जून १६, २०१९
‘एनआइए’द्वारा कश्मीरी पृथकतावादियोंके विरुद्घ चलाई जा रही जांचमें कुछ महत्वपूर्ण बातें ज्ञात हुई हैं । जांच विभागने कहा है कि कश्मीरके पृथकतावादी नेताओंको विदेशसे अत्यधिक धन मिला; परन्तु इन्होंने इन रुपयोंका प्रयोग अपने व्यक्तिगत लाभके लिए किया । पृथकतावादी नेताओंने अपने लिए अकूत सम्पत्तिका अर्जन किया और अपने बच्चोंको विदेश पढने भेजा । हुर्रियत कांफ्रेंस व अन्य संगठनोंके कई नेताओंसे पूछताछके समय इन लोगोंने स्वीकार किया कि उन्हें कश्मीरमें पृथकतावाद फैलानेके लिए पाकिस्तानसे धन मिलता है !!
दुख्तरन-ए-मिल्लतकी नेत्री आसिया अंद्राबीके पुत्रने मलेशियामें शिक्षा अर्जित की है और आतंकी धनके प्रकरणमें बन्दी बनाया गया जहूर वटालीने उसका पूरा व्यय वहन किया था । एनआईएने इस प्रकरणमें अंद्राबीसे पूछताछ की । अंद्राबीने स्वीकार किया कि वह और उनका संगठन विदेशसे रुपए एकत्र करता है और कश्मीरमें महिलाओंद्वारा प्रदर्शन करानेके लिए इन रुपयोंका प्रयोग किया जाता है । अंद्राबीके पुत्र मोहम्मद बिन वसीमने मलेशियामें रहते हुए जिन बैंक खातोंका प्रयोग किया, उसके बारे मेंअधिक जानकारी एकत्र करनेके लिए एनआईए पहले ही सम्बन्धित अधिकारियोंसे सम्पर्क कर चुकी है ।
एक अन्य पृथकतावादी नेता शब्बीर शाहसे पहलगाममें उनके विश्रामालय (होटल) सम्बन्धित व्यापारको लेकर पूछताछ की गई । उस ‘होटल’के पाकिस्तानसे प्राप्त किए गए रुपयोंका प्रयोग करके बनाए जानेकी बात सामने आई है । पाकिस्तानके आकाओं और “ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस”के नेताओंद्वारा हुर्रियतसे जुडे संगठनोंके खातोंमें रुपए स्थानान्तरित किए गए । एनआईएके पास इससे सम्बन्धित साक्ष्य हैं और इसे लेकर शब्बीर शाहसे पूछताछ की गई । शब्बीरके जम्मू, श्रीनगर और अनंतनागमें भी व्यापार हैं ।
एक और अचम्भित करनेवाली बात यह सामने आई है कि विदेशी धनको लेकर पृथकतावादी नेताओंमें भी आपसमें मतभेद है । कश्मीरी पत्थरबाजोंके ‘पोस्टर बॉय’ मशरत आलमने एनआईएको बताया कि हवालाकेद्वारा पाकिस्तानसे रुपए पृथकतावादियोंको भेजे जाते हैं । इस फंडिंग और इसके प्रयोगको लेकर पृथकतावादी नेता आपसमें ही लडाई कर रहे हैं, ऐसा आलमने दावा किया है । यासीन मलिक और वटाली अभी जांच विभागकी पकडमें हैं ।
“सुनकर भी विश्वास नहीं होता है कि पृथकतावादी रूपी आतंकी हमारे देशमें शासकीय सुविधाएं व ठाठबाटमें रह रहे थे !! अब तो कश्मीरका सारा विरोध ही प्रायोजित लग रहा है । ये पृथकतावादी कठोरसे कठोर दण्डके पात्र हैं और साथ ही दण्डके पात्र हैं वे राजनीतिक दल, जिन्होंनें आजतक इन आतंकियोंको पोषित किया ।”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : ऑप इण्डिया
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