उत्तिष्ठ कौन्तेय
१. देहली उपद्रवमें गुप्तचर विभागके अधिकारी अंकित शर्माकी हत्यापर ‘आप’के संयोजक मयूर पंघालने समाजिक जालस्थलपर अंकित शर्माको ‘ठुल्ला’ कहा और यह भी कहा कि मरे हुए ठुल्लेके लिए उसे कोई दुःख नहीं है !
यह ‘आप’की मानसिकता दिखाता है । पुलिस अधिकारियोंके लिए यदि ये ऐसे वक्तव्य दे सकते है तो देहलीके नागरिकोंके लिए क्या ये कुछ विचार करेंगें, किंचित सोचें !
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२. पूर्वी देहलीमें मंगलवार सन्ध्याको एक युवतीने आंखों देखी स्थिति बताते हुए कहा कि वहां कुछ भी ठीक नहीं था । उसके घरके समक्ष ही उपद्रव और मारपीट हो रही थी । मुसलमान लोग हिन्दू क्षेत्रमें घुसनेका प्रयास कर रहे थे । मस्जिदसे दिनमें ही उच्च ध्वनि उपकरणसे (स्पीकर्स) संदेश भेजा जा रहा था कि दिनमें बारह बजेके पश्चात उपद्रव होंगे !
प्रशासनकी नाकके नीचे ये सब होता रहा और प्रशासन मौन साधे बैठा रहा; इसलिए हिन्दुओं यदि अपना अस्तित्व बचाना है तो एकजुट और जागरूक होना ही होगा !
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३. डॉ. भीमराव अम्बेडकरके पडपोते राजरत्न अम्बेडकरने अपने ‘फेसबुक’ पेजपर एक ‘वीडियो’ साझा करते हुए कहा कि ऑस्ट्रेलियामें ब्राह्मण गायका मांस विक्रय कर रहे हैं और उनके प्रतिष्ठानका नाम ‘brahamn pies’ है । भारतमें ब्राह्मण गायकी पूजा करते हैं और ऑस्ट्रेलियामें स्थिति विपरीत है । ‘टाइम्स फैक्ट चेक’द्वारा जांच करनेपर ज्ञात हुआ कि यह पूर्ण रूपसे ऑस्ट्रेलियाई प्रतिष्ठान है और इसका भारत या यहांके ब्राह्मणोंसे कोई लेना-देना नहीं है ।
राजरत्नने ऑस्ट्रेलियाई संस्थानको अनुचित ढंगसे ब्राह्मण समुदायसे जोडा है, इससे इनकी ब्राह्मणविरोधी कुत्सित व विकृत मानसिकता ही झलकती है, ऐसे ही लोग समाजमें विभाजनके उत्तरदायी हैं !
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४. जम्मू राज्यके उच्च न्यायालयके ‘डिवीजन बेंच’ ने ‘रोशनी एक्ट’के नामसे प्रख्यात ‘जम्मू-कश्मीर लैंड एक्ट’पर गम्भीर प्रश्न किए । तत्कालीन नेशनल कांफ्रेंस शासनने वर्ष २००१ में रोशनी अधिनियम बनाया था, जिसमें शासकीय भूमिपर अवैध अधिकार करनेवालोंको ही भूस्वामी बना दिया गया ! पीठने ऐसी व्यवस्थापर कडे प्रश्न किए तब अधिवक्ता अंकुर शर्माने कहा कि रोशनी अधिनियमके लाभार्थियोंमें कई राजनेता व प्रशासनिक अधिकारी सम्मिलित हैं !
क्या यह पूर्वके शासनद्वारा ‘लैण्ड जिहाद’का षड्यन्त्र था ? केन्द्र इसकी जांच करें और ऐसे भूमिको मुक्त कराए व दोषियोंपर कडी कार्यवाई करे !
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५. असममें भारतीय जनता पार्टीके मुख्यमन्त्री सर्वानन्द सोनोवालने भारतीय संस्कृतिके विरुद्ध जाते हुए राज्य शासनद्वारा संचालित सभी संस्कृत विद्यालयोंको बंद करनेका निर्णय लिया है; अतः असममें अब निजी संस्थानोंपर भले ही संस्कृतका ज्ञान दिया जाए; परन्तु शासकीय संस्थाओंमें संस्कृतकी शिक्षा कदापि नहीं दी जाएगी । असम भाजपाने तो शासनके इस निर्णयका स्वागत किया है !
इससे स्पष्ट है कि अवसरवादी नेताओंको केवल कुर्सीसे लेना-देना है, हिन्दुत्वके मुख्या रक्षक मानबिंदुओंसे नहीं; अतः हिन्दुओ, अब केवल हिन्दू राष्ट्र ही इस देशकी सांस्कृतिक गरिमाको बचानेका एकमात्र विकल्प है ।
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६. हरियाणाके ऊर्जा मन्त्री रंजीत चौटालासे जब देहली उपद्रवपर प्रश्न किया गया तो उन्होंने कहा कि उपद्रव तो होते रहते हैं; जब इन्दिरा गांधीकी हत्या हुई थी, तब भी हुए थे; यह जीवनका अंग है, जो चलता रहता है !
ऋषियोंके देश भारतका दुर्भाग्य है कि ऐसे-ऐसे नेता हमपर शासन कर रहे हैं, तभी यह असन्तुलन उत्पन्न होता है, जो उपद्रवके रूपमें सामने आता है !
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