नवम्बर २८, २०१८
उत्तराखण्डके हिमालयी बुग्यालोंकी शुद्ध हवा भी विक्रय होने लगी है ! हिमालयकी ताजी हवासे भरे डिब्बे ऑनलाइन विक्रय हो रहे हैं ! दस लीटर हवाके एक डिब्बेका मूल्य लगभग ८०० रुपये है ! वहीं छूटके साथ यह डिब्बा ५५० रुपयेमें मिल रहा है ! एक पैकिंगसे १६० बार हिमालयकी शुद्ध हवा ली जा सकती है । प्रदूषणकी मार झेल रहे दिल्ली-एनसीआरमें शुद्ध हवाके डिब्बोंकी काफी मांग है ।
‘प्योर हिमालयन एयर’नामके जालस्थल अपने डिब्बोंमें उत्तराखण्डकी हवा विक्रय कर रहा है । उत्तराखण्डके हिमालयी क्षेत्रोंसे हवाको दबावद्वारा विशेष पैकिंगमें भरा गया है । डिब्बेपर अंकित जानकारीमें कंपनी कहती है कि हवा उत्तराखण्डके चमोली जनपदके रूपकुण्ड और बागेश्वर जनपदसे लगते पिण्डारी क्षेत्रसे डिब्बाबंद की गई है । कंपनीने अपने जालस्थलपर कोई स्थायी निवास या चलभाष क्रमांक नहीं दिया है, केवल ऑनलाइन जालस्थलसे ही इसे उपलब्ध करवा रहे हैं !
दिल्लीसे लेकर उत्तर प्रदेशतक मांग
दिल्ली, एनसीआरका क्षेत्र प्रदूषणसे सबसे अधिक जूझ रहा है । यही कारण है कि डिब्बोंमें बंद शुद्ध हवाकी इन्हीं क्षेत्रोंमें सबसे अधिक मांग है । देशके सबसे प्रदूषित नगरोंमें दिल्लीके पश्चात उत्तरप्रदेशके छह नगर आते हैं ।
लोगोंको शुद्ध हवा विक्रयका यह ढंग काफी पसंद आ रहा है । वे इसे प्रदूषणसे निपटनेमें सहायक बता रहे हैं ।
शुद्ध हवामें ऑक्सीजन, नाइट्रोजनके साथ दूसरे प्राकृतिक तत्व भी रहते हैं । इससे शरीरको अधिक शक्ति और स्फूर्ति मिलती है; इसलिए इसप्रकारकी डिब्बाबंद हवाको किसी भी समय सांसकेद्वारा शरीरमें लिया जा सकता है ।
उत्तराखण्ड सरकार जहां अपने यहांकी प्राकृतिक सम्पदासे राज्यकी आय वृद्धिके नूतन ढंग नहीं ढूंढ पा रही है, वहीं निजी उद्योग उत्तराखण्डकी हवाको विक्रय कर लाखों अर्जित कर रहे हैं । उधर, राज्य कर विभागके सहायक कमिश्नर विनय ओझाके अनुसार, ऐसे किसी उद्योगकी जानकारी उन्हें नहीं है, जो हिमालयकी डिब्बा बंद शुद्ध हवाको विक्रय कर रहा हो ।
“मानव सर्वप्रथम प्रकृतिका विनाशकर वायुका स्रोत बन्द करता है और तथाकथित विकास कर मुद्रा अर्जित करता है, तत्पश्चात उसी मुद्राको व्ययकर वही वायु क्रय करता है और कुछ वर्षों पश्चात स्थिति और विकट होगी ! वस्तुत: हम विकास नहीं विनाशकी ओर बढ रहे हैं और आजके बुद्धिजीवी इस सरलसे तथ्यको नहीं समझते हैं !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : लाइव हिन्दुस्तान
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