यमुनाका जल हुआ विषैला, मथुरामें नदी किनारे मिली मरी मछलियां !


नवम्बर ४, २०१८

उत्तर प्रदेशके मथुरा जनपदमें यमुना नदीके तटपर मृत मछलियां मिली हैं ! माना जा रहा है कि नदीमें प्रदूषणका स्तर बढनेसे यह हुआ है ! पर्यावरणसे जुडे कार्यकर्ताओं और स्थानीय प्रशासनने यह जानकारी दी । उन्होंने बताया कि बृहस्पतिवारसे ही सहस्त्रों मृत मछलियां दिख रही हैं । एक कार्यकर्ताने बताया कि जब वह प्रातः घाटपर स्नानके लिए गया तो उसने यह दृश्य देखा । मथुरा जिलाधिकारी सर्वज्ञराम मिश्रने बताया कि पहले दिवससे ही यह घटना अधिकारियोंके संज्ञानमें है और जिला प्रदूषण नियन्त्रण मण्डलको निर्देश दिए गए हैं कि वह नदीके पानीका प्रतिदर्श (नमूना) एकत्र करें ।

यह घटना अधिकारियोंकी चिन्ताका कारण इसलिए बनी हुई है; क्योंकि ९ नवम्बरको ‘यम द्वितीया’ पर्व है और इस पवित्र दिवसमें कई लोग घाटोंमें डुबकी लगाते हैं । मथुराके अधिकारीगण इसका दोष हरियाणासे नालों और नहरोंसे बहकर आए विषैले पदार्थोंपर मढ रहे है । उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश मुख्य सचिव, सिंचाई हरियाणामें अपने समकक्षके साथ सम्पर्कमें है ताकि इसपर रोक लगाई जा सके । उन्होंने बताया कि हरियाणा सिंचाई विभाग इस बातकी जांच कर रहा है कि कैसे विषाक्त तत्व यमुना नदीमें पहुंच गए ।

इस मध्य निकटवर्ती जनपद आगरामें रविवार, ४ नवम्बरको पर्यावरणसे जुडे कार्यकर्ताओंने मुगल दरबारमें मनसबदार एत्माद-उद-दौलाके मकबरेके सामनेसे यमुना नदीकी बडे स्तरपर स्वच्छताका कार्य आरम्भ किया । इस मकबरेको ‘बेबी ताज’ भी कहा जाता है । पर्यावरणविद् देवाशीष भट्टाचार्यने बताया, ‘‘ये लक्ष्य बहुत बडा है, लेकिन नागरिकोंको इसमें प्राथमिकता दिखानी होगी । हम इस बातकी अनन्त काल तक प्रतीक्षा नहीं कर सकते कि सरकारी विभाग हमारे जलस्रोतोंको प्रदूषित होनेसे बचानेके लिए पग उठाएंगी ।”

एक अन्य पर्यावरणविद्ने कहा, ‘‘दीपावलीसे पूर्व लोग घर स्वच्छ करते हैं और सारा कचरा यमुना नदीमें फेंक देते हैं । इसे रोकना ही होगा ।’’ मथुराधीश मंदिरके महंत गोस्वामी नंदन श्रोत्रियने कहा कि नदीकी स्वच्छतामें छात्र समूहोंको सम्मिलित होना चाहिए ।

 

“हिन्दुओंकी लोभी वृत्ति, अकर्मण्यता और प्रशासनकी हिन्दुओंके तीर्थोंके प्रति केवल लालाच दृष्टिसे देखनेके रवैयेने आज गंगा, यमुना सदृश देवनदियोंकी इतनी बुरी स्थिती की है ! आजके तथाकथित हिन्दू कृत्यके स्थानपर तर्क देते हैं, परन्तु क्या केवल तर्कसे नदियोंको बांध बनाकर रोकना व औद्योगिक मलको बहाना बन्द हो जाएगा, स्वयं विचार करें !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : जी न्यूज



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