विवाह रूपी यज्ञकर्मका अनादर न करें !


विवाह एक यज्ञ कर्म है; अतः उसमें सात्त्विक आचरण कर उपस्थित रहना चाहिए । किन्तु विवाहका आध्यात्मिक महत्त्व न जाननेके कारण वरपक्षके लोग जब विवाहमें सहभागी होने जाते हैं तो उनमेंसे कई मद्यपान कर लेते हैं; इससे उन्हें उस यज्ञका लाभ नहीं मिलता है और उनकी उपस्थितिसे यज्ञका वातवरण भी दूषित होता है । इसप्रकारका अधर्म कर वे सब पापके अधिकारी बनते हैं । अनेक बार विवाहके कार्यक्रममें इसकारण भी बहुत समस्याएं निर्माण होती हैं, ऐसा मैंने कुछ विवाहमें देखा है । – तनुजा ठाकुर



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