मार्च ७, २०१९
‘जम्मू और कश्मीर लिबरेशन फ्रंट’के प्रमुख यासीन मलिकको ‘सामाजिक सुरक्षा अधिनियम’के अन्तर्गत बन्दी बनाया गया है । यासीन मलिकको अब जम्मू -कश्मीरके भलवाल कारावासमें स्थानान्तरित कर दिया गया है । ‘पीएसए’के अन्तर्गत उन्हें दो वर्षतक कारावासमें रखा जा सकता है । उल्लेखनीय है कि पृथकतावादी नेता यासीन मलिकको २२ फरवरीको बन्दी बनाया गया था ।
जम्मू-कश्मीरमें यासीन मलिकके विरुद्घ कोठी बाग पुलिस स्टेशनमें प्रकरण प्रविष्ट किया गया था । ‘जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट’के प्रवक्ताने कहा कि हमें आज ज्ञात हुआ कि यासीन मिलकपर ‘पब्लिक सुरक्षा अधिनियम’ लगाया गया है । पार्टी प्रवक्ताने कहा कि हमारा दल इस मनमाने कारावास और एक राजनीतिक नेताके विरुद्घ ‘पीएसए’के उपयोगकी कडी निंदा करती हैं ।
उल्लेखनीय है कि गत दिवसोंमें शासनने यासीन मलिक और कट्टरपन्थी हुर्रियत कॉन्फ्रेंसके कुछ नेताओंकी सुरक्षा वापस ले ली थी । बादमें मलिकने कहा था कि उन्हें राज्यसे कभी कोई सुरक्षा नहीं मिली । मलिकने कहा था, ‘मेरे पास गत ३० वर्षोंसे कोई सुरक्षा नहीं है । ऐसेमें जब सुरक्षा मिली ही नहीं तो वे किस वापसीकी बात कर रहे हैं ? ये शासनकी ओरसे एकदम ठगी है !’
“पृथकतावादी नेता, जो दिन-रात विष उगलते हैं और लोगोंको भी भडकाकर राष्ट्र विरुद्ध करते हैं, ऐसे नेता बने लोगोंको खुलेमें घूमने देना अपराध ही है । अतिशयोक्ति नहीं होगी, यदि यह कहा जाए कि ये आतंकियोंके मूअ समर्थक व सहायक सिद्ध हुए हैं । जो कार्य आजतक नहीं हुआ, वह अब हो रहा है, यह राष्ट्रके लिए शुभ चिह्न है; परन्तु ऐसे कितने ही इस राष्ट्रमें आश्रय पाए है, जिन्हें उनके गन्तव्यतक पहुंचाए बिना इस राष्ट्रमें शान्ति कठिन है ! – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : न्यूज १८
Leave a Reply