दशहरासे पूर्व योगी शासन प्रदेशके सभी रामलीला मैदानोंकी चारदीवारी करेगा


अगस्त २८, २०१८

उत्तरप्रदेशमें एक बार पुनः चारदीवारीकी (बाउण्ड्रीवॉलकी) राजनीति आरम्भ हो गई है । उत्तरप्रदेशके योगी आदित्यनाथ शासनने निर्णय किया है कि समूचे प्रदेशके रामलीला मैदानों और स्थलोंकी चारदीवारी करवाई जाएगी । इसके लिए आयव्ययपत्र (बजट) भी घोषित कर दिया गया है । इसीमें प्रदेशमें गौशाला बनानेकी निधि भी सम्मिलित है । उत्तरप्रदेशमें समाजवादी शासनने समूचे प्रदेशके कब्रिस्तानोंकी चारदीवारी करवानेका आदेश दिया था । अब यह माना जा रहा है कि उत्तरप्रदेशका योगी आदित्यनाथ शासन भी उसी राह पर आगे बढ चला है ।

‘न्यूज१८’के समाचारके अनुसार, प्रदेश भरमें गौशाला बनानेके लिए बजटकी व्यवस्था अनुपूरक बजटमें किया गया है; लेकिन इसके चलते शासन विपक्षके लक्ष्य पर आ गया है । उत्तरप्रदेशमें प्रमुख विपक्षी दल समाजवादी दलने शासनपर लक्ष्य साधते हुए कहा कि शासन दुष्प्रचार फैला रहा है । सपा प्रवक्ता जूही सिंहने कहा सपा शासनने केवल कब्रिस्तानकी चारदीवारी ही नहीं करवाई थी, बल्कि कोई भी मैदान, ग्राम पंचायतकी भूमि, घाटको भी इसमें सम्मिलित किया था । ये इसलिए बनवाई गई थी, ताकि असामाजिक तत्व इन पर अधिकार न कर सकें ।

कांग्रेसने भी इसपर योगी शासनको कोसा है । कांग्रेसकी ओर से सुरेन्द्र राजपूतने कहा, नियम सबके लिए समान होने चाहिए । शासन किसीके भी साथ पक्षपात करने से बचे । जितनी भी सामाजिक भूमि हैं, उनकी चारदीवारीके लिए शासन एक समान नियम बनाए, फिर चाहें वह कब्रिस्तान हो, रामलीला मैदान हो अथवा श्मशान हो ।

भाजपाके प्रवक्ता मनीष शुक्लाने कहा, “शासनका जो कार्य है वह कर रही है । विपक्ष अपना कार्य करे और विकासकी योजनाओंको आगे आने दे । रामलीलाका कार्यक्रम पूरे प्रदेशके विभिन्न प्रान्त और विभिन्न गांवोंमें होता है । इन भूमिपर अतिक्रमणकी शंका बनी रहती है । ऐसे में आवश्यक था कि इनकी सुरक्षा सुनिश्चितकी जाए । सरकारने सार्वजनिक भूमिकी सुरक्षाके लिए ये पग उठाए हैं । इसमें किसीको भी आपत्ति नहीं होनी चाहिए ।”

 

“अब इन धर्मद्रोहियोंको रामलीला मैदानकी भूमिकी सुरक्षा हेतु की चारदीवारीमें भी परेशानी है । कब्रिस्तानमें चारदीवारी बिना विरोध हो सकती है, परन्तु रामलीला मैदानमें नहीं !” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : जनसत्ता



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