उत्तिष्ठ कौन्तेय


१. देशभरमें कोरोना विषाणुको फैलनेसे रोकने हेतु जहां  ‘लॉकडाउन’ लगा है और लोगोंको अपने-अपने घरोंमें ही रहने विनती की जा रही है, वहीं देशके भिन्न भिन्न भागोंसे विदेशी मौलवियोंके पकडे जानेका क्रम जारी है । अभीतक मेरठ, रांची और पटनासे ही विदेशी मौलवी पकडे गए थे; परन्तु अब देहलीमें निजामुद्दीनके पासकी मस्जिदसे छिपे हुए ५० से ७० कोरोना सन्दिग्ध रोगियोंको पकडा गया, जो दुबईकी यात्रा करके आए थे । उल्लेखनीय है कि इससे पहले मेरठमें ‘एलआईयू’की जांचके पश्चात जनपदकी दो मस्जिदों, मवाना और सरधनामें १९ विदेशी मौलवियोंको, जो इंडोनेशिया, केन्या, सूडान और जिबूती सहित अन्य देशोंसे हैं, बन्दी बनाए गए है । इसी प्रकार रांचीकी भी एक मस्जिदसे १९ विदेशी मौलवियोंको बन्दी बनाया गया था, आश्चर्यकी बात यह है कि ये सभी ‘लॉकडाउन’के मध्य मस्जिदमें ही रह रहे थे और इन्हें शरण देनेवालोंने भी पुलिसको जानकारी देना उचित नहीं समझा और सभी अपने-आपको धर्म प्रचारक बता रहे थे ।
      धर्मनिरपेक्षताका राग अलापनेवाले देख लें कि आज ये मस्जिद, मौलवी और यह इस्लाम भारतके लिए कितना बडा संकट बनकर सामने आ रहे हैं ! ‘लॉकडाउन’के कारण पकडे जा रहे ये विदेशी जिहादी, यदि न पकडे जाएं तो विचार करें कि कितना बडा षड्यन्त्र कर रहे होंगें अथवा इनके कारण कितने लोग मारे जाएंगें ! अब भी समय है कि शासन और हिन्दू जागें !
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२. चीनके अनुसार करोनासे अब तक चीनमें करोना विषाणुसे केवल ३३०० की मृत्यु हुई है; किन्तु वुहानके नागरिकोंका कहना है कि केवल वुहानमें ४२००० लोगोंकी मृत्यु हुई है ! ‘डेली मेल’के अनुसार हुबेई प्रोविंसके अधिकारियोंके ब्यौरेके अनुसार अब तक २८००० लोगोंके शवदाह किए गए हैं ।
       इन विवरणोंसे स्पष्ट होता है कि चीनके अपने कुकर्मोंका परिणाम ही उसके सामने आया है और भारत सहित अन्य देश चीनसे जुडे होनेके कारण, ऐसा फल भोग रहे हैं; अतः भारत शासन, ऐसे देश अपने व्यापारिक सम्बन्ध समाप्त करें कि कहीं आगे देशको किसी और बहानेसे चीनके माध्यमसे और हानि न हो ।
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३. पाकिस्तानके सिन्ध शासनद्वारा ‘लॉकडाउन’के समय दिहाडी श्रमिकोंको राशन दिए जानेके आदेशकी अवहेलना करते हुए प्रशासनने हिन्दुओंको राशन देनेसे मना कर दिया और कहा गया कि यह केवल मुसलमानोंके लिए है !
      भारतमें अल्पसंख्यकोंके साथ यदि ऐसा होता तो मानवाधिकार व संयुक्त राष्ट्र अपने भांति-भांतिके आदेश जारी करते; किन्तु अब बात हिन्दुओंकी है; इसलिए ये सभी मौन हैं ! इसीसे इनकी हिन्दूद्रोहिता ज्ञात होती है !
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४. अफगानिस्तानके काबुल गुरुद्वारेमें सिखोंकी नृशंस हत्याको देखते हुए पंजाब प्रदेशके कांग्रेस मुख्यमन्त्री अमरिंदर सिंहने मोदी शासनसे अति शीघ्र वहांके असहाय सिखोंको भारत लानेकी प्रार्थनाकी है । इसमें यह विचार योग्य है कि मुख्यमन्त्री स्वयं नागरिकता संशोधन विधेयकके विरोधी हैं व पंजाब विधानसभामें इसके विरुद्ध विधेयक भी पारित करा चुके हैं !
       अमरिन्दर सिंह यहां भी वोटबैंक बटोरनेसे पीछे नहीं हटे; अन्यथा नागरिक संशोधन विधेयकके अन्तर्गत नागरिकता प्राप्त करनेवालोंमें सिख नहीं थे क्या ? तो अब इन्हें सिखोंका स्मरण क्यों हो रहा है ? यह नेताओंकी अवसरवादिताको दिखाता है !
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५. सेवा निवृत्त एक वैज्ञानिक राम श्रीवास्तवके कथनानुसार ‘कोरोना’का रोग मात्र प्रयोगशालामें ही बनाया गया एक कृत्रिम विषाणु है; क्योंकि इसकी बनावट प्राकृतिक संरचनासे पूर्णतया भिन्न  है। श्रीवास्तवका मानना है कि इसकी श्रृंखलाका क्रम दूसरे विषाणुओंकी भांति एकदम परिवर्तित नहीं हो रहा, जिसकी जानकारी उन्होंने विदेशी चिकित्सा संस्थानोंके शोध पत्रपर भारी शोध करनेके उपरान्त एकत्रित की है । उनका कहना है कि इससे रोगीकी आंखोंका रंग गुलाबी हो जाता है, साथ ही सूंघनेकी क्षमता और कुछ खानेका स्वाद भी ज्ञात नहीं होता । ऐसा विषाणु गलेकी ग्रन्थियोंको नष्ट करने लगता है, जिससे श्वास लेना भी दूभर हो जाता है । नेत्रोंपर कृत्रिम ‘लेंस’ लगाने वालोंके लिए अत्यन्त कष्ट दायक है । वैज्ञानिक रामके अनुसार विदेशी चिकित्सा पद्धतियोंसे आत्म निर्भर होकर योगके मार्गका अनुसरण करते हुए, घरपर रहकर भी बचाव हो सकता है । विदेशी लूटमारसे बचते हुए आयुर्वेदिक उपचार पद्धतिके माध्यमसे और योग अपनाकर आत्मनिर्भर होना एक अच्छा पर्याय है । साथ ही अजवाइनको पानीमें उबालकर मात्र घूंट-घूंट पीते रहनेसे विषाणु गलेमें नहीं चिपक पाता ।
     इस प्रकरणमें चीनपर भिन्न प्रकारके आरोप लग रहे हैं, ऐसेमें हमें आरोपोंकी सत्यता जांचनेके स्थानपर ऐसे आसुरी देशोंसे प्रत्येक प्रकारकी दूरी बनानी चाहिए, यही भारतके भविष्यके लिए उत्तम होगा !


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