विद्यार्थियोंको क्यों सिखाई जाए स्वभावदोष निर्मूलन प्रक्रिया ? (भाग – १)


बाल्यकालसे दोषोंका निर्मूलन नहीं सिखानेके कारण ही आजका युवा वर्ग दिशाहीन है ।
युवाओंमें अपराधमें प्रवृत्त होनेका मुख्य कारण होते हैं उनके भिन्न स्वभावदोष : एक सर्वेक्षण अनुसार देशमें होनेवाले ७० प्रतिशत अपराधोंमें युवाओंकी संलिप्तता रहती है । बाल्यकालसे ही विद्यार्थियोंको उनके दोषोंके प्रति सतर्क रहना, अपनी चूकोंको स्वीकार करना, अपनी तमोगुणी वृत्तिको नियन्त्रित करना, यह सब सिखाया नहीं जाता, इसके विपरीत उसे भोगकी ओर प्रवृत्त किया जाता है, ऐसेमें युवा वर्गका दिशाहीन होकर अपराधकी ओर मार्गक्रमण करना स्वाभाविक है । इसीलिए बाल्यकालसे ही दोष निर्मूलनकी प्रक्रियाको पाठ्यक्रममें अन्तर्भूत करना अति आवश्यक है एवं हिन्दू राष्ट्रमें यह सम्पूर्ण विद्यालयीन शिक्षाका एक महत्त्वपूर्ण भाग रहेगा । (क्रमश:)



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