राष्ट्रके धनकी लूट, विजय माल्या और नीरव मोदी ही नहीं, ३६ कारोबारी देशसे भागे !!


अप्रैल १५, २०१९

 

‘अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलीकॉप्टर’ प्रकरणमें बन्दी बनाए गए कथित रक्षा मध्यस्थ (एजेंट) सुशेन मोहन गुप्तद्वारा प्रविष्ट प्रतिभूति (जमानत) याचिकाका विरोध करते हुए प्रवर्तन निदेशालयने सोमवार, १५ अप्रैलको कहा कि उसके भी उन ३६ व्यापारियोंकी भांति देशसे भागनेकी सम्भावना है, जिनके विरुद्घ आपराधिक प्रकरण प्रविष्ट हैं ।

‘ईडी’ने विशेष न्यायाधीश अरविंद कुमारको बताया कि विजय माल्या और नीरव मोदी सहित कुल ३६ व्यापारी गत दिवसोंमें देशसे भाग चुके हैं ।

जांच विभागके विशेष लोक अभियोजक डी.पी. सिंह और एन.के. मट्टाने सुशेनके उन दावोंका विरोध किया कि उसकी समाजमें गहन सम्बन्ध हैं । विभागने कहा, “माल्या, ललित मोदी, मेहुल चौकसी, नीरव मोदी और संदेसरा बंधुकी (स्टर्लिंग बायोटेक लिमिटेडके प्रवर्तक) समाजमें अधिक गहन सम्बन्ध थें, इसके पश्चात भी वे देश छोड गए । ऐसे ३६ व्यापारी हैं, जो गत दिवसोंमें ही देश छोडकर भागे हैं !”

‘ईडी’की अधिवक्ता संवेदना वर्माने न्यायालयको बताया कि प्रकरणकी जांच महत्त्वपूर्ण चरणमें है और विभाग यह ज्ञात करनेका प्रयास कर रहा है कि “आरजी” कौन है ?, जिसका सन्दर्भ सुशेनकी लेखनीपुस्तिकामें (डायरीमें) है ।

वर्माने गुप्तपर प्रकरणके साक्ष्योंको प्रभावित करनेका आरोप लगाते हुए न्यायालयको बताया कि उसने साक्ष्योंको नष्ट करनेका भी प्रयास किया ।

“शासन व नेताओंसे सम्बन्धके चलते ये भगौडे व्यापारी अत्यधिक धन पाते हैं और हानि होनेपर या यूं कहा जाए कि हानि दिखाकर उन्हीं राज्यकर्ताओंका आश्रय लेकर ये देशसे भाग जाते हैं ! राज्यकर्ताओंका आश्रय लेकर इसलिए कहा; क्योंकि यह असम्भव है कि शासनको बिना ज्ञात हुए वह देश छोडकर भागे ! अब इसमें हानि किसकी होती है ? व्यापारीकी या राज्यकर्ताओंकी ? हानि केवल राष्ट्रकी होती है । स्वतन्त्रताके पश्चातसे ही देशका धन कुछ पूंजीपतियोंके हाथमें दिया जाता है और शेष नागरिक व किसान, जो इस देशकी अर्थव्यव्स्थाका लगभग ७५% भार उठाते हैं, उन्हें मरनेके लिए छोड दिया जाता है । इतनी अत्यधिक असमानताओंके कारण ही साधारण नागरिक और निर्धन हो जाता है और प्रति व्यक्ति आय महंगाईकी तुलनामें अल्प रहती है ! इस खुलेमें हो रही अराजकता व अनैतिकताउको रोकने हेतु केवल और केवल हिन्दू राष्ट्रकी आवश्यकता है; क्योंकि एक धर्मनिष्ठ राष्ट्रमें ही धर्मनिष्ठ शासकगण हो सकते हैं, जो देशकी पूंजीको अपना समझकर ही व्यय करेंगें !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : लाइव हिन्दुस्तान



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