जाकिर नाइकका कोषाध्यक्ष (फाइनेंसर) मुंबईमें बन्दी बनाया गया, निदेशालय शीघ्र करेगी कार्यवाही !


मार्च २३, २०१९

प्रवर्तन निदेशालयने शुक्रवार, २२ मार्चको विवादास्पद इस्लामी उपदेशक जाकिर नाइकके एक विश्वसनीय सहयोगीको मुंबईमें बन्दी बना लिया । यह उसके तथा अन्य लोगोंके विरुद्ध प्रविष्ट धनशोधनके एक प्रकरणमें की गयी है । अधिकारियोंने बताया कि व्यवसायसे जौहरी अब्दुल कादिर नजमुदीन साथकको ‘धनशोधन निवारण नियम’के अंतर्गत बन्दी बनाया गया है ।
उन्होंने बताया कि साथकको ”नाइक”की प्रत्यक्ष रूपसे सहायता करने, सांप्रदायिक आधारपर घृणा (नफरत) फैलाने और एक विशेष समुदायको कट्टरपंथकी ओर उन्मुख करनेके उद्देश्यसे ‘वीडियो’ बनाने और उनका प्रसारण करनेके लिए संयुक्त अरब अमीरातसे संदिग्ध स्रोतसे आए धनका स्थानांतरणकर धनशोधन करनेमें उसकी सहायता करनेमें भूमिकाके लिए धनशोधन निवारण नियमके अंतर्गत बन्दी बनाया गया है ।

उन्होंने बताया कि विभाग नए प्रमाणोंके आधारपर शीघ्र ही एक नया आरोपपत्र प्रविष्ट (दाखिल) करेगी । अधिकारियोंका आरोप है कि साथकने लगभग ५०कोटि रुपए सीधे नाइकको भेजे थे, जिन्हें यह उपदेशक बादमें अवैधानिक ढंगसे बाहर ले गया । उन्होंने कहा कि नजमुदीन साथक ‘ग्लोबल ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन एफजीई एलएलसी’का निदेशक भी है जो नाइकके ‘पीस टीवी चैनल’की स्वामी ‘कंपनी’ है । उसे मुंबईके एक विशेष न्यायालयके समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा ।


उल्लेखनीय है कि ‘ग्लोबल ब्रॉडकास्टिंग”पर नाइकका अपने विश्वसनीय सहयोगी साथकके माध्यमसे नियंत्रण है । प्रवर्तन निदेशालयका आरोप है कि ”७९कोटि रुपयोंकी राशि ‘ग्लोबल ब्रॉडकास्टिंग’से ‘मेसर्स हार्मनी मीडिया प्रालि’को मिली; परन्तु इस राशिसे नाइकके विवादित उपदेशोंके ‘वीडियो’ बनाना और ‘पीस टीवी’के माध्यमसे बडी संख्यामें दर्शकोंतक पहुंच पाना सम्भव नहीं होता ।”

प्रवर्तन निदेशालयका दावा है कि ‘ग्लोबल ब्रॉडकास्टिंग’द्वारा ‘हार्मनी मीडिया’को भेजे गए कोषोंका स्रोत ”संदिग्ध” है; क्योंकि इस वाहिनीपर कोई विज्ञापन प्रसारित नहीं किए जाते और साथकने इस उपलक्ष्यमें कोई ब्यौरा भी नहीं दिया है ।


नाइकके विरुद्ध २०१६से जांच चल रही है और केंद्र शासनने उसके इस्लामिक ‘रिसर्च फाउंडेशन’को (आईआरएफ) पांच वर्षके लिए प्रतिबंधितकर दिया है । भारत आतंकवाद सम्बन्धी गतिविधियों और घृणासे भरे भाषणोंके लिए वांछित नाइकके बारेमें कहा जाता है कि वह २०१६ में देश छोडकर ‘मलेशिया’ चला गया और वहीं रह रहा है ।

 

“गत दिवसोंमें आतंकियोंको प्रत्यक्ष और परोक्ष रूपसे समर्थन देनेवाले बन्दी बनाए जा रहे हैं व इस्लामिक व आतंकियोंकी समर्थक संस्थाओंको मोदी शासनद्वारा प्रतिबन्धित किया जा रहा है, जो सराहनीय कार्य है; परन्तु यह साथमें क्षुब्ध कर रहा है व अन्य राजनीतिक दलोंपर प्रश्नचिह्न निर्माण कर रहा है कि क्या इस देशमें कोई ऐसा दल नहीं है, जो आतंकके सहयोगी इन संगठनोंके विरुद्ध मुखर होकर बोल सके !! जनता राजनेताओंको भगवान समान पूजती है और ये भगवान असुर समान छलते हैैंं । सभी राष्ट्ररनिष्ठ इन दलोंंसेे प्रश्न पूछे और उत्तर मांंगे कि इनको अभीतक समर्थथन क्यों दिया गया ? सभी मिलकर ऐसे दलोंंका बहिष्कार करें !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : लाइव हिन्दुस्तान



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