सितम्बर ६, २०१८
‘अनुसूचित जाति व जनजाति विधेयक’को मूल रूपमें लानेके विरोधका प्रकरण अब बलिष्ठ होने लगा है ! सवर्ण संगठनोंने सीधे-सीधे शासनको चेतावनी दी है ! प्रसिद्ध कथावाचक देवकीनन्दन ठाकुरने शासनको ललकारते हुए कहा कि दो माहका समय है, अन्यथा हम वह करके दिखाएंगे, जो भारतके इतिहासमें कभी नहीं हुआ ! साथ ही उन्होंने कहा कि यदि आवश्यकता पडी तो राजनीतिमें भी उतरा जाएगा !
देवकीनन्दन ठाकुरने कहा कि बिना जांचके बन्दी बनानेका विधान तो पाकिस्तानमें भी नहीं है ! देशको जातिमें बांटने वालोंको उनकी वास्तविकता दिखा दी जाएगी ! ‘अपराध और भ्रष्टाचारमें मुक्ति, झूठी प्राथमिकी करानेपर कारावास’ यह कैसा विधान है ?
कथावाचकने कहा कि मुझे १०० से अधिक बुलावे आए हैं, लोग चित्र करवानेके लिए बुलाना चाहते हैं; लेकिन मैं कहीं नहीं गया ! सभीको फोटोकी पडी है; लेकिन इस देवकीनन्दनको देश बचानेकी पडी है ।
देवकीनन्दनने कहा कि हम ‘नोटा’ नहीं दबाएंगे, बल्कि विकल्प देंगे ! उन्होंने कहा, “मैं शासनके विरुद्ध नहीं हूं, क्योंकि मैं ही शासन हूं । हमारे अंगूठेसे ही शासन बनता-बिगडता है । मैं ‘नोटा’पर बटन दबाना नहीं चाहता हूं । हम ‘नोटा’ दबाते रह जाएंगे और लाभ कोई और ले जाएगा । अब ‘नोटा’का प्रयोग नहीं करेंगे, बल्कि देशको एक उत्तम विकल्प देंगे !”
“‘समाजको जातिगत आधारपर विभाजन करना व आपसमें लडवाकर राज करना’, सर्व राजनीतिक दलोंका एकमात्र यही उद्देश्य है । इनका धर्म और राष्ट्रसे कोई लेना-देना नहीं है” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : दैनिक जागरण
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