वैदिक उपासना पीठ कोई सम्प्रदाय नहीं ! 


‘श्रीगुरु देव दत्त’का जप करने हेतु हमारी संस्था कहती है; इसलिए अनेक दत्त भक्तोंको लगता है कि हम दत्त सम्प्रदायसे हैं; किन्तु ऐसा है नहीं । हम विशुद्ध वैदिक सनातन धर्मका प्रसार करते हैं, जो हमने अपने श्रीगुरुसे सीखा है । कालानुसार हम शिवकी साधना कर रहे हैं एवं २०२३ से इस देवोपासनामें पुनः परिवर्तन होगा !

  पिछले दस शतकोंसे पुरुषोंने योग्य प्रकारसे धर्माचरण एवं विशेष रूपसे शास्त्रोक्त पद्धतिसे पितरों हेतु बताए गए पञ्च महायज्ञ अन्तर्गत पितृयज्ञ नहीं किया; इसलिए आज हम अतृप्त पितरोंके सद्गति हेतु एवं पितृदोषसे निर्मित कष्टके निवारणार्थ नित्य श्राद्ध इत्यादिके साथ ‘श्रीगुरु देव दत्त’का जप हमारे श्रीगुरुके निर्देशानुसार सभीको करने हेतु कहते हैं । यह पितृदोष निवारण हेतु कर्मकाण्ड अन्तर्गत किए जानेवाले सर्व पितृकर्मके साथ उपासनाकाण्ड अन्तर्गत एक सरल उपाय  मात्र है !

हिन्दू राष्ट्र आनेके पश्चात जब पुरुष-वर्ग कर्मकाण्ड अन्तर्गत सर्व पितृकर्म निष्ठा एवं शास्त्रोक्त विधिसे करने लगेंगे तो हो सकता है, इस जपको सभीको करनेकी आवश्यकता नहीं होगी ! किन्तु कलियुगमें इसप्रकारकी धर्मभ्रष्टताके चरण अगले ४,२८,००० वर्षोंके कालमें आते रहेंगे ! इसलिए हमारे श्रीगुरु जैसे द्रष्टा सन्त कलियुगके अन्तिम चरणतकके लिए उपयोगी साधना बता रहे हैं !

   जप करना उपासना काण्ड अन्तर्गत आता है; अतः जो कर्मकाण्डसे प्राप्त होता है और वह यदि किसी कारणवश करना सम्भव न हो तो उसका तात्कालिक पर्याय हमारा धर्म सदैव प्रतिपादित करता रहा है ! कालानुसार १०० % लोगोंको पितृदोषके कारण कष्ट हैं ; अतः कष्टकी तीव्रता अनुसार दोसे छ: घण्टे यह जप (श्री गुरुदेव दत्त) करना प्रत्येकके लिए अति आवश्यक है !



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