आजकल विवाह हेतु बैठनेवाले जोडे अज्ञानताके कारण तमोगुणी वस्त्र पहनकर विवाह करते हैं । विवाह एक महत्त्वपूर्ण सोलह संस्कार रूपी यज्ञकर्म है, उसे जितनी अधिक सात्त्विकतासे एवं श्रद्धाभावसे किया जाए, उसका उतना ही अधिक लाभ विवाह हेतु बैठनेवाले जोडेको प्राप्त होता है; इसलिए उन्होंने पारम्परिक सूती या रेशमी धागेसे बने वस्त्र धारण करने चाहिए; किन्तु आजकल कृत्रिम धागे अर्थात सिंथेटिक धागेके नित्य नूतन एवं फैशनके वस्त्र धारण करनेका प्रचलन बढ गया है । कई बार वर, कोट-पैंट-टाई लगाकर विवाहके सर्व धार्मिक अनुष्ठान पूर्ण करते हैं । इससे देवताके जो तत्त्व मंत्रोच्चारण या धार्मिक विधिके समय क्रियाशील होते हैं, उसे वे ग्रहण करनेमें असक्षम होते हैं । पूर्वकालमें तो बिना सिला हुआ एक वस्त्र धारणकर पाणिग्रहण संस्कार किया जाता था । धर्म शिक्षणके अभावमें आजकल एक भी धार्मिक कृत्य योग्य प्रकारसे नहीं कर पाते हैं ।
Leave a Reply