विष्णु स्तुति
नमोऽस्त्वनन्ताय सहस्रमूर्तये सहस्रपादाक्षिशिरोरुबाहवे ।
सहस्रनाम्ने पुरुषाय शाश्वते सहस्रकोटी युगधारिणे नमः ।।
अर्थ : उन्हें (विष्णुको) वंदन करते हैं जिनके सहस्र रूप हैं, सहस्र नेत्र हैं , सहस्र सिर , चरण और बाहू हैं । उन सनातन (शाश्वत ) पुरुषको नमन करते हैं जिनके सहस्र नाम हैं और जिन्होंने इस सृष्टिको सहस्र कोटि युगोंसे धारण किया हुआ है !
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