादियोंद्वारा किए गए आक्रमणमें एक आत्मघाती आतंकीने स्वयंको उडा लिया, जिससे २७ सिख बंधुओंकी मृत्यु हो गई । सुरक्षा बलोंने गुरुद्वारेको चारो ओरसे घेर रखा है । उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व भी अल्पसंख्यक सिखोंपर आतंकियोद्वारा आक्रमण किए जाते रहे हैं । २०१८ में भी जलालाबादमें ‘इस्लामिक स्टेट’द्वारा आत्मघाती आक्रमणमें १३ सिख मारे गए थे, आक्रमणसे सिख समुदाय इतना भयभीत हो गया था कि उन्होंने देश छोडनेका निर्णय कर लिया था ।
ऐसी विश्वव्यापी कठिनाईके समयमें जिहादियोंद्वारा सिखोंके धार्मिक स्थलपर किया गया आक्रमण इनकी विक्षिप्त मानसिकताको ही दर्शाता है और दिखाता है कि विश्वशांति हेतु इन आतंकियोंका अन्त शीघ्रातिशीघ्र आवश्यक है एवं ऐसे सिखोंने एक बार यह कोरोना संकट समाप्त जाए तो त्वरित भारत आ जाना चाहिए एवं भारतने भी इन्हें नागरिकता दे देना चाहिए ।
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४. झारखण्डकी राजधानी रांचीके तमाड जनपदमें स्थित राडगांव मस्जिदसे ११ विदेशी मौलवियोंको पुलिस प्रशासनने अभिरक्षामें लिया है । इन मौलवियोंमेंसे ३ मौलवी चीनसे हैं, जबकि ४-४ किर्गिस्तान और कजाकिस्तानसे हैं । उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व बिहारके पटनामें १२ विदेशी इस्लाम प्रचारकोंको एक मस्जिदसे अपनी अभिरक्षामें लिया था और इन्होंने भी अपने आपको इस्लाम प्रचारक बताया है । पटनाकी भांति राडगांवके स्थानीय निवासियोंको भी संदेह होनेपर उन्होंने इसकी सूचना प्रशासनको दी ।
धर्म परिवर्तन करनेवाले ऐसे विदेशी संगठनोंको, जो कि भारतमें आकर जनसमुदायको धर्मपरिवर्तन हेतु भडकाते हैं और आतंक फैलाते हैं, शासनद्वारा शीघ्रातिशीघ्र प्रतिबन्धित करना चाहिए और साथ ही उन मस्जिदोंको बन्द करना चाहिए, जो इन्हें आश्रय देती हैं !
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