व्यास नदीमें लाखों मछलियां मृत, 8 जिलोंको सतर्क किया गया


ए.बी. ग्रेन स्पिरिट प्राइवेट लिमिटेड (चड्ढा शूगर मिल) कीडी अफगानामें रिसीवर टैंकसे उबलता शीरा रजबाहेके रास्ते व्यास नदीमें चले जानेके कारण व्यासमेंं लगभग १० लाख मछलियां मृत हो गयी हैं ।

नदीमें मछलियोंके मरनेकी सूचना मिलते ही डिप्टी कमिश्नर गुरदासपुर  गुरलवलीन सिंह सिद्धू सहित प्रदूषण नियंत्रण मंडलके अधिकारी मौकेपर पहुंच गए। सूत्रोंके अनुसार प्रशासनको बुधवारको ही दरियामें शीरा घुल जाने की जानकारी थी, मगर वीरवारको लाखों मछलियां मरनेसे भेद खुल गया।

सूत्रोंके अनुसार घटना मंगलवार रात की है जबकि प्रशासनका कहना है कि घटना बुधवार सुबह हुई। यह भी पता चला है कि लोग मृत मछलियोंको ट्रालियोंमें भर कर ले गए। इसके चलते प्रशासनने ८ जिलोंमें मछली नहीं खानेके निर्देश दिए हैं। डिप्टी कमिश्नर सिद्धूने बताया कि गत शाम जैसे ही हमें चड्ढा चीनी मिलसे शीरेके रिसावके कारण मछलियोंके मारे जानेका समाचार मिला तो प्रशासनिक अधिकारी मौकेपर पहुंचे तथा प्रदूषण नियंत्रण मंडलके अधिकारी भी कारखानेमें पहुंच गए थे। मिल प्रबंधकोंने जे.सी.बी. मशीनें लगा कर शीरेको बहनेसे रोकनेका प्रयास किया , परंतु शीरेकी मात्रा इतनी अधिक थी कि उसे रोकना कठिन था। इस संंबंधी हमने संबंधित जिलोंको सूचित कर दिया था।

जलके ऊपर जम गई शीरेकी परत
उक्त अधिकारीने बताया कि शीरेके ब्यास दरियामें जाने के कारण यह जलके ऊपर फैल गया तथा सारा जल काला दिखाई देने लगा। मछलियोंको ऑक्सीजन लेनेकेलिए बार-बार जलकी ऊपरी सतह पर आना पडता है परंतु जलकेे ऊपरकी सतहपर शीरा फैला होने के कारण मछलियोंको ऑक्सीजन नहीं मिल पाई तथा वे मर गयी। उन्होंने कहा कि यह ठीक है कि शीरेमें कुछ तत्व ऐसे होते हैं जो कुछ विषैले होते हैं परंतु उसके प्रयोगसे किसीकी मृत्यु नहीं होती।

क्या कहते हैं प्रदूषण कंट्रोल बोर्डके एक्सियन कुलदीप सिंह
एक्सियन प्रदूषण नियंत्रण मंडल कुलदीप सिंहसे जब बात की गई तो उन्होंने बताया कि इस घटनाको कुछ और ही ढंग से लिया जा रहा है। कारखानेमें किसी तरहका कोई टैंकर नहीं फटा है। उन्होंने बताया कि जिस टैंकमें शीरा भरा हुआ था उसकी क्षमता लगभग एक करोड किलोग्राम शीरा रखने की है। इस टैंकमें भरे शीरेको गर्म किया जाता है जो आगे शराब बनानेकेलिए भेजा जाता है परंतु इस टैंकमें शीरा बहुत अधिक गर्म होनेके कारण वह टैंकसे उबलना शुरू हो गया तथा लगभग ५० लाख लीटर शीरा उबल कर टैंकसे बाहर आ गया। इस शीरेको प्रबंधकोंने रोकनेका प्रयास किया परंतु वे सफल नहीं हो सके। यह शीरा एक रजबाहेके रास्ते ब्यास नदीमें चला गया।

पहले भी चर्चामें रही है मिल
इस संबंधी गांव निवासी बलजीत सिंह, सुखविन्द्र सिंह, गुरमीत सिंह कीडी अफगानाने आरोप लगाया कि टैंकसे शीरा बढनेकी घटना बुधवार की है परंतु मिल प्रबंधकोंने कोई ठोस प्रबंध नहीं किया। प्रदूषण  नियंत्रण मंडलके अधिकारी भी मौके पर पहुंचे थे परंतु उन्होंने भी इसे गंभीरतासे नहीं लिया, जबकि पहले भी यह मिल चर्चाका विषय बनी रहती है। इस संबंधी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।

किसानों और सरकारका है दबाव: मिल संचालक 
रिसीवर टैंकमें क्षमता से अधिक शीरा डाले जाने पर मिल समूह संचालक ए. सिंहने कहा कि हम पर किसानों और सरकारका अधिक से अधिक  गन्ना खरीदनेका दबाव है। मिलमें अधिक गन्ना आने से टैंकोंमें अधिक मात्रामें शीरा भरा जा रहा है। जब उनसे इसके बारे मेें पूछा गया तो उन्होंने कहा कि ऑटो प्रतिक्रियासे ऐसा हुआ है। शीरेको जिस तापमानपर उबाला जाता है उसी तापमानपर उबाला गया था लेकिन ऑटो रिएक्शनके कारण तापमान बढ गया। इसे नियंत्रित करनेका पूरा प्रयास किया गया है।



Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सम्बन्धित लेख


सूचना: समाचार / आलेखमें उद्धृत स्रोत यूआरऍल केवल समाचार / लेख प्रकाशित होनेकी तारीखपर वैध हो सकता है। उनमेंसे ज्यादातर एक दिनसे कुछ महीने पश्चात अमान्य हो सकते हैं जब कोई URL काम करनेमें विफल रहता है, तो आप स्रोत वेबसाइटके शीर्ष स्तरपर जा सकते हैं और समाचार / लेखकी खोज कर सकते हैं।

अस्वीकरण: प्रकाशित समाचार / लेख विभिन्न स्रोतोंसे एकत्र किए जाते हैं और समाचार / आलेखकी जिम्मेदारी स्रोतपर ही निर्भर होते हैं। वैदिक उपासना पीठ या इसकी वेबसाइट किसी भी तरहसे जुड़ी नहीं है और न ही यहां प्रस्तुत समाचार / लेख सामग्रीके लिए जिम्मेदार है। इस लेखमें व्यक्त राय लेखक लेखकोंकी राय है लेखकद्वारा दी गई सूचना, तथ्यों या राय, वैदिक उपासना पीठके विचारोंको प्रतिबिंबित नहीं करती है, इसके लिए वैदिक उपासना पीठ जिम्मेदार या उत्तरदायी नहीं है। लेखक इस लेखमें किसी भी जानकारीकी सटीकता, पूर्णता, उपयुक्तता और वैधताके लिए उत्तरदायी है।

विडियो

© 2017. Vedic Upasna. All rights reserved. Origin IT Solution