उत्तिष्ठ कौन्तेय
अलीगढमें ‘बसपा’ नेता मोहम्मद जाहिदने अपने पुत्रके ‘निकाह’में फुहड नृत्य आयोजितकर तोडे, ‘सोशल डिस्टेंसिंग’के नियम
उत्तर प्रदेशके अलीगढमें बसपा नेता मोहम्मद जाहिदके पुत्रके ‘निकाह’में मंगलवार, २६ मईको ‘सोशल डिस्टेंसिग’ और गृहबन्दीका उल्लंघन किया गया ! ‘निकाह’में बार बालाओंका फुहड नृत्य हुआ ! प्रसारित हुए दृश्यपटमें (वीडियोमें) देखा जा सकता है कि कार्यक्रममें सैकडोंकी संख्यामें लोग एकत्र हुए ! लोग ‘बार’ बालाओंपर धन भी लुटा रहे हैं । सूचनाके अनुसार घटना ‘सासनी गेट’के सराय सुल्तानी ‘मोहल्ले’की है, जहां अधिक ‘कोरोना’ सङ्क्रमितोंके मिलनेके कारण १००% ‘लॉकडाउन’ है । इसके पश्चात भी बसपा नेताने यह कार्यक्रम आयोजित किया । इस कार्यक्रममें किसीने मुखावरण (मास्क) भी नहीं पहना था ।
जिहादी नेता ही नियम पालन नहीं कर रहे हैं तो जिहादियोंसे क्या आशा करें ? गत दिवसोंमें भी अलीगढमें ऐसा ही एक प्रकरण उजागर हुआ था, मुख्यमन्त्री योगीजी विधि व्यवस्थाको भङ्ग करनेवाले ऐसे जिहादियोंको दण्डित करें, तभी ये जिहादी सुधरेंगे ।
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हरदोईमें हिन्दू परिवारपर जिहादियोंने किया आक्रमण
उत्तर प्रदेशके बहराइच थाना दरगाह शरीफके ग्राम बारागुन्नूमें जिहादियोंने मुर्गी ‘फार्म’का पानी अन्य पक्षके खेतसे निकलनेको लेकर मारपीट की, जिसमे शरीफ अहमदने एक हिन्दू परिवारपर आक्रमण किया ! शरीफ अहमद अपने मुर्गी ‘फार्म’का पानी हिन्दू परिवार सिपाही लालके खेतसे निकालना चाह रहा था, मना करनेपर उसने अपने मित्रों सहित हिन्दू परिवारपर आक्रमणकर उन्हें चोटिलकर दिया । पुलिस बलने उचित समयपर त्वरित कार्यवाही की और दलित परिवारकी अधिक हानि होनेसे बचाया । इसमें बहराइच पुलिसके दो पुलिसकर्मियों सहित ६ लोग चोटिल हुए हैं ।
जिहादी अब छद्म भाईचारेको पीछे छोडकर खेतसे पानी न लेनेपर भी समूचे परिवारपर आक्रमण करने लगे हैं तो हिन्दुओ, आप कबतक नेत्र मूंदकर इस कथित धर्मनिरपेक्षता और ‘भाईचारे’को लेकर बैठेंगे ? हम हिंसाका समर्थन नहीं करते हैं; परन्तु अब तो सभी हिन्दू कमसे कम एकजुट हों और ऐसे लोगोंका मुखर होकर विरोध करें ! (२९.०५.२०)
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स्विट्जरलैण्डके विद्यालयमें भारतीय मूलकी छात्राके साथ हिन्दू होनेके कारण हुआ भेदभाव
स्विट्जरलैण्डमें विश्वके सबसे महंगे विद्यिलयोंमेंसे एक, ‘ली रोजी’में भारतीय मूलके अभिभावकोंद्वारा जातिगत भेदभाव और ‘हिन्दूफोबिया’का प्रकरण प्रविष्ट किया गया है । पीडितके माता-पिताने बताया कि उनकी पुत्रीको विद्यालयमें अपनी भारतीय संस्कृति और हिन्दू होनेके कारण लक्ष्य बनाया जा रहा है, जिस कारण वह मानसिक तनावमें है । इसपर भारतीय मूलके उद्योगपति राधिका ओसवाल और पंकज ओसवालने बताया कि विद्यालयने उनकी पुत्रीके साथ भेदभावकर उसके मानसिक उत्पीडनमें सम्मिलित आरोपियोंको बचानेका कार्य भी किया है । छात्राके अभिभावकोंने बताया कि उनकी चिन्ताओंको दूर करना तो दूर, ली रोजी और उसके कर्मचारी मुख्य रूपसे उनकी पुत्रीके चरित्र मूल्याङ्कनमें व्यस्त रहे ! उसके ‘ग्रेड’को न्यून कर दिया गया, वह अपनी कक्षामें उत्तम ‘ग्रेड’ प्राप्त करनेवाली छात्राओंमेंसे एक थी । यहांतक कि अगले वर्षमें उसके पुनः नामाङ्कनको निरस्तकर दिया और उसे अत्यधिक मानसिक यातना देते हुए उसे मौन करानेका प्रयास किया ।
इसीसे ज्ञात होता है कि अपनेको विकसित कहनेवाले ये विद्यालय मानसिक रूपसे कितने पिछडे हुए हैं और हिन्दू हैं कि आज भी अन्धी दौडमें ऐसे विद्यालयोंके पीछे दौड रहे हैं । विदेशमें उपस्थित सभी हिन्दू ‘रोज-ली’ विद्यालयके इस भद्दे कृत्यको लेकर ‘ज्यूरी’के समक्ष मुखर होकर इसका विरोध करें और विद्यालयको दण्डित करवाएं ! (२९.०५.२०२०)
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‘कोरोना’से सङ्क्रमित इब्राहिम चलाता रहा चिकित्सालय, जांच नहीं करानेपर बनाया गया बन्दी
राजस्थानके झालावामें एक मुसलमान चिकित्सक इब्राहिमको बन्दी बनाया गया है । झालरापाटनमें इब्राहिम अपना व्यक्तिगत चिकित्सालय चला रहा था । इब्राहिमको ‘कोरोना’ सङ्क्रमित पाया गया । सङ्क्रमित होते हुए भी वह गत कुछ दिवसोंसे लोगोंकी चिकित्सा करता रहा ! इतना ही नहीं, वह स्वयं सङ्क्रमित होनेपर भी ‘कोरोना’ माहमारीकी जांच कराने हेतु सिद्ध नहीं हो रहा था । आग्रह करनेपर भी जब वह जांच करानेसे मना करता रहा, तो पुलिसको अन्ततः उसे जांचके लिए बन्दी बनानेके लिए विवश होना पडा । उसपर गृहबन्दीका उल्लंघन करनेके साथ-साथ रोगियों तथा अन्य लोगोंमें सङ्क्रमण फैलानेके आरोपका प्रकरण प्रविष्ट किया गया है ।
इसका अर्थ है कि चिकित्सक कोई धर्मान्ध हो तो हिन्दुओंने अब उसके पास कदापि नहीं जाना चाहिए; क्योंकि जिहादी चिकित्सिक भगवान नहीं, वरन इस्लामसे प्रेरित हिन्दूद्रोही ही है ! (२९.०५.२०२०)
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‘एनडीटीवी’ने ’पुलवामामें ४० किलो विस्फोटक लानेवाले आतङ्कीको बोला ‘ड्राइवर’
आतङ्कियोंके लिए ‘इंडियन इंजीनियर’, ‘टीचर’ जैसे शब्दोंका प्रयोग करनेवाली प्रसार वाहिनी ‘एनडीटीवी’ने इस बार उस आतङ्कीके लिए ‘ड्राइवर’ शब्दका प्रयोग किया है, जो लगभग ४० किलो विस्फोटक लदे चारपहिया वाहनके साथ पुलवामामें आक्रमणकी ‘तैयारी’में था । उल्लेखनीय है कि पुलवामामें विस्फोटकसे लदे वाहनके विषयमें समय रहते सूचना मिलनेसे बडी घटना होनेसे टल गई । प्राप्त सूचनाके अनुसार जब वाहन पुलवामा पहुंचा तो पुलिस व सुरक्षाबलों साथ मुठभेडके पश्चात आतङ्कवादी वाहन छोडकर भाग गया । इसी समाचारको ‘एनडीटीवी’पर बताते समय आतङ्कवादीके लिए ‘ड्राइवर’ शब्दका प्रयोग किया गया । ऐसा माना जा रहा है कि उस आतङ्कीका सम्बन्ध न केवल ‘हिजबुल मुजाहिद्दीन’से हैं, वरन वह ‘जैश’के सम्पर्कमें भी था । ‘जैश’ने गत वर्ष पुलवामामें सुरक्षा बलोंपर बडा आक्रमण किया था । ध्यान देने योग्य है कि गत वर्ष पुलवामामें आतङ्की आक्रमणके पश्चात ‘एनडीटीवी’की ‘डिप्टी एडिटर’ निधि सेठीने आतङ्कियोंका महिमामण्डन किया था । निधिने पुलवामामें सैनिकोंके वीरगति प्राप्त होनेके पश्चात ‘हाउज द जोश’के स्थानपर ‘हाउज द जैश’ लिखकर टिप्पणी की थी, तत्पश्चात ‘एनडीटीवी’को उन्हें निलम्बित करना पडा था । वहीं, ‘एनडीटीवी’की बरखा दत्त भी बुरहान वानीके लिए ‘स्कूल हेडमास्टर’ जैसे शब्दोंका प्रयोगकर चुकी हैं ।
‘एनडीटीवी’का यह कार्य देशद्रोह है । ऐसी प्रसार वाहिनियोंको शासनको त्वरित प्रतिबन्धित करना चाहिए; परन्तु दुःखद है और सन्देहास्पद भी कि ऐसी प्रसार वाहिनीयोंपर प्रतिबन्ध नहीं लगाया जा सका है !
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महाराष्ट्रके पालघरमें पुनः साधुओंपर आक्रमण
महाराष्ट्रके पालघरमें पुनः साधुओंपर आक्रमणकी एक घटना घटित हुई है ! मुम्बई – अहमदाबाद राजमार्गके किनारे स्थित भालीगांवकी यह घटना है । यहां तीन चोरोंद्वारा दो साधुओंके निवासमें प्रवेशकर उनसे चोरी और मारपीट की गई है । ये तीनों आरोपी इसलिए क्रोधित थे; क्योंकि इन साधुओंने उन्हें शिवमन्दिरके निकट आमके वृक्षपर पत्थर मारनेके कारण डांटा था, इसीलिए क्रोधित होकर इन्होंने साधुओंपर आक्रमणकर उन्हें चोटिलकर दिया तथा उनकी सामग्रीको लूट लिया । उल्लेखनीय है कि गत दिवसोंमें महाराष्ट्रके पालघरमें ही दो साधुओंकी निर्मम हत्या की गई थी ।
देशके विभिन्न भागोंमें साधुओंपर बढते आक्रमण, विशेषतः शिवाजी महाराजके राज्यमें ऐसा होना, चिन्ताका विषय है । अब हिन्दुओंने इन प्रकरणको गम्भीरतासे लेना चाहिए और शासनपर साधु-सन्तोंकी रक्षा हेतु बल देना चाहिए ।
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‘सीएए’ विरोधी हिंसामें सम्मिलित ‘एएमयू’का फरहान जुबैरी बनाया गया बन्दी
‘अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालय’के छात्र और पूर्व ‘कैबिनेट’ सदस्य फरहान जुबैरीको पुलिसने बन्दी बनाया है । वह नागरिकता संशोधन विधानके नामपर हुए उपद्रवमें सम्मिलित था । उसपर कुल ११ अभियोग प्रविष्ट हैं । ‘एसपी’के वाहनपर पथराव, पुलिसपर आक्रमण सहित सात अभियोगमें वह वाञ्छित चल रहा था । ‘अमर उजाला’के समाचारके अनुसार जुबैरीको अलीगढ पुलिसने गुरुवारको कठपुलाके निकट बन्दी बनाया था । वह ‘एएमयू’के ही मित्र छात्रके साथ वाहनमें नगरसे बाहर जा रहा था । दोनोंको बन्दी बनाकर पूछताछ की गई । इसके पश्चात जुबैरीके साथीको पुलिसने छोड दिया ।
यदि हमारा विधान इतनी शीघ्र कार्यवाही करे कि ऐसे जिहादियोंको त्वरित बन्दी बनाकर कठोर दण्ड दे तो ये ऐसा दुस्साहस पुनः नहीं करेंगे; परन्तु विडम्बना है कि ११-११ अभियोग लिए एक जिहादी छात्र बनकर शासन सहायता प्रात विश्वविद्यालयमें पढ रहा है या यूं कहा जाए कि प्रशिक्षित आतङ्की बन रहा है । शासन व हिन्दू अब भी सचेत हो जाएं तो यह देश बच पाएगा !
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‘इस्कॉन’के भक्तोंपर अभद्र टिप्पणी करनेके सन्दर्भमें कथित हास्यकार सुरलीन कौर व शेमारूके विरुद्ध परिवाद प्रविष्ट
‘इस्कॉन’ने अभिनेत्री और ‘स्टैंड-अप कॉमेडियन’ सुरलीन कौर और मनोरञ्जन संस्थान ‘शेमारू’के विरुद्ध सङ्गठन और हिन्दुओंके अपमान करनेका परिवाद (शिकायत) प्रविष्ट कराया है ।
परिवादमें बताया गया है कि ‘शेमारू’ने सामाजिक जालस्थलके विभिन्न माध्यमोंपर हास्य कलाकार सुरलीन कौरका एक ‘वीडियो’ साझा किया, जिसमें सुरलीन कौर ‘इस्कॉन’ संस्था व हिन्दुओंपर आपत्तिजनक व अभद्र टिप्पणी करती दिखाई दीं । ‘वीडियो’ कुछ समय पूर्वका है; किन्तु यह अब प्रसारित किया गया, जिस कारण यह हिन्दुओंके समक्ष आया; परन्तु विवाद उत्पन्न होता देख इसे त्वरित हटाया गया ।
सुरलीन कौरने इस ‘वीडियो’में कहा है कि प्राचीन हिन्दू सन्तोंने अपने गुप्त कृत्योंको छुपानेके लिए संस्कृतके अपने छोटेसे ज्ञानका उपयोग किया । कामसूत्रका उदाहरण देते हुए उसने कहा कि ऋषियोंने कामुक ग्रन्थोंको लिखनेके लिए संस्कृत भाषाका उपयोग किया ! साथ ही कौरने खजुराहोकी मूर्तियोंका उपहास करते हुए कहा कि हिन्दुओंको अश्लीलता (पोर्न) रुचिकर (पसंद) है । ‘इस्कॉन’ संस्थाके उपाध्यक्ष व प्रवक्ता राधारमण दासने मुम्बई पुलिसको पत्र लिखकर परिवाद (शिकायत) प्रविष्ट किया; इसमें उन्होंने स्पष्ट लिखा है कि सनातन धर्म और ऋषि-मुनियोंके प्रति असभ्य भाषाका प्रयोग षड्यन्त्रके अन्तर्गत किया जा रहा है, जिसका मुख्य प्रयोजन विदेशी शक्तियोंद्वारा हिन्दू युवाओंको पथभ्रष्टकर उनका चरित्र हनन करना है ।
सभी हिन्दू ऐसे नटों व ऐसे हिन्दूद्रोही संस्थानोंका वैध मार्गसे विरोधकर इन्हें प्रतिबन्धित करवाएं; क्योंकि ये मैकॉले शिक्षित युवाओंको भ्रमितकर धर्मसे च्युत कर रहे हैं ! यदि अब भी नहीं जागे तो हिन्दूद्रोही पुनः सिर उठाएंगे और धर्मकी विडम्बना करेंगे !
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