उत्तिष्ठ कौन्तेय
हिन्दुओंके विरोधसे झुका तमिलनाडु प्रशासन, नहीं ढकी जाएगी भारत माताकी प्रतिमा
तमिलनाडुके कन्याकुमारी जनपदके अन्तर्गत इस्साकि अम्मान मन्दिरके समक्ष भारत माताकी प्रतिमाको लेकर विवाद उत्पन्न हो गया, जिसके पश्चात ईसाई समुदायके प्रभावमें आकर प्रशासनने प्रतिमाको ढक दिया । इस कार्यवाहीसे हिन्दुओंमें रोष उत्पन्न हो गया तथा मुख्यमन्त्रीसे इसे हटवानेका आग्रहकर चेन्नईमें विरोध प्रदर्शन आयोजित हुए; अन्तत: प्रशासनकी ओरसे जनपदके सक्षम अधिकारीद्वारा प्रतिमासे आवरण हटानेका आदेश प्रेषित किया गया । अब प्रतिमासे आवरण हटानेकी चूक सुधारने हेतु ‘भारत माता पूजन’के अन्तर्गत विशेष कार्यक्रमका आयोजन किया जा रहा है ।
इससे स्पष्ट है कि धूर्त ‘मिशनरियां’ व उनके पोषक शासकगण कितने ही शक्तिशाली क्यों न हों, यदि हिन्दू एक हैं तो हमें कोई पराजित नहीं कर सकता है । हिन्दुओ, अब एक हो जाएं; क्योंकि अब भारत माताकी प्रतिमाका विरोध करनेवालोंको देशसे बाहर निकालनेका समय आ गया है ! (२५.०५.२०)
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जिहादी जीशानने साजिद, अमजद और वाजिदके साथ मिलकर अपनी १० वर्षीय बहनके साथ सामूहिक दुष्कर्मकर की हत्या
राजस्थानके जयपुरमें जिहादी जीशानने अपने तीन मित्रोंके साथ मिलकर अपनी १० वर्षीय मन्दबुद्धि बहनसे सामूहिक दुष्कर्मकर उसकी हत्याकर दी है । मनोहरपुर थाना पुलिसने चारों आरोपियोंको शनिवार, २३ मईको बन्दी बनाया है । इनमें जीशान अली मुख्य आरोपी है, जो मृतक बच्चीका बडा भाई है । जयपुर ग्रामीण पुलिस अधीक्षक शंकर दत्त शर्माने बताया कि इस प्रकरणमें परिवारके शेष सदस्योंकी भूमिकाकी जांच की जा रही है ।
जिहादी जब अपनी बहनके साथ कुकृत्यकर सकते हैं तो हिन्दुओ, विचार करें कि हमारी बहन-बेटियां कितनी सुरक्षित हैं ? ऐसे पैशाचिक मानसिकताके लोग भारतमें रहने योग्य नहीं हैं और जब राजपूतोंके राज्य, जयपुर सदृश नगरोंमें भी यह होने लगे तो हिन्दुओंने अपनी बहन-बेटियोंकी रक्षा हेतु भी सज्ज हो जाना चाहिए !
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गोरखपुरमें पाकिस्तानका उदाहरण देनेवाली शिक्षिका निलम्बित
गोरखपुरके जीएन विद्यालयमें कक्षा चारको पढानेवाली शिक्षिका शाबाद खानमने ‘ऑनलाइन’ कक्षामें बच्चोको संज्ञाके कुछ उदाहरण ‘व्हाट्सऐप्प’पर भेजे, जिनमेंसे कुछ उदाहरणोंमें लिखा था कि ‘पाकिस्तान इज आवर डियर होम लैंड, आई विल ज्वाइन पाकिस्तान आर्मी, राशिद मिन्हाज वाज ए ब्रेव सोलजर ।’ अभिवावकोंद्वारा आपत्ति करनेपर उसने कहा कि स्वयं ही उसके पाकिस्तानके स्थानपर ‘इण्डिया’ लिख लो, अब विद्यालय प्रबन्धनने कार्यवाहीकर उसे निलम्बितकर दिया है । उसके बचावमें पतिका कहना है कि उसने अज्ञानतावश ऐसा किया है । सामाजिक प्रसार माध्यम तथा समाचार पत्रपर प्रकरण प्रकाशित होनेके पश्चात पुलिसद्वारा जांच आरम्भकर दी गई है ।
शिक्षिकाके पतिने उचित ही कहा है कि उसकी पत्नीने यह अज्ञानतावश किया है, एक ऐसी अज्ञानता, जो मदरसों व मस्जिदोंसे होकर समूचे जिहादी समुदायमें प्रसारित होकर भारतके प्रति विषवमन करती है, जिसे इस्लामके अनुसार ‘जिहाद’ भी कहा जा सकता है । हिन्दुओंने अब स्वयं ही यह देखना चाहिए कि जहां जिहादी शिक्षक हो अथवा शिक्षासे सम्बन्धित कार्याधिकारी हो, वहां अपने बच्चोंको भेजना चाहिए या नहीं । (२५.०५.२०)
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गुजरातमें मस्जिदके पीछे अवैध कसाईशालासे १५०० किलोग्राम मांस अधिग्रहित किया गया
गुजरातके शाहपुरके रानी रूपमती मस्जिदके पीछे एक अवैध कसाईशालासे (बूचडखानेसे) १२ पशु तस्करोंको तथा १५०० किलो मांस पुलिसने अधिग्रहित किया है । शनिवार, २३ मईको जब पुलिस तरखुनिया बगीचामें वाहनोंकी जांच कर रही थी, तब एक मोटरसाईकिलपर बैठा व्यक्ति भागते हुए दिखाई दिया तो पुलिसने उसका पीछा किया । वह रानी रूपमती मस्जिदकी ओर भागा । वहां पुलिस अधिकारियोंको ट्रकोंमें अनेक पशु दिखाई दिए । अधिकारियोंने पशुपरिवहनके लिए अनुज्ञापत्र (परमिट) दिखानेको कहा तो उनके पास कुछ नहीं था । पुलिसने उस्मान गनी कुरैशी, रफीक कुरैशी, घोष कुरैशी और मोहम्मद कुरैशी नामक चार लोगोंको बन्दी बनाया है ।
धर्मान्धोंकी दृष्टिमें नियम आदिका कोई अर्थ नहीं है । अपनी तमोगुणी वृत्तिके कारण ये सदैव पशुहत्या करते रहते हैं और इस प्रकरणमें ये अनेक बार गोरक्षकोंकी हत्या भी करते हैं । जबतक इन्हें कठोर दण्ड नहीं दिया जाएगा, तबतक इनमें भय निर्माण नहीं हो सकता है; परन्तु विडम्बना यह है कि हिन्दुओंके कथित हितैषी दल भी यह करनेमें असमर्थ होते हैं !
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देहलीमें जय श्रीराम नहीं कहनेपर जिहादीके पीटे जानेके आरोपको पुलिसने बताया लोकवाद (अफवाह)
देहलीके यमुना बाजार निवासी कामिलके मारपीटके आरोपको पुलिसने आपसी झगडा बताया है । कामिलने आरोप लगाया था कि वह जब औषधि लेकर जाफराबादके ‘मेट्रो स्टेशन’के पाससे निकल रहा था तो उसे और उसके छोटे भाईको रोककर कुछ लोगोंने मारपीट की । उसके छोटे भाईको ‘जय श्रीराम’ बोलनेके लिए दबाव बनानेका प्रयास किया गया और जब उसने नहीं बोला तो उससे मारपीट की गई, जिससे उसको चोट लगी । उसने बताया कि उसकी दो पहिया ‘स्कूटी’में ईंधन समाप्त हो गया था । वाहनको धकेलकर ले जाया जा रहा था, तभी ऐसी घटना हुई । सूचना मिलनेके पश्चात पुलिसने कामिलके निवासपर जाकर विवरण लिया; किन्तु यह प्रकरण मनगढन्त एवं सन्दिग्ध बताया जा रहा है । पुलिसने बताया कि दोनों समुदायोंके मध्य आपसी झगडा हुआ और दोनोंको चोटें लगी; किन्तु उसे साम्प्रदायिक रूप-रंग दिया जानेका प्रयास किया जा रहा है । इस क्षेत्रमें अधिक पुलिसबल नियुक्तकर दिया गया है, जिससे स्थितिपर नियन्त्रण बना रहे । समाचार ‘पोर्टल’ ‘द वायर’ने मुसलमानको पीडित बनाकर इस समाचारको बढा-चढाकर और वास्तविक जानकारीको छिपाते हुए इसे साम्प्रदायिक बनानेका भी प्रयास किया !
जिहादी स्वयं उत्पातकर ऐसे आरोप लगाते हैं; क्योंकि वे जानते हैं कि हिन्दुओंके शत्रु ‘द वायर’ न्यूज पोर्टल जैसे माध्यम उनका समर्थन करेंगे ही और उन्हें शासनसे भी सहानुभूति अवश्य ही मिलेगी; परन्तु अब हिन्दुओंमें जाग्रति निर्मित होने लगी है, जिससे जिहादियों व ‘द वायर’ सदृश हिन्दूद्रोहियोंके ऐसे षड्यन्त्र उजागर होने लगे हैं, यह प्रसन्नताका विषय है ।
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वाहनमें खरोंच आनेपर जिहादियोंने शाक (सब्जी) विक्रेता सनातन दासको पीट-पीटकर मार डाला
असमके तेतेलिया गांवके सनातन दास, एक कारखानेमें श्रमिकके रूपमें कार्य करते थे; परन्तु गृहबन्दीके कारण ‘फैक्ट्री’ बन्द हो गई थी; अतः उन्होंने आर्थिक कठिनाइयोंसे निपटनेके लिए अपनी साईकिलपर शाक (सब्जियां) क्रय करनेका कार्य आरम्भ किया था । इसी क्रममें उसकी साईकिल एक चारपहिया वाहनसे टकरा गई, जिसमें असमगण परिषद (एजीपी) नेताका भाई फैजल अली व लाजिल अली था । वाहनपर थोडीसी खरोंचके लिए वे दोनों इतने क्रोधित हुए कि उन्होंने सनातन दाससे विवाद किया व पीटना आरम्भकर दिया । इसके लिए उन्होंने तीन और लोगों शब्बीर अली, युसुब अली व फरजान अलीको बुलाया और सबने मिलकर सनातन दासकी पिटाई की एवं उसे गम्भीर अवस्थामें छोडकर भाग गए । स्थानीय लोगोंने सनातनको चिकित्सालयमें प्रविष्ट कराया; परन्तु एक घण्टेके पश्चात सनातन दासकी मृत्यु हो गई ।
वाहनपर खरोंच आना तो मात्र एक ‘बहाना’ है, वस्तुतः यह जिहादियोंकी विषैली मानसिकताको दर्शाता है, जो किसी भी हिन्दूको देखकर जिहाद करनेका विचार करती है । दुःखद स्थिति यह है कि जिहादियोंने असमको आतङ्कका एक मुख्य केन्द्र बना दिया है और अब तो वे नेताओंके पदपर भी बैठने लगे हैं, यह स्थिति परिवर्तित हो; इसलिए हिन्दू राष्ट्रकी आवश्यकता है !
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आन्ध्र प्रदेश शासनमें अनेक पदोंपर कार्यरत रहे जिहादी रहमानने प्रवासी भारतीयोंको कहे अपशब्द
आन्ध्र प्रदेश शासनमें विभिन्न पदोंपर कार्यरत रह चुके जिहादी मानसिकता एवं विचारधारावाले अब्दुल रहमान इलियासने प्रवासी भारतीयोंके लिए अपशब्दोंका प्रयोग किया है । उसने भारतीय प्रवासियोंको मूर्ख और हिजडा बताया है ।
अब्दुल रहमान इलियासने अपने ‘फेसबुक पेज’पर लिखा कि अब लोगोंको ज्ञात हो रहा है कि घृणास्पद मानसिकता कितनी भयानक है । उसने आरोप लगाया कि वो २०१५ से ही ‘इस्लामोफोबिया’को पनपते हुए देख रहा है, जिसमें लोग इस्लाम और मुसलमानोंको लेकर एक धारणा लेकर चल रहे हैं । उसने कहा कि हिन्दुओंको इस्लामी शब्दावलीका ज्ञान ही नहीं और उसे लेकर कोलाहल (शोर) करते रहते हैं । हिन्दू ऐसा समझते हैं कि यह समूचा देश उनका ही है और वो इसके ठेकेदार बनकर बैठ जाते हैं, स्वयंको हिन्दू समाजका प्रवक्ता मान लेते हैं । साथ ही उसने प्रवासी भारतीयोंके बारेमें कहा कि वो मुसलमानोंको अपशब्द कहते हैं और समझते हैं कि भाजपा, संघ या मोदी उनके रक्षक हैं । अब समय आ गया है, जब इन ‘हिजडों और बेहूदों’को, वो जहां हैं, उन्हें वहीं कीलसे ठोक दिया जाए !
एक ओर ‘श्रीवैष्णो देवी श्राइन बोर्ड’ इफ्तारका आयोजन करते है तो दूसरी ओर जिहादी हिन्दुओंको कील ठोकनेकी योजना बनाते हैं । हिन्दुओंको अब यह समझना चाहिए कि सर्पको कितना भी दूध पिलाया जाए, वह विष ही उगलेगा और इस छद्म ‘भाईचारे’का त्याग करना चाहिए; क्योंकि यह हमपर ही भारी पड रहा है !
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शौकत अली और राशिदने दलित नेता हरि मांझीपर की जातिगत टिप्पणी
सामाजिक जालस्थलपर शौकत अली और राशिदद्वारा जातिसूचक और अपमानजनक टिप्पणी करनेके प्रकरणमें भाजपा नेता हरि मांझीने दोनोंके विरुद्ध सोमवार, २५ मईको उत्तर प्रदेश पुलिससे वैधानिक कार्यवाहीकी मांग की है । हरि मांझीका कहना है कि पहले राशिद मियां नामक एक व्यक्तिने उन्हें ‘दलित’ होनेके लिए अपमानित किया; परन्तु उन्होंने उसे समझाते हुए क्षमाकर दिया था, जिसके पश्चात राशिद मियांने ‘ट्विटर’पर उनके विरुद्ध अपमानजनक टिप्पणी की । उल्लेखनीय है कि शौकत अलीने ‘ट्विटर’पर दो ‘ट्वीट’ किए, एक ‘ट्वीट’में उसने लिखा था, “चाहे कितनी भी चमचागिरीकर लो, राम मन्दिरके पुजारी तो तुम बननेसे रहे । किसीका कर्म छुपा न धर्म, तुम्हें करना वही है, जो तुम करते आए हो, तुम फिर भी इनकी ‘लेटरिंग’ ही साफ करोगे दलित जी !”
हिन्दू धर्मकी विडम्बना है कि दलित-सवर्णमें विभाजित हिन्दू अन्य पन्थियोंका लक्ष्य बनता रहता है और इसी प्रकरणमें वह दिशाभ्रमित भी हो जाता है, जिसका लाभ जिहादी लेते हैं; इसलिए अब हिन्दू समाजको एक होनेकी आवश्यकता है, तभी हम हिन्दूविरोधियोंका सामनाकर सकते हैं ।
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