के.एस. भगवानका दुस्साहस, अपनी पुस्तकमें किया प्रभु रामका अपमान !!


दिसम्बर २९, २०१८

हिन्दुवादी संगठनोंने लेखक के. एस. भगवानकी पुस्तकके विरोधमें प्रदर्शन किया । आरोप है कि के. एस. भगवानने अपनी पुस्तकमें भगवान रामको अनुचित ढंगसे प्रस्तुत किया है और अपमानजनक सन्दर्भका वर्णन किया है ।  कन्नड पुस्तक ‘रामा मंदिरा येके बेडा’में (राम मंदिरकी आवश्यकता क्यों नहीं है) दावा किया गया है कि राम कोई भगवान नहीं थे और उनमें भी किसी साधारण मानवकी भांति दुर्बलताएं थीं । पुस्तकमें भगवद्गीताके सन्दर्भोंका उल्लेख करते हुए भगवान रामके चरित्रके बारेमें आलोचनात्मक उल्लेख है, जिसे लेकर विवाद हो गया है ।


लेखकने अपनी रचनाका बचाव किया है और कहा है कि यह पुस्तक वाल्मीकि रामायणपर आधारित है । हिन्दू समर्थक कार्यकर्ताओंने शुक्रवार, २८ दिसम्बरको उनके घरके सामने विरोध-प्रदर्शन किया । इस प्रकरणपर मुख्यमन्त्री एच डी कुमारस्वामीके मौनको लेकर भाजपाकी कर्नाटक ईकाईने उनपर लक्ष्य साधा और भगवानको तुरन्त बन्दी बनानेकी मांग की ।

उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘क्या टीपू सुल्तानके विरोधमें बोलने वाले पत्रकार संतोष थमैयाको बन्दी बनाने वाली एचडी कुमारस्वामीका शासन प्रभु रामका अपमान करने और हिन्दुत्वपर ओछी टिप्पणी करनेके लिए के. एस. भगवानको भी बन्दी बनाएगी ? शासन इस अपराधीको बन्दी बनानेके स्थानपल सुरक्षा उपलब्ध करा कर बचा क्यों रही है ?’’

राज्यके वरिष्ठ भाजपा नेता एवं विधायक एस.सुरेश कुमारने फेसबुकपर कहा कि राज्य शासनके पास दो विकल्प हैं, या तो वह भगवानको कारावास भेजे या उन्हें पागलखाने भेजे !  इस मध्य फेसबुक पृष्ठ ‘‘मैंगलोर मुस्लिम्स’’के संचालकोंने कन्नड समाचार माध्यमके पत्रकार अजित हनमकणवरको बृहस्पतिवार अपने कार्यक्रममें भगवानकी लिखी पुस्तकपर चर्चाके मध्य कथित रूपसे उनकी धार्मिक भावनाएं आहत करनेके लिए मारनेकी चेतावनी दी है । फेसबुक पेजके संचालकने पत्रकारको चेतावनी दी है कि वह दो दिवसके भीतर क्षमा मांगें, अन्यथा उनकी हत्या कर दी जाएगी ।
पुस्तकको लेकर विवाद बढता देख पुलिसने भगवानके घरके बाहर सुरक्षा कडी कर दी है और उन्हें किसी भी स्थानपर अकेले जानेसे बचनेके लिए कहा है ।

“के.एस. भगवान सदृश धूर्त लेखक व धर्मद्रोही लोग हिन्दू बहुल राष्ट्रमें भगवानका अपमानकर निकल लेते हैं और हम तथाकथित विरोध प्रकट करते हैं, इससे बडा उपहास और क्या होगा ? ये लोग ऐसा करते हैं, क्योंकि उन्हें ज्ञात है कि हिन्दू मृतवत है वे कुछ भी लिखकर विक्रय कर सकते हैं, कोई कुछ नहीं कहेगा । यह सहनशीलताकी शक्ति ही हिन्दुओंको ले डूबी हैं कि आज हम अपने अस्तित्वके लिए संघर्ष कर रहे हैं” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : पंजाब केसरी



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