घरके वास्तुको कैसे बनाएं आश्रम समान चैतन्यमय एवं उससे होनेवाले लाभ (भाग – ३)


घरकी वास्तुको स्वच्छ रखते समय निम्नलिखित तथ्योंका ध्यान रखें –
१. घरमें नियमित रंगाई-पुताई करवाएं । आदर्श स्थितिके अनुसार प्रत्येक वर्ष दीपावलीके समय रंगाई-पुताई अवश्य करवानी चाहिए; किन्तु आजकल ऐसे कृत्रिम रंग (केमिकल पेंट्स) आ चुके हैं कि पांच-सात वर्षोंतक पुताई प्रति वर्ष करवानेकी आवश्यकता नहीं पडती है । ऐसी स्थितिमें ‘कमसे कम’ दीपावलीके समय विस्तृत एवं अच्छेसे प्रत्येक कक्षकी स्वच्छता करें तथा अनावश्यक वस्तुओंको घरसे हटाए एवं शेष सभी वस्तुओंको झाड-पोछकर एवं व्यवस्थित कर स्वच्छ रखें । अनेक बार लोग बाहर-बाहरकी स्वच्छता कर देते हैं एवं भीतर वैसे ही अव्यवस्थित रहने देते हैं जो अनुचित है ।
२. अपनी कपाटिकाओंके (अलमारियोंके) भीतर सब कुछ स्वच्छ कर एवं व्यवस्थित रखें । स्वेदयुक्त (पसीनेवाले) वस्त्र कपाटिकामें न रखें, बासी स्वेदयुक्त वस्त्रके दुर्गन्धसे अनिष्ट शक्तियां (पिशाच आदि) सहज ही आकर्षित होती हैं; अतः वैसे वस्त्रोंसे कपाटिका अशुद्ध हो जाती हैं, साथ अस्वच्छ वस्त्र भी कपाटिकामें न रखें ।



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