उत्तिष्ठ कौन्तेय
१. जामिया मिलिया इस्लामिया’ने ट्वीटकेद्वारा नागरिकता संशोधन विधानका समर्थन करनेवाले १५ हिन्दू छात्रोंको अनुत्तीर्ण करनेका दावा करनेवाले प्राध्यापक अबरार अहमदको निलम्बित कर दिया है । विश्वविद्यालयने कहा है कि अबरारने जो कहा, वह अस्वीकार्य है; इसलिए जांच होने तक उसे निलम्बित कर दिया गया है । वहीं जामियाके एक सूत्रने कहा कि प्राध्यापकको हिन्दू छात्रोंके ‘रोल नंबर’ ज्ञात है; इसलिए प्राध्यापकको हिन्दू छात्रोंका अभिज्ञान करना सरल है ।
केन्द्र शासन त्वरित इस विषयमें कडा संज्ञान ले और प्राध्यापकको स्थायी रूपसे बाहर करे; क्योंकि ऐसी जिहादी मानसिकताके लोग यदि छात्रोंको पढाएंगें तो वे निश्चित ही आतंकी ही बनेंगें !
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२. उत्तरप्रदेशके मेनपुरीमें ‘लॉकडाउन’के चलते प्रतिबन्धके पश्चात भी बुधवारको भोगांवकी मस्जिदमें नमाज पढनेके लिए नमाजी एकत्र हो गए । सूचना मिलते ही पुलिस वहां पहुंच गई और उन्हें रोकनेका प्रयास किय । इसपर धर्मान्धोंने पुलिसकर्मियोंके साथ झडप की । बडी संख्यामें पुलिस बल पहुंचनेके पश्चात ही स्थितिपर नियन्त्रण हो सका ।
ऐसी मानसिकताके लोग देशपर केवल अभिशाप मात्र हैं और कुछ नहीं ! यह भारतकी विडम्बना है कि इन्हें अभी भी व्यर्थ ही ढो रहा है और स्वयंकी हानि कर रहा है । ये लोग जब पुलिससे ही भयभीत नहीं होते तो अन्योंकी क्या स्थिति करेंगें ?
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३. अन्तर्राष्ट्रीय व्यापारिक पत्रिका ‘फोर्ब्स’के अनुसार चीनने हिन्द महासागरमें भारतकी ‘जासूसी’ करनेके लिए अपने शोध जहाज ‘शियांगग्यांघोघं ६’से लगभग दशकाधिक ‘ड्रोन’ छोडे हैं, जिससे वह भारतकी गतिविधियोंपर दृष्टि रख सके ! ब्यौरेके अनुसार गत माह ही चीनने यह ‘सी विंग ड्रोन’ वापस ले लिया और ३४०० स्थानपर दृष्टि रखी !
भारतद्वारा चीनकी सहायता करनेपर भी अपने वास्तविक शैतानी रुपमें प्रकट हो गया । यही वामपन्थका वास्तविक स्वरुप है । भारतको यह जानकर ऐसे शत्रु राष्ट्रसे सतर्क रहना होगा और चीनपर प्रत्येक प्रकारकी निर्भरता समाप्त करनी होगी !
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४. पीलीभीतमें अमरियाके लगभग ६ गांवोंके ३७ लोग १९ मार्चको मक्कासे मुम्बई होते हुए घर वापस लौटे थे । मुम्बई विमानतलपर (एयरपोर्टपर) सभीके हाथोंपर लगे चिह्नोंको उन्होंने अपने साथ लाए विदेशी ‘परफ्यूम’से मिटा दिया ! जांचसे बचनेके लिए रेलसे लखनऊ और वहांसे बसद्वारा पीलीभीतके गांवोंमें अपने घर लौटे । उल्लेखनीय है कि यह प्रकरण तब उजागर हुआ, जब उसी दिन एक महिलाका स्वास्थ्य बिगडनेपर ज्ञात हुआ कि उसे और उसके पुत्रको ‘कोरोना’ है !
यह जानते हुए कि जिहादी सभी प्रकारकी जांचको धर्मविरुद्ध बताते हैं, तो शासनने बाहरसे आए इन मुसलमानोंको सीधा जांच केन्द्र क्यों नहीं पहुंचाया ?, इसीसे नेताओंकी अनदेखीका बोध होता है । यदि इनका परिणाम अनेकोंको भोगना पडा तो इसका उत्तरदायित्व कौन लेगा ?
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