ईश्वर निर्व्यसनी हैं; अतः यदि हमें ईश्वरसे एकरूप होना है तो हममें भी किसी भी प्रकारका व्यसन नहीं होना चाहिए । व्यसन अर्थात ऐसी कोई वस्तुके प्रति आसक्ति जिसके न मिलनेपर मन व्याकुल हो जाता है एवं जिसके सेवनसे स्वास्थ्यको हानि पहुंचती है । मद्य, बीडी, गुटका, हुक्का, सिगरेट, मादक पदार्थ (ड्रग्स) एवं यहांतक कि चाय एवं कॉफीकी वृत्ति भी एक प्रकारका व्यसन है । अनेक लोगोंको लगता है कि चाय या कॉफी पीना व्यसन नहीं तो यह जान लें कि चायमें निकोटीन एवं कॉफीमें कैफीनके साथ ही टेनिक अम्ल (एसिड) होता है, ये सब स्वास्थ्यपर विपरीत प्रभाव डालते हैं एवं जिन्हें एक बार इसका व्यसन लग जाए, उन्हें यह न मिले तो वे व्याकुल हो जाते हैं; अतः साधको ! अपने मनका सूक्ष्म अभ्यास कर अपनी सभी आसक्तियोंको दूर करना सीखें ! तभी ईश्वरसे पूर्ण एकरूपता सम्भव है । – तनुजा ठाकुर
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