वैदिक उपासना पीठका वानप्रस्थ प्रकल्पकी विशेषताएं (भाग-४)


    वर्तमान कालमें अनेक लोग धन अधिक अर्जित करनेके उद्देश्यसे अपनी उपजीविकाका चुनाव करते हैं । ऐसा हो सकता है कि वे कभी-कभी अपने माता-पिताके दबावमें आकर अपने मनके विरुद्ध उपजीविकाका चुनाव करने हेतु बाध्य होते हैं । ऐसेमें उनके मनमें जो उन्हें करना होता है, जिसकी उन्हें इच्छा होती है, वह करना रह जाता है तो वानप्रस्थ प्रकल्पमें हमने यह निश्चित किया है कि वानप्रस्थी अपनी ऐसी इच्छाओंको पूरी कर सकें जैसे कोई संगीत सीखना चाहता हो तो वह संगीत सीख सकता है; क्योंकि भविष्यमें हमारा एक विश्वविद्यालय होगा जिसमें संगीतका भी विभाग होगा तो वे चाहे तो उसमें विधिवत भी सीख सकते हैं या वानप्रस्थियोंके लिए संगीतके शिक्षक रखनेका भी हमारा प्रबन्ध होगा तो वे वहां भी सीख सकते हैं । इसी प्रकार विश्वविद्यालयमें ७२ विद्याएं एवं ६४ कलाएं सिखाई जाएंगी तो इसमेंसे जिसमें भी इच्छुक हों, वे सीख सकते हैं । और जो वानप्रस्थी ऐसी विद्याओं एवं कलाओंमें प्रवीण होंगे वे इसे सिखा भी सकते हैं ! अर्थात वानप्रस्थ प्रकल्प सीखने और सिखानेका एक संगम स्थल होगा । इसकी विशेष बात यह होगी कि यह सब सन्तोंके मार्गदर्शनमें होगा; इसलिए वे प्रत्येक विधाका सूक्ष्म पक्ष सीख पाएंगे एवं उसके माध्यमसे आध्यात्मिक प्रगति कैसे करें ? यह भी उन्हें सिखाया जाएगा । अर्थात जीवनके उत्तरार्धको भी हम दिशा देकर अपना मनुष्य जीवन सार्थक कर सकते हैं ।
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