कुछ दिवस पूर्व इन्दौरमें एक व्यक्ति जो मेरे लेखोंका सम्भवत: वाचन करते हैं, उन्होंने अपनी बहनके सामने मेरा परिचय देते हुए कहा, “ये वही हैं जो ‘व्हाट्सएप्प’पर प्रतिदिन लम्बे-लम्बे लेख लिखती हैं ।” वे अपनी बहनको हमारे लेख प्रतिदिन प्रेषित करते हैं ! मैंने उनकी बहनसे पूछा, “क्या आप हमारे ‘लम्बे-लम्बे’ लेख ‘व्हाट्सएप्प’पर पढती हैं ! तो उन्होंने कहा, “हां, मैं तो आतुरतासे उनकी प्रतीक्षा करती हूं ।” मैंने उन महोदयको कहा, “देखें, ये लोग पढते हैं; इसलिए ईश्वर मुझसे लिखवाते हैं, भगवान अपनी शक्ति बिना कारण व्यर्थ नहीं करते, वे बडे मितव्ययी हैं !”
जी हां, मैंने तो मात्र बीस लोगोंको अगस्त २०१५ में ‘व्हाट्सऐप्प’पर एक गुट बनाकर जोडा था और आज वह अनेक लोगोंतक पहुंच रहा है तो यह निश्चित ही ईश्वर इच्छा है ! – तनुजा ठाकुर
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