सन्तों एवं राजकीय पक्षोंमें अन्तर


राजकीय पक्षोंको चुनावके समय प्रचार करना पडता है; क्योंकि उनकेद्वारा कोई कार्य घटित नहीं होता । इसके विपरीत सन्तोंके पास बिना प्रचारके सदैव ही सहस्रों (हजारों) व्यक्ति आते हैं । – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था



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