उत्तिष्ठ कौन्तेय


१. सम्पूर्ण देशमें लॉकडाउनके प्रभावी होते हुए भी कर्नाटकके बेलगामके कट्टरपन्थी समुदायने इकत्रित होकर मस्जिदमें नमाज पढी तो पुलिसने कार्यवाही करते हुए बाहर आनेपर उनकी डंडेसे पिटाई की । कुछ लोगोंने इस वीडियोको कर्नाटक पुलिसकी बर्बरता बताते हुए साझा किया ।
        जब  ये धर्मांध केवल बातोंसे नहीं माने और जब विपदा देशपर आन पडी हो तो इसप्रकारके उपाय ही करने पडते हैं और कर्नाटक पुलिसको इसके लिए साधुवाद !
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२. चीनके वुहानसे हुआ आरम्भ हुआ कोरोना विषाणुका संक्रमण पूरे विश्वमें प्रसारित होनेके पश्चात यह उजागर हो रहा है कि चीनने इस महामारीको अब नियन्त्रित कर लिया है; परन्तु आरम्भमें इस संक्रमणको लेकर विश्वको दिशाहीन करनेके गम्भीर आरोप लग रहे हैं कि मनुष्यसे मनुष्यमें संक्रमणकी बात चीनने गोपनीय रखी थी,  चीनने अब विदेशी नागरिकोंके प्रवेशपर भी प्रतिबन्ध लगा दिया है । उसके अनुसार अब जो नए संक्रमणके प्रकरण समक्ष आ रहे थे, वो विदेशसे आनेवाले नागरिकोंमें मिल रहे थे; इसलिए चीनके विदेश मन्त्रालयने इसकी घोषणा गुरुवारको की कि ये प्रतिबन्ध उन्होंने विदेशोंमें रहनेवाले अपने उन नागरिकोंके लिए लगाया है, जिनके पास ‘वीजा’ और ‘रेजीडेंट परमिट’ है ।
        यह समूचा प्रकरण चीनकी कुटिल मानसिकताको उजागर कर रहा है कि उसकी स्वार्थी मानसिकताने पूरे विश्वको वैश्विक महामारीका उपहार दिया है । अब सभी देशोंको चीनके विरुद्ध एकजुट होकर निर्णय लेना चाहिए और इस देशसे सभी प्रकारकी निर्भरता समाप्त करनी चाहिए !
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३. बिहारके दरभंगा जनपदके लहेरियासराय थानाके अन्तर्गत नीम चौकमें पुलिसद्वारा धर्मान्धोंकी भीडको हटानेके लिए बल प्रयोग करनेपर स्थानीय धर्मान्धोंद्वारा घरोंकी छतसे पथराव किया गया ! ‘एसएसपी’ योगेन्द्र कुमारने बताया कि दोषियोंके विरुद्ध कार्यवाही की जाएगी और किसी भी स्थितिमें ‘लाॅकडाऊन’ नहीं तोडने दिया जाएगा !
      जिहादी मानसिकताके लोगोंको न देशकी चिन्ता है और न ही वैधानिक व्यवस्थाकी; परन्तु अन्योंकी रक्षा हेतु अब इनसे कडाईसे निपटना आवश्यक हो गया है !
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४. महाराष्ट्रके सांगली जनपदके इस्लामपुर गांवमें रहनेवाले एक ही कुटुम्बके १२ लोगोंको कोरोना पाया गया है । इस कुटुम्बके हजसे लौटे ४ सदस्योंको ‘आइसोलेशन’में रखा गया था तो जांचमें उन्हें ‘कोरोना’ पाया गया ! चिकित्सकीय दलने परिवारके साथ सम्बन्धियोंको भी ‘आइसोलेट’ किया, जिसमें उन्हें भी ‘कोरोना’ पाया गया है ! चिकित्सकोंको इस बातका भय है कि यह श्रृंखला बडी भी हो सकती है !
       क्या जब यह व्यक्तिसे व्यक्ति संक्रमण होकर विदेशसे आ रहा है तो ऐसेमें हजयात्रियोंको देशमें आनेकी अनुमित देनी चाहिए थी ? क्या केन्द्र शासनने इसपर पहलेसे प्रतिबन्ध नहीं लगाना चाहिए था ? अब भी केन्द्रसे विनती है कि सामूहिक नमाज आदिपर कडाईसे कुछ माह प्रतिबन्ध लगाए; अन्यथा स्थिति विकराल रूप ले लेगी !


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