मार्च २६, २०१९
राजस्थान पुलिसने सोमवार, २५ मार्चको देहलीके एक ४२ वर्षीय व्यक्ति मोहम्मद परवेजको पाकिस्तानकी ‘एजेंसी इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस’के (आइएसआइ) लिए जासूसी करनेके आरोपमें बन्दी बनाया गया है ।
राष्ट्रीय जांच विभागद्वारा राष्ट्र विरोधी गतिविधियोंमें समिलित होनेके आरोपमें बन्दी बनाए जानेके बाद, पश्चात २०१७ से ही कारावासमें था । अब उसे राज्य पुलिसने आगेकी पूछताछके लिए बन्दी बनाया गया है ।
अधिकारीने बताया कि मोहम्मद परवेजने कथित रूपसे गोपनीय और रणनीतिक सूचनाएं एकत्र करनेके लिए नकली पहचानके माध्यमसे भारतीय सेनाके सैनिकोंको फंसाया और पैसे लेकर उन्हें ‘आईएसआई’को भेज दिया ।
पूछताछके समय, परवेजने बताया कि वह ‘आईएसआई’के अधिकारियोंके सम्पर्कमें था और गत १८ वर्षोंमें १७ बार पाकिस्तानकी यात्रा की थी !!
परवेज देहलीमें पाकिस्तान उच्चायोगमें त्वरित वीजाके लिए आया हुआ फोटो और पहचान पत्रकी प्रतिपर (कॉपीपर) चलभाष सिम कार्ड प्राप्त कर लेता था । इन्हींसे वो जासूसी कार्य करता था ।
गत वर्ष, राजस्थान पुलिसने एक सेनाके सैनिकको जैसलमेरमें जासूसीके आरोपमें बन्दी बनाया था । वह पाकिस्तानी ‘आईएसआई’के सम्पर्कमें था ।
कुछ माह पूर्व, नागपुरमें ब्रह्मोसके एक अभियन्ता निशांत अग्रवालको कथित रूपसे जासूसी करने और उनके ‘आईएसआई’ संचालकोंको संवेदनशील सूचना देनेके लिए बन्दी बनाया गया था और गत वर्ष सितंबरमें, उत्तर प्रदेश एटीएसके दलने एक ‘बीएसएफ’ सैनिक, मध्य प्रदेशके रीवा जिलेके निवासी अच्युतानंद मिश्राको बन्दी बनाया था, जो भारतकी रक्षा तैयारियोंके बारेमें जानकारी साझा करनेके लिए एक पत्रकार होनेका दावा करनेवाली महिलाद्वारा हनी ट्रैपमें फंसाया गया था ।
“धर्मान्ध परवेज देहलीसे पाकिस्तान १७ बार पाकिस्तान जाकर आया और गुप्त सूचनाएं देकर आया; परन्तु विचित्र है कि यह सब ऐसे ही होता रहा !! क्या कांग्रेस शासन अधीन रक्षाविभाग और मन्त्रीको समय नहीं लगा या अन्य कार्योंमें व्यस्त थे !! क्या देशकी सुरक्षा इतना गौण कार्य है कि कुछ गिने-चुने लोग, जो पाकिस्तानकी यात्रा करते हैं, उनका कुछ अभिज्ञान कर लिया जाए !! ऐसे लचर व्यव्स्था व कार्यप्रणालीके कारण आज भारतकी यह स्थिति है । देश एक-एक प्रकरणको स्मरण रखे और यदि राजनेता द्वारपर वोट मांगने आए तो ये सब प्रश्न अवश्य करें और जब यह पाकिस्तान यात्रा हमारे लिए ही अभिशाप बन जाए तो इस यात्राका क्या लाभ है ?, शासन इसपर भी अवश्य विचार करें ।”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : ऑप इण्डिया
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