एक पुत्रको तो मार दिया; यदि न्यायालयमें जाएंगे तो अन्यको भी मार देंगे, बंगाल पुलिसकी बर्बरता झेलते परिवारकी पीडा
०७ मार्च, २०२१
बंगालमें राजनीतिक हिंसा सामान्यसा प्रकरण है । इसके अन्तर्गत ९ जून २०१९ को बैरकपुर थाना क्षेत्रके भाटापाडामें उपद्रवियोंद्वारा ‘रिलायंस जूट मिल’पर बम फेंके गए थे, जिसके पश्चात पुलिसने गोली चलाना आरम्भ कर दिया था और रामबाबू साव नामक एक व्यक्तिके सिरपर गोली लगनेसे मृत्यु हो गई थी । पुलिसने बिना किसी चेतावनी दिए ही गोली चलाना आरम्भ कर दिया था एवं युद्धकी स्थितिका निर्माण करते हुए नियमोंका पालन भी नहीं किया था । समाचारके अनुसार, जब मृतक रामबाबू सावकी मांसे पूछा गया कि उन्होंने अपने पुत्रको गोली लगनेकी सूचना कब प्राप्त हुई, तब उन्होंने बताया कि उस दिन प्रातः १०:३० बजे वह भोजन बना रही थी । उनका पुत्र उन्हें घूमकर आनेकी बात कह कर गया था; परन्तु लौटकर केवल उसका शव ही आया । रामबाबू सावकी आयु १८ वर्ष की थी । उसने पांचवी कक्षातक पढनेके पश्चात परिवारको आर्थिक सहायता प्रदान करने हेतु किसी आपणिपर (दुकानपर) कार्य करना आरम्भ कर दिया था । वहीं रामबाबूकी काकीने बताया कि जब वह अपने पुत्रको विद्यालयसे लेकर आ रही थी तो रामबाबू कचौडी लेकर आते दिखाई दिया था । उसके पश्चात सीधा समाचार प्राप्त हुआ कि उसे उपद्रवके मध्य गोली लगी है । राम बाबूको चिकित्सालयमें प्रविष्ट कराया गया था; परन्तु चिकित्सकोंने रामबाबूको मृत घोषित कर दिया था । परिजनका यह भी कहना था कि उपद्रव न तो हिन्दू-मुसलमानका था और न ही अन्य किसी पक्षका, वह केवल ‘बम’ फेंकनेके पश्चात ही आरम्भ हुआ था । उन्होंने यह भी बताया कि रामबाबू किसी राजनीतिक दलसे भी सम्बन्धित नहीं था; तथापि पुलिसने उसके साथ ऐसा किया । परिवारने यह भी बताया कि इससे सम्बन्धित अभियोग न्यायालयमें पहुंचा है कि नहीं इस विषयका उन्हें कोई भी ज्ञान नहीं है; क्योंकि उन्हें न्यायालयसे कभी बुलावा नहीं आया । राजनेताओंने उनके परिवारको १० लाख देनेका आश्वासन दिया था; परन्तु कुछ भी प्रदान नहीं किया गया । वहीं भाजपा नेताओंने उन्हें ४.५ लाख रूपए प्रदान किए । अन्तमें पीडित परिवारने कहा कि वह दशकोंसे इस क्षेत्रमें बसे हुए हैं । वह न्यायालयके चक्करमें नहीं पडना चाहते, नहीं तो पुलिस उनके अन्य पुत्रोंको भी गोली मार देगी ।
जब न्यायके रक्षक ही भक्षक बन जाएं, तो समाजमें अराजकता ही फैलती है । बंगालमें हिन्दू विरोधी शासनने इस प्रकार पुलिस बलको अपने अधीन कर रखा है कि सामान्यजन भी उनसे अत्यधिक प्रताडित है । यह समाचार उसी क्रूरताको दर्शाता है । अब आनेवाले चुनावमें सभी हिन्दू संगठित होकर ऐसे क्रूर ममता शासनको उचित पाठ पढाएं ! – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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