भारतकी शतरंज खिलाडी सौम्या स्वामीनाथनने ‘हिजाब’के कारण ईरानकी खेल प्रतियोगितामें नहीं जानेका लिया निर्णय !
भारतकी शतरंज खिलाडी सौम्या स्वामीनाथनने अनिवार्य रूपसे ‘हिजाब’के कारण जो एक प्रकारका वस्त्र होता है, जिससे अरब देशकी मुसलमानी स्त्री सिरको ढकती हैं, ईरान जाकर शतरंज (चेस) स्पर्धामें (चैम्पियनशिपमें) भाग लेनेसे अस्वीकार कर दिया है । सौम्याके इस निर्णयकी सामाजिक प्रसार माध्यम (सोशल मीडियापर) अत्यधिक प्रशंसा हो रही है । सौम्याने इस नियमको उनके निजी अधिकारोंका उल्लंघन बताया और इसमें भाग लेनेसे मना कर दिया । सौम्याने इसके विरोधमें एक ‘फेसबुक’पर एक लेख भी लिखा है ।
इस प्रकरणमें सौम्याने कहा कि विदेशमें भारतका प्रतिनिधित्व करना बहुत ही गौरवकी बात है; किन्तु मुझे दुःख है कि मैं ईरान नहीं जा रही हूं; क्योंकि कुछ तथ्योंके साथ सन्धि (समझौता) नहीं की जा सकती । एक खिलाडी खेलको अपने जीवनमें सबसे पहले रखता है और इसके लिए कई प्रकारके ‘समझौते’ करता है; किन्तु कुछ बातें ऐसी होती हैं जिनके साथ ‘समझौता’ नहीं किया जा सकता । ईरानमें होनेवाली इस खेल प्रतियोगितामें महिलाओंसे सिरपर हिजाब पहननेके लिए कहा जा रहा है । मैं नहीं चाहती कि कोई हमें ‘स्कार्फ’ या ‘बुर्का’ पहननेके लिए बाध्य करे !
सौम्याके इस निर्णयका हम अनुमोदन करते हैं, ऐसे खिलाडी जो अपने धर्मपालनके साथ ‘समझौता’ नहीं करते, वे ही अन्य हिन्दू खिलाडियोंके आदर्श होने चाहिए ! साथ ही जो पन्थ दूसरे धर्मके लोगोंको अपने धर्मके नियमोंका पालन करनेके लिए बाध्य करते हैं, उनकी इस कट्टरताका सभीने विरोध करना ही चाहिए !
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