उत्तिष्ठ कौन्तेय


१. उत्तर-पूर्वी देहलीमें हुई हिंसामें उपद्रवियोंने मंगलवार, २५ फरवरीको १९ वर्षीय हिन्दू युवक विवेकपर आक्रमण किया और उसके सिरमें ‘ड्रिल मशीन’से छेद कर दिया ! इसके पश्चात उसकी शल्यचिकित्सा जीटीबी चिकित्सालयमें हुई, जिससे विवेककी स्थितिमें धीरे-धीरे सुधार हो रहा है ।
    इससे स्पष्ट है कि आतंकी मानसिकताको धारण कर चुके जिहादियोंकी मानवता ही समाप्त हो चुकी है और उनका लक्ष्य केवल किसी भी प्रकारसे प्राण लेना है । शासनको इस विषयमें पहले ही गम्भीर होना चाहिए था, तो यह सब नहीं होता !
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२. केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरोने चेन्नईके ‘एनजीओ’ ‘करुणा बाल विकास’के विरुद्घ विदेशी दानकर्ता ‘कम्पैशन इन्टरनेशनल’से कोट्यावधि धन दानके रूपमें लेनेके कारण अभियोग प्रविष्ट किया है । उल्लेखनीय है कि इस धनको धर्मपरिवर्तनमें प्रयोग किया जाता था और भारत शासनने मार्च, २०१७ में इसे भारतमें धन दान देनेसे प्रतिबन्धित कर दिया था ।
   भारत शासन ऐसे सभी कथित समाजसेवी ‘एनजीओ’की जांच कर उन्हें बन्द करे; क्योंकि सबसे अधिक अवैध धन इन्हींके माध्यमसे भारत आ रहा है, जिसे ईसाई धर्मपरिवर्तन हेतु दुरुपयोग करते हैं !
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३. बिहार विधानसभामें ‘एनपीआर’को २०१० के प्रावधानोंके अनुसार और ‘एनआरसी’को राज्यमें नहीं पारित करनेको लेकर एक प्रस्ताव सर्वसम्मतिसे पारित हुआ है ! इससे पूर्व मुख्यमन्त्री नीतीश कुमारने बताया कि बिहारमें ‘एनआरसी’ पारित करनेका कोई औचित्य नहीं है और बिहार शासनने केन्द्रको पत्र लिखकर ‘एनपीआर’ प्रपत्रोंसे विवादास्पद धाराओंसे छूट मांगी है ।
        आजके स्वार्थी नेतागण देशहितके सन्दर्भमें निर्णय न लेकर देशको विनाशकी ओर धकेल रहे हैं, अब तो जनता जागृत होकर ऐसे नेताओंका बहिष्कार करें व उन्हें पाठ पढाए !
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४. भोपालमें मस्जिद समितिके आयोजनमें सम्मिलित हुए मुख्यमन्त्री कमलनाथने इमामका वेतन २२०० से बढाकर ५००० और मोईज्जनका वेतन १९०० से बढाकर ४५०० रुपए करनेपर सहमति दी और कहा कि हमारी यह अनेकतामें एकताकी संस्कृति आज तक इसलिए बनी हुई है; क्योंकि पुरानी पीढीके लोगोंने इसे न केवल निभाया, अपितु सुरक्षित रखनेके लिए समर्पित भी रहे हैं ।
    आज देशकी जो स्थिति है, वह ऐसे ही कथित धर्मनिरपेक्ष नेताओंके कारण है, जो इमामोंका वेतन बढाते हैं और मन्दिरोंका सरकारीकरण कर उसे धनको लुटते हैं ! हिन्दू मिलकर ऐसे नेताओंको सत्ताच्युत करें !
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५. उत्तर-पूर्वी देहलीके चांदबागमें नागरिकता विधानके विरोधमें आरम्भ हुई हिंसामें उपद्रवियोंने एक गुप्तचर विभागके सुरक्षाकर्मी, अंकित शर्माकी हत्याकर शवको नालेमें फेंक दिया ! यह घटना तब घटित हुई जब अंकित चाकरीसे अपने घर लौट रहे थे, तो उपद्रवियोंने उन्हें घेर लिया और उनकी पीट-पीटकर हत्या कर दी !
   हिन्दू बहुल राष्ट्रमें हिन्दुओंपर इसप्रकारके आक्रमण दर्शाते हैं कि इस देशमें अब कोई भी हिन्दू, कहीं भी सुरक्षित नही हैं । हिन्दुओंको अपने देशमें यदि सुरक्षित रहना है तो हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना ही एकमात्र पर्याय है !
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६. झारखण्डके रांचीमें मदरसेमें पढनेवाली बारह वर्षीय छात्रासे मौलाना शाहिदद्वारा दुष्कर्मका प्रकरण उजागर हुआ है । शाहिदने बच्चीसे कई बार दुष्कर्म किया । जब वह गर्भवती हो गई तो उसका बलपूर्वक गर्भपात करा दिया गया । प्रकरण उजागर होनेपर लोग अपनी बच्चियोंको वापस घर ले जा रहे हैं । पुलिसने मौलानाको बन्दी बनाया है ।
   वासनामें लिप्त ये मौलाना अपने समुदायकी छोटी बालिकाओंको भी नहीं छोडते हैं और ऐसे अनेक समाचार आए दिन आते हैं । ऐसे अनैतिक कार्य करनेवाले मदरसोंको प्रशासनद्वारा तुरन्त बन्द कर देना चाहिए ।
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७. सोमवार, २४ फरवरीको जिहादियोंद्वारा हिन्दू युवक विनोद कुमारकी हत्या कर दी गई ! उनके पुत्र नितिन किसी प्रकार बच निकले । नितिनने बताया कि हमने कुछ अनुचित नहीं किया था । उन्होंने उनकी मोटरसाइकिलके ‘स्टिकर’, जिसपर ‘जय श्रीराम’ लिखा हुआ था, उसे देखकर आक्रमण किया !
   ‘अल्लाहु अकबर’ और ‘नारा-ए-तकबीर’का उद्घोष करनेवाले कथित शान्तिदूत ‘जय श्रीराम’का ‘स्टीकर’ देखकर प्राण ले लेते हैं और एक परिवारको अनाथ बना देते हैं; हम लोग कबतक धर्मनिरपेक्षताका ‘चश्मा’ पहनकर ऐसे ही प्राण गवांते रहेंगे ?


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