विष्णु स्तुति


पुनरपि जननं पुनरपि मरणं पुनरपि जननीजठरे शयनम् ।
इह संसारे बहु दुस्तारे कृपयाऽपारे पाहि मुरारे ॥
अर्थ : बार-बार जन्म, बार-बार मृत्यु, बार-बार  गर्भ में शयन, इस संसारसे पार जा पाना बहुत कठिन है, हे मुरारी, कृपा करके इससे मेरी रक्षा करें ॥



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