साधकों ! चारों वर्णानुसार साधना नहीं कर पा रहे हैं; ऐसेमें व्यथित न हों !


धर्मरक्षणके वर्णानुसार अग्रिम चार प्रकार हैं । कुछ साधक सोचते हैं कि चारों वर्णानुसार साधनाकर शीघ्र प्रगति करें ! वे यह समझ लें कि केवल ईश्वर ही चारों वर्णानुसार साधनाके उदाहरण हमारे समक्ष रख सकते हैं ! हमारे पास बुद्धि, धन, शारीरिक क्षमता, इनमेंसे जो भी हो उसे अर्पण करना साधनामें अपेक्षित होता है; इसलिए अपनेसे जो १-२ वर्णोंकी सेवा हो सके, वही करें, इससे भी शीघ्र उन्नति होगी !



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