जनवरी ३, २०१९
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भारतमें ईसाई समुदायके साथ वार्ताके लिए एक सम्बद्ध इकाई गठित करनेपर विचार कर रहा है । सूत्रोंने बताया कि ‘आरएसएस’ गत एक वर्षसे ईसाई राष्ट्रीय मंच स्थापित करनेके प्रयासमें लगा है । यह मंच ‘मुस्लिम राष्ट्रीय मंच’की भांति गठित किया जाएगा, जोकि भारतके मुस्लिम समुदायके मध्य काम करनेवाली ‘आरएसएस’की एक ईकाई है ।
‘आरएसएस’से जुडे सूत्रोंने बताया कि राष्ट्रीय ईसाई मंचके गठनको लेकर संघ अधिकारियोंने सबसे प्रथम वर्ष २०१६में पादरियोंसे सम्पर्क साधा था । यद्यपि तब उस वार्ताका कोई परिणाम नहीं निकल पाया था । इसके पश्चात वर्ष २०१७ में एक बार पुनः इसका प्रयास आरम्भ हुआ । तब उत्तर भारतीय गिरिजाघरसे जुडे आगराके एक परिवारने देहली और नागपुरमें संघ नेतृत्वसे भेंट की थी । इसके पश्चातसे संघ और ईसाई समुदायके सदस्यों व पादरियोंके मध्य भेंट जारी है ।
‘राष्ट्रीय ईसाई मंच’के गठनको लेकर जारी इस वार्तामें सम्मिदलित लोग यूं तो अपना नाम प्रकट करनेसे बच रहे हैं, यद्यपि उन्होंने इस मंचके गठनको लेकर जारी प्रयासोंकी पुष्टि करते हुए कहा कि यह मंच संघ और ईसाई समुदायके मध्य सेतुकी भांति कार्य करेगा ।
इस वार्तामें सम्मिलित एक व्यक्तिने बताया, “अपने अनुभव और संघके साथ वार्ताके आधारपर मुझे लगता है कि ईसाई समुदायके लोगोंको संघके निकट जाना चाहिए, ताकि वे उससे वार्ताकर राष्ट्र निर्माणमें संघकी भूमिकाको समझ सके ।”
इसके साथ ही वह कहते हैं, “२०१४ के लोकसभा चुनावके पश्चात मुझमें संघको लेकर उत्सुकता जागी और वार्ता आरम्भ की । इस भगवा समूह और ईसाई समुदायके मध्यकी दूरीको पाटनेके उद्देश्यसे राष्ट्र स्वयंसेवक संघ और ईसाई समुदायके सदस्य तबसे कई बार भेंट कर चुके हैं ।”
वहीं संघ नेतृत्वने भी संघ और ईसाई समाजके मध्य सम्पर्क बनानेके प्रयासोंकी पुष्टि की है । संघके सह सरकार्यवाह मनमोहन वैद्य कहते हैं, “संघ कोई सम्पर्क कार्यक्रम नहीं चलाता है; परन्तु संघसे जुडनेकी इच्छा रखनेवालोंके लिए इसके द्वार खुले हैं !”
“क्या संघ इस बातका आश्वासन दे सकता है कि उसके पश्चात वे ईसाई धर्म परिवर्तन नहीं करेंगें और उनमें राष्ट्र विरुद्घ भावना नहीं होगी ! समूचे देशमें ईसाई विदेशी धनसे निर्धन हिन्दुओंको ठगकर उनका धर्मपरिवर्तन करवा रहे हैं तो इस सन्दर्भसे तो उन्हें राष्ट्रसे बाहर किया जाना चाहिए; परन्तु हिन्दुत्ववादी संगठन उन्हें यदि राष्ट्रीय ईकाईमें सम्मिलित करना चाहते हैं तो राष्ट्रको क्या इसका लाभ होगा ? यह संघका उत्तरदायित्व है कि इसे स्पष्ट करें; क्योंकि अनेक हिन्दुवादी जो संघके लिए कार्यरत हैं, जो ईसाईयोंके षडयन्त्रोंके विरूद्ध बोलकर लोगोंको जागरूक करते थे, वो अब लोगोंको क्या उत्तर देंगें ? और उत्तर तभी दे पाएंगे, जब संघ इस बातका आश्वासन दे कि वे राष्ट्रनिष्ठ होंगें !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : नभाटा
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