उत्तिष्ठ कौन्तेय
योगी शासन करेगा उत्तरप्रदेशके मदरसोंमें प्रत्येक मौलवीके कागदकी (कागजकी) जांच
उत्तर प्रदेशके कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयमें ‘अनामिका शुक्ला’का प्रकरण उजागर होनेके पश्चात अब शासकीय विद्यालयोंसे लेकर मदरसोंके शिक्षकोंके सभी लिखितपत्रोंकी (दस्तावेजोंकी) जांच आरम्भ हो गई है । प्रदेशके मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथके कार्यालयकी ओरसे आए नूतन आदेशमें राज्य शासनद्वारा अनुदान प्राप्त सभी अरबी-फारसी मदरसोंके मौलवियोंके प्रमाण-पत्रोंकी जांच करनेके आदेश दिए गए हैं ।
अल्पसङ्ख्यक प्रकरणके मन्त्री मोहसिन रजाने बताया है कि उत्तर प्रदेशके मदरसोंमें हुई नियुक्तियोंकी भी जांच होगी । उन्होंने कहा कि सपाने ‘वोट बैंक’के लिए मदरसोंमें भ्रष्टाचार किया और अपने निकटवर्तियोंको अनुचित लाभ पहुंचाया । कूट प्रमाणपत्रोंके आधारपर मदरसेमें चाकरी (नौकरी) करनेवालोंके विरुद्ध अनेक परिवाद मिल रहे थे ।
छद्म नियुक्तिके साथ-साथ योगी शासन अवैध व बाहरसे आए मौलवियोंकी भी जांच अवश्य ही करे; क्योंकि यह देखनेमें आया है कि भारतके बाहरसे आए अनेक जिहादी रोहिंग्या मदरसोंमें आश्रय पा रहे हैं और अवैध कृत्य कर रहे हैं; अतः योगी शासन कडाईसे जांच करे व दोषियोंको कठोर दण्ड दे, यह सभी हिन्दुत्वनिष्ठोंकी मांग है !
**********
स्वरा भास्करकी ‘वेब सीरीज’में एक बालिकाका उत्तेजक अश्लील नृत्य दिखानेपर भडके प्रसून जोशी
अभिनेत्री स्वरा भास्करकी नवीन अन्तर्जाल शृंखलापर (वेब सीरीजपर) ‘केन्द्रीय चलचित्र प्रमाणन समिति’के (सीबीएफसीके) अध्यक्ष तथा लेखक प्रसून जोशीने ‘रसभरी’के उस दृश्यके प्रति अपना क्रोध व्यक्त किया है, जिसमें एक अल्पायु बालिकाको पुरुषोंके समक्ष उत्तेजक नृत्य करते दर्शाया गया है । उन्होंने कहा कि आज रचनाकार और दर्शक सोचें कि बात मनोरञ्जनकी नहीं, यहां बालिकाओंके प्रति दृष्टिकोणका प्रश्न है, यह अभिव्यक्तिकी स्वतन्त्रता है या मनानुसार शोषण ? उल्लेखनीय है कि विवादित दृश्यमें वह बालिका स्वरा भास्करके बाल्यकालके रूपमें अपने घरपर जन समूहके समक्ष उत्तेजित नृत्य करती दर्शाई गई है । अनेक लोगोंने भी इस ‘वेब सीरीज’को निकृष्ट स्तरका बताया है, जिसमें अध्यापक और शिष्यके मध्य अश्लीलताको दिखाया गया है ।
ऐसे चलचित्र, अन्तर्जाल शृंखलाएं तथा इन्हें बनानेवाले अभद्र नट-नटी प्रतिबन्धित होने चाहिए; क्योंकि ये युवाओंमें व्यभिचारिताका प्रसार करते हैं तथा मानसिक अधोगति करते हैं । अब शासकगणको इसके विषयमें विचार करना ही होगा; अन्यथा यदि युवा नहीं रहेगा तो हम इस देशके रहनेकी भी कल्पना नहीं कर सकते हैं !
**********
बंगाल शासनद्वारा ‘न्यूज पॉर्टल’ ‘ऑपइंडिया’के सम्पादकों और ‘सीईओ’के विरुद्ध परिवादपर सर्वोच्च न्यायालयने लगाई रोक
‘ऑपइंडिया’पर प्रकाशित प्रतिवेदनको लेकर बंगाल शासनने ‘सीइओ’, हिन्दी व अंग्रेजी सम्पादकों और सम्पादक नुपूर शर्माके पति वैभव शर्मापर परिवाद प्रविष्ट किया था, जिसपर उच्चतम न्यायालयने शुक्रवार, २६ जूनको रोक लगा दी ।
उल्लेखनीय है कि इन सभी समाचारोंको अन्य मीडिया संस्थानोंने भी प्रकाशित किया था; किन्तु केवल ‘ऑपइंडिया’को ही लक्ष्य बनाया गया । इन समाचारोंमें ममता बनर्जी प्रशासनद्वारा बंगालको इस्लामिक राज्यमें परिवर्तित करने और बांग्लादेशके साथ विलय करनेकी योजना बनाने, ‘कोरोना’से मरनेवालोंके शवका गुप्त ढङ्गसे निपटाने एवं वास्तविकताको छुपाने तथा कोलकातामें दुर्गा पूजा पण्डालमें हुई अजानसे सम्बन्धित सूचनाएं थीं । प्रशासनसे प्राथमिकीकी प्रति मांगनेपर भी उन्हें प्रति उपलब्ध नहीं करवाई गई । सर्वोच्च न्यायालयने प्राथमिकीकी आगेकी कार्यवाहीपर रोक लगाते हुए, इस सम्बन्धमें बंगाल शासनको अधिसूचना (नोटिस) भी दी है ।
‘ऑपइंडिया’ सदृश राष्ट्र प्रेमी समाचार ‘पोर्टल्स’ वास्तवमें उत्तम कार्य कर रहे हैं, तभी तो जिहादियोंका पोषक शासन उन्हें फंसाना चाहता है । निस्सन्देह आज बंगालमे हिन्दुओंका अस्तित्व ही सङ्कटमें है तो ममता प्रशासन उनके विरुद्ध स्वर मुखर करनेवालेको दबानेका प्रयास करता है । हिन्दू ऐसे हिन्दूद्रोही शासनतन्त्रको समूल उखाड फेंके और ऐसे राष्ट्रप्रेमी ‘न्यूज पोर्टल्स’के समर्थनमें खडे हों ! (२६.०६.२०)
**********
‘न्यूजलॉन्ड्री’के शरजील उस्मानीने जिहादी शाहरुखको बताया ‘हीरो’
देहलीके हिन्दू विरोधी उपद्रवके समय पुलिसपर बन्दूक ताननेवाले शाहरुख पठानको ‘न्यूजलॉन्ड्री’के शरजील उस्मानीने ‘हीरो’ बताया है । इस बातको उस्मानीने स्वयं ‘ट्विटर’पर लिखा है । उस्मानीने ‘इंडियन एक्सप्रेस’के एक समाचारको साझा करते हुए लिखा, “मुझे शाहरुख भाईपर गर्व है । वे उस समय समुदायके लिए लडे, जब हिन्दुत्व सेना हमारे समुदायको मारने और लूटनेमें सम्मिलित थी । वे हमारे ‘हीरो’ हैं !”
इसके पश्चात शरजील उस्मानीको आयशा रेन्ना नामक युवतीका समर्थन मिला । आयशा वही कट्टरपन्थी युवती है, जिसे जामिया हिंसामें ‘पोस्टर गर्ल’ बनाकर उभारा गया था और इन्होंने शरजील इमामके समर्थनमें ‘पोस्ट’ लिखा था ।
जिहादी समाजका प्रत्येक व्यक्ति,चाहे वह अशिक्षित हो या उच्च शिक्षा प्राप्त, सबकी मानसिकता एक ही है कि किस प्रकार वे भारतमें ‘गजवा हिन्द’को क्रियान्वित करें ? भारत शासनको इन जिहादियों व इनके प्रति संवेदना रखनेवालोंके लिए कठोर दण्डका प्रावधान करना ही होगा; अन्यथा ये देशको ही खानेको सज्ज हैं । (२७.०६.२०२०)
**********
केरलके गांव ‘चाइना मुक्कू’का नाम परिवर्तित करनेका किया वहां निवासियोंने विचार
केरलमें स्थित एक गांवका नाम ‘चाइना मुक्कू’ है । इस गांवका नाम परिवर्तित करनेके लिए वहांके ग्रामीणोंने निश्चय किया है । यह निश्चय चीनद्वारा २० भारतीय सैनानियोंको हुतात्मा करनेके कारण लिया गया है । १९५२ में वहां प्रधानमन्त्री नेहरूके आगमनपर ध्वजोंसे स्वागत किया गया था, तो नेहरूने उसे ‘चाइना जंक्शन’का नाम दे दिया था । गांवके पंचायत उपाध्यक्ष प्रवीण पलाविलायिलाने २३ जुलाईको बैठक करके नाम परिवर्तनके लिए प्रस्ताव रखा है, जिसमें गांवका नाम परिवर्तित करनेकी स्वीकृति मांगी है । इस पंचायत सञ्चालनके १८ सदस्योंमेंसे १२ सदस्य कांग्रेसके हैं । अध्यक्ष रजनीके अनुसार वहां इस नामसे कोई डाकघर भी नहीं है ।
देशद्रोही प्रमुखोंने न जाने कितने गांवों, नगरों और मार्गोंका नाम देशविरोधियो़के नामपर रख दिया, जिससे वहांके निवासियोंकी मानसिकतापर बुरा प्रभाव पडा । हिन्दुओ, पूर्वमें किए गए इन पापको अब मिटानेका समय है; क्योंकि यह युगपरिवर्तनका समय है; अतः एक हों व देशद्रोहियों व देशविरोधियोंके प्रतीकोंसे छुटकारा पाएं ! (२७.०६.२०२०)
**********
जम्मू कश्मीरके २०० से अधिक लुप्त युवाओंको पाकिस्तान दे रहा आतङ्की गतिविधियोंके लिए प्रशिक्षण
गुप्तसूत्रोंके अनुसार पाकिस्तान जम्मू-कश्मीरके युवाओंको फरवरी २०१९ के पुलवामा सदृश आतङ्की गतिविधि करने हेतु प्रशिक्षित कर रहा है । समाचारोंके अनुसार २०१७ में पाकिस्तान उच्चायोगने जम्मू-कश्मीरके ३९९ युवाओंको पाकिस्तानी ‘विसा’ जारी किया है, इनमेंसे २१८ के विषयमें कोई सूचना उपलब्ध नहीं है । इसी प्रकार अमेरिकी विदेश विभागकी ‘ट्रेफिकिंग इन पर्सन्स’की २०१९ के ‘ब्यौरे’में कहा गया कि १४ वर्ष तकके बालकोंका प्रयोग आतङ्की जम्मू-कश्मीरमें कर रहे हैं । कई बार १२ वर्षके बच्चोंको शस्त्र उठाने और ‘आईईडी’ पकडनेको विवश किया गया । देहलीमें पाकिस्तानके उच्चायोगमें कर्मचारियोंकी सङ्ख्या अल्प करनेके पीछे एक कारण यह भी था । अधिकारियोंद्वारा आतङ्की गतिविधियोंके लिए जम्मू-कश्मीरके युवाओंकी नियुक्ति करनेका प्रयास किया जा रहा था । गुप्तचर विभागद्वारा की गई जांचसे सङ्केत मिले कि पाकिस्तान अपने उच्चायोगका प्रयोग अपने गुप्तचर विभागका जाल फैलाने हेतु व कश्मीरके युवाओंको आतङ्की गतिविधियोंको चुनने हेतु कर रहा है ।
‘इस प्रकरणसे स्पष्ट दृष्टिगोचर होता है कि पाकिस्तान किसी भी मर्यादाको न मानकर भारतमें आतङ्की गतिविधियों हेतु कश्मीरी युवाओंका अनुचित प्रयोग कर रहा है’, यह बात हमारा शासन व शिक्षित वर्ग बताता है; परन्तु आङ्तकी हिन्दू बालकोंको लक्ष्य क्यों नहीं बनाते ? कश्मीरी पण्डितोंको क्यों नहीं प्रशिक्षित करते, जिन्हें शोषणके अतिरिक्त कुछ मिला ही नहीं ? हमारे नेतागण व शिक्षित वर्ग इसपर विचार करें और नेत्र खोलकर देखें कि आतङ्कका धर्म है और उस धर्मका छोटेसे छोटा और बडेसे बडा व्यक्ति आतङ्की ही बन रहा है ! (२७.०६.२०२०)
**********
त्यागपत्रके भयसे नेपालके प्रधानमन्त्री ओली चीनसे सांठगांठपर अपने घरमें ही घिरे
नेपालके प्रधानमन्त्री केपी ओली अपने घरमें ही घिर गए हैं । वे अपने ही दलकी बैठकमें शुक्रवारको अनुपस्थित रहे । माना जा रहा था कि दल उनसे त्यागपत्र देनेको कह सकता है ।
कुछ दिवस पूर्व ही देशको विवादित मानचित्र देकर उसमें भारतीय क्षेत्रोंको सम्मिलात करनेवाले ओलीपर चीनसे सांठगांठ करनेके आरोप हैं । इसको लेकर उनके दलके भीतर भी अत्यन्त रोष है । अनेक नेपाली क्षेत्रोंपर भी चीनके अधिकार कर लेनेके समाचार भी उजागर हुए हैं ।
ओलीके दलके सह अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमन्त्री पुष्प कमल दहलसे (प्रचंडसे) इस प्रकरणपर कहासुनी हुई । बचनेके लिए ओलीने प्रचंडको अपने आवासपर बुलाया था; परन्तु प्रचंडने अपने विचारमें परिवर्तन करनेसे मना कर दिया । प्रचंडने कहा है कि वे नेपालको पाकिस्तान नहीं बनने देंगे । उन्होंने कहा, “हमने सुना है कि सत्तामें बने रहनेके लिए पाकिस्तान, अफगानिस्तान या बांग्लादेश ‘मॉडल’पर कार्य चल रहा है; परन्तु इस प्रकारके प्रयास सफल नहीं होंगे ।
भारतकी कूटनीतिका प्रभाव अब नेपालमें दिखने लगा है । नेपालकी जनता तो आरम्भसे ही प्रधानमन्त्री ओलीका विरोध कर रही थी; परन्तु अब दलके भीतर ही उनका प्रखर विरोध हो रहा है । भारत शासन अपनी कूटनीतिमें किसी भी प्रकारकी ढील न दे और शीघ्रातिशीघ्र ओलीकी विदाई हो, ऐसे प्रयास करते रहे, जिससे हमारा सहृदय मित्र नेपाल हमारा ही बना रहे ।
**********
भारतीय सैनिकने किया चीनी ‘ऐप्स’के बहिष्कार करनेका निवेदन
समूचे भारतमें चीनके विरुद्ध रोष चरम सीमापर है । सीमापर २० भारतीय सैनिकोंके हुतात्मा होनेके पश्चात अनेक भारतीयोंने चीनके बने उत्पादोंका बहिष्कार करना आरम्भ कर दिया है । अनेक चलचित्र कलाकार भी लोगोंको इस आन्दोलनमें सहयोग करने हेतु प्रेरित कर रहे हैं । वहीं एक भारतीय सैनिकने देशवासियोंसे समस्त चीनी ‘ऐप्स’को पूर्णतः त्याग करने हेतु निवेदन किया है । अपना एक ‘वीडियो’ साझा करते हुए सैनिक कह रहा है कि वह भारत-चीन सीमापर जा रहा है, जहांपर उचित मार्ग भी नहीं है; पहाडोंके मध्य होकर जाना पडता है । आप सभी सुरक्षित रहें, इस हेतु हम वहां देशसेवा कर रहे हैं; अतः आपसे अनुरोध है कि आप हमारा समर्थन करें और चीनके ‘ऐप्स’का बहिष्कार करें, हमें प्रसन्नता होगी ।
देशप्रेमियो, यह कोई बडी मांग नहीं है, जिसे हम पूर्ण न कर सकें ! देशप्रेमी, जो घरोंपर हैं, वे सीमापर तो जा नहीं सकते हैं; परन्तु चीनी उत्पादोंका बहिष्कारकर उनकी रीढकी अस्थि (हड्डी) अवश्य तोड सकते हैं । अब समय आ चुका है कि विश्वमें अपने उत्पादकोंके कारण अपनी अर्थव्यवस्थाको श्रेष्ठ बनाने वाले चीनको उत्तर दिया जाए । यही कालकी मांग व आपकी वास्तविक राष्ट्र आराधना होगी । (२७.९६.२०)
Leave a Reply