गडकरीका प्रखर वक्तव्य, पाकिस्तानको नहीं देंगे रावी, ब्यास और सतलुजका जल, सींचेंगे यमुना !!


फरवरी २१, २०१९


केन्द्रीय मन्त्री नितिन गडकरीने कहा है कि पाकिस्तान जानेवाले जलको रोककर अब यमुनामें लाया जाएगा । उन्होंने बताया कि भारतके अधिकारमें जो ३ नदियां हैं, उनके लिए परियोजनाएं तैयार कर ली गई हैं । दिल्ली-आगरासे इटावातक जलमार्ग सज्ज किया जाएगा, जिसके लिए विस्तृत परियोजना ब्यौरा (Detailed Project Report) सज्ज कर लिया गया है । गडकरीने बागपतको ‘रिवर पोर्ट’ बनानेकी भी घोषणा की है । किसान अपना कृषि चक्र परिवर्तित करें और चीनी मिलें गन्नेके रससे एथनॉल बनाएं, तो कार्य और आय भी बढेंगें ।

गडकरीकी वर्तमान घोषणाके पश्चात पहलेसे ही आर्थिक संकटसे जूझ रहे पाकिस्तानपर संकटके बादल मंडराने लगे हैं । भारत में नदी विकासको लेकर चल रही अन्य परियोजनाओंके बारेमें चर्चा करते हुए गडकरीने कहा, “सडकोंके साथ-साथ जलमार्गपर शासन कार्य कर रहा है । हरियाणा और पश्चिम उत्तर प्रदेशके लोग देहलीसे आगरा जलमार्गसे जा सकेंगें । इसके पश्चात ‘रिवर पोर्ट’ भी बागपतमें यमुना किनारे बनाए जानेकी तैयारी है । ‘पोर्ट’ से चीनी बांग्लादेश और म्यांमारतक भेजी जाएगी, इसमें व्यय अल्प होगा । प्रयागराजसे वाराणसीतक जलमार्ग तैयार है, शीघ्र ही इसमें नावें चलेंगीं । गंगाके साथ यमुना, हिंडन, काली सहित अन्य नदियों और नालोंके जलको ‘नमामि गंगे योजना’से स्वच्छ किया जाएगा ।”

“नितिन गडकरीका वक्तव्य अभिनन्दन योग्य है; परन्तु अब स्थिति ऐसी है कि भारत बांध बनाकर आतंकियोको नहीं रोक सकता है । वैसे भी ‘इण्डस वॉटर सन्धि १९६०’के अन्तर्गत झेलम, सिन्धु और चनाब पाकिस्तानके अधिकारमें हैं, जिसके अन्तर्गत भारत उसके जलको प्रयोग कर सकता है; परन्तु मोड नहीं सकता है और भारतके पास रावी, व्यास और सतलुज हैं, उनका जल भारत वैसे भी मोड सकता था; परन्तु इतने आक्रमण और युद्धके पश्चात क्यों नहीं मोडा गया, यह समझसे परेय है । यह पग अवश्य अच्छा पग है; परन्तु पर्याप्त नहीं है । भारतको और कडाई दिखानी होगी और शान्तिके लिए पूर्ण समाधानकी आवश्यकता है और वह तबतक नहीं होगा, जबतक एक भी आतंकी या उनका समर्थक अथवा आश्रयदाता जीवित है !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : ऑप इण्डिया



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