वृंदाके निधिवनमें ‘जूते’ पहनकर रात्रिमें घुसा ‘यूट्यूबर’, दृश्यश्रव्य देखकर भडके श्रद्धालु, उत्तर प्रदेश पुलिसने बनाया बन्दी
१५ नवम्बर, २०२१
उतर प्रदेशकी मथुरा पुलिसने वृंदावन स्थित निधिवनराजकी अनुमति बिना १० नवम्बर, २०२१ की रात्रिमें दृश्यश्रव्य बनानेवाले ‘यू-ट्यूबर’ गौरव शर्माको देहलीसे बन्दी बनाया गया है । आरोपित गौरव शर्मा निधिवनराजकी भीत अवैध रूपसे फांंदकर २० मिनटतक वहां रुका और वहांका दृश्यश्रव्य प्रचलित (वायरल) भी कर दिया था । इस कृत्यको सैकडों वर्ष पुरातन परम्पराका टूटना बताकर मथुरा-वृन्दावनके महन्तों और श्रद्धालुओंमें आक्रोश फैल गया था । पुलिसने आरोपितके विरुद्ध परिवाद प्रविष्टकर गौरव शर्मापर ‘आईपीसी’की धारा २९५ (ए) एवं ‘आईटी एक्ट’की धारा ६६ के अन्तर्गत कार्रवाई की है । गौरवपर अपने आधे ‘दर्जन’ साथियोंके साथ निधिवनकी परम्पराको तोडनेका आरोप है । गौरवने निधिवनमें ‘जूते’ पहनकर प्रवेश किया था । जबकि उसके सहयोगीने जूते बाहर उतार दिए थे । पुलिस इस प्रकरणमें गौरवके अन्य साथियोंको ढूंढ रही है । अन्य आरोपितोंके नाम प्रशांत और मोहित हैं । पुलिसकी जांंचमें अभिषेक और एक अन्य अज्ञात युवक भी है । निधिवनकी गाथा है कि रात्रिकालमें यहां कोई नहीं रुक सकता; क्योंंकि रुकनेवाले की या तो मृत्यु हो जाती है या वह विक्षिप्त (पागल) हो जाता है । यह जाननेके पश्चात भी गौरवने निधिवनमें अवैध रूपसे घुसकर वहांंकी परम्पराको तोडते हुए दृश्यश्रव्य बनाया ।
हिन्दुओंकी अपने आस्थास्थलों और परम्पराओंपर पूर्ण विश्वास न होनेके कारण, वे इस प्रकारका कृत्य करते हैं । उपर्युक्त प्रकरण इसीका उदाहरण है । निधिवनमें रात्रिमें बिना पदवेश पहने भी प्रवेश वर्जित है, ऐसेमें पदवेश पहनकर जाना और वहांका दृश्यांकन करना, घोर धार्मिक अपराध है, इस अपराधका कठोरतम दण्ड, वहां प्रवेश करनेवाले लोगोंको दिया जाना चाहिए और ऐसे लोगोंका सामाजिक बहिष्कार और तिरस्कार किया जाना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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