विश्व हिन्दू परिषदने की हिन्दू मन्दिरोंको शासकीय नियन्त्रणसे मुक्त करनेकी मांग
१९ जुलाई, २०२१
विश्व हिन्दू परिषदने (विहिपने) कहा है कि ईसाई मिशनरियों और आलिम, इमाम, मौलवियोंद्वारा किए जा रहे अवैध धर्मान्तरणके अभिशापसे देशको मुक्ति दिलानेके लिए कठोर केन्द्रीय विधेयककी आवश्यकता है । साथ ही, विहिपने भारतके मन्दिरों और हिन्दू संस्थाओंको भी शासकीय नियन्त्रणसे मुक्त करनेकी मांग की है । ‘विहिप’का कहना है कि भारतके मन्दिर हिन्दुओंके सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक शक्तिके केन्द्र हैं । इन केन्द्रोंसे विभिन्न प्रकारकी सामाजिक गतिविधियां चलाई जाती हैं, जो आगे बढनेमें समाजकी सहायता करती है । ‘विहिप’का कहना है कि इस समय देश के ११ राज्योंमें अवैध धर्मान्तरणके विरुद्ध विधेयक हैं; परन्तु हिन्दू मन्दिरोंको लेकर ‘विहिप’का कहना है कि समृद्ध हिन्दू मन्दिरोंको शासन अधिग्रहित कर लेता है और उसके पैसेको मनमाने ढंगसे व्यय करता है और उस धन-सम्पदाको ‘गैर’-हिन्दुओंके कार्योंमें लगाया जाता है, जबकि इसका प्रयोग हिन्दुओंके हित और भलाईके कार्योंमें होना चाहिए ।
संसदमें अध्यादेशोंको पारित करवानेके लिए एक निश्चित सङ्ख्या सांसदोंकी होनी चाहिए, हिन्दुओंके पूर्णरूपेण समर्थनसे आज भाजपा केन्द्रमें शासन कर रही है और ‘विहिप’का केन्द्र शासनसे केवल मात्र औपचारिकताकर इस ज्वलन्त समस्याका निदान करनेका ढोंग करना बताता है कि या तो चुनाव निकट हैं अथवा ध्रुवीकरणका प्रयास हो रहा है । यह मांग तो ‘विहिप’को मुखर ढंगसे प्रथम दिवससे ही करनी चाहिए थी; परन्तु दुःखद है कि कुछ हिन्दुत्वनिष्ठ संस्थाएं भी अवसर अनुरूप कार्य करने लगी हैं । तथापि यह मांग धर्मके हितमें है; अतः सभी हिन्दू भाजपासे मन्दिरोंको मुक्त करनेकी मांग करें । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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