तृणमूलकी अराजकता, मतदान यन्त्रपर प्रत्याशीके नामके बटनपर इत्र लगाया, वोट न देनेवालोंको किया परेशान !!


अप्रैल २९, २०१९

तृणमूल कांग्रेसके कार्यकर्ताओंने पागलपनमें विचित्र कृत्य आरम्भ कर दिए हैं । तृणमूलके उपद्रवियोंने ‘ईवीएम’में किसी भी प्रकारकी कथित छेडछाड ज्ञात करनेके लिए एक नूतन ढंग खोजा है । ‘आनंद बाजार पत्रिका’में प्रकाशित एक समाचारके अनुसार, बीरभूम लोकसभा क्षेत्र स्थित मंगलकोट क्षेत्रके मांझीग्राम गांवमें तृणमूल कांग्रेस प्रत्याशीके नाम और चुनाव चिह्नके सामनेवाले ‘बटन’पर तृणमूल कार्यकर्ताओंद्वारा इत्र छिडक दिया गया ! इसके पश्चात जो भी मतदाता मत देनेके पश्चात बाहर निकल रहा था, ये उसकी ऊंगली सूंघ रहे थे ताकि ज्ञात हो सके कि मतदाताओंने तृणमूलको मत दिया है या नहीं ? पहलेसे ही समूचे बंगालमें हिंसा प्रसारित कर रहे तृणमूल कांग्रेसके इन कुकृत्योंको लेकर ममता बनर्जी भी मौन हैं ।

तृणमूलके उपद्रवियोंने उन मतदाताओंको परेशान किया, जिनकी ऊंगलीसे इत्रकी गन्ध नहीं आ रही थी । जिनकी ऊंगलीसे इत्रकी सुगन्ध आ रही थी, उन्हें यह समझकर छोड दिया गया कि उन्होंने तृणमूलको ही मतदान किया है । पार्टीने इन आरोपोंको निराधार बताते हुए कहा है कि ऐसा कुछ भी नहीं किया गया । पश्चिम बंगालमें जैसे-जैसे मतदान आगे बढ रहे हैं, चुनाव आयोगको तृणमूल कार्यकर्ताओंद्वारा की जा रही हिंसाको रोकनेमें अत्यधिक प्रयास करने पड रहे हैं ।

चुनाव आयोगने ३० अप्रैल प्रातःकालतक विवादास्पद टीएमसी नेता अनुब्रत मंडलपर कडी दृष्टि रखनेका निर्णय किया है । मतदानकर्मियोंने टीएमसी नेताके प्रति अपना भय प्रकट किया था, जिसके पश्चात चुनाव आयोगने रविवार, २८ अप्रैलको यह निर्णय सुनाया । मतदानकर्मियोंने यह भी कहा था कि यदि तृणमूल बीरभूम जनपद अध्यक्ष मतदानके दिवस एक बूथसे दूसरे बूथतक आना-जाना करेंगें तो इससे उन्हें संकट है । बीरभूममें भाजपा कार्यालयके बाहर पुलिस नियुक्त थी, जहां यह आरोप लगाया गया था कि तृणमूलके गुंडोंने कार्यालयमें तोडफोड की थी । मण्डलने इस आरोपका खंडन किया और कहा कि बीजेपी इन यह सब केवल ‘ध्यान आकर्षित’ करनेके लिए कर रही है ।

प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदीने भी इसप्रकारकी हिंसक घटनाओंके लिए पश्चिम बंगालकी मुख्यमन्त्री ममता बनर्जीपर लक्ष्य साधते हुए कहा कि तृणमूलके गुंडे विपक्षी प्रत्याशियोंको प्रचार नहीं करने दे रहे । प्रधानमन्त्रीने सीधा ममतापर कटाक्ष करते हुए उन्हें हिंसाके लिए उत्तरदायी बताया और कहा कि तृणमूल शासन दमनकारी नीतियोंपर चल रहा है ।

 

“तृणमूल कांग्रेस राज्यमें विपक्षी दलोंके सदस्योंको मरवा रही है, जैसा कि प्रतिदिन समाचार आ रहे हैं । इसके साथ ही लोगोंको परेशान कर रही है, सुरक्षा बलोंके सैनिकोंको चेतावनी दी जा रही है, राज्यमें प्रत्येक स्थानसे हिंसाके समाचार आ रहे हैं, ऐसेमें चुनाव आयोग व उच्चतम न्यायालयको चाहिए कि वह दलके प्रत्याशियोंको निरस्त करे और राज्यमें शान्ति स्थापित करें; परन्तु वह नहीं हो रहा है, जो कि लज्जास्पद है कि एक राज्यमें वैधानिक व्यव्स्था ही नहीं बना पा रहे हैं । वास्तवमें तृणमूल सबके समक्ष ही अराजकतापर आ गई है कि किसी भी प्रकार मतदान विजयी होना चाहती है, या यूं कहें ममता बैनर्जीके कुकर्म, जो उन्होंने बांग्लादेशियोंको सीमामें घुसाकर आश्रय देकर किया है, उन्हें छिपाकर सदा ही राज्य करना चाहती है । ऐसेमें सभी हिन्दुओंने एक होकर मतदान करना चाहिए और इस अराजक शासनका सत्तासे अन्त करना चाहिए !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : ऑप इण्डिया



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