२८ नवम्बर, २०२१
बिहारमें सार्वजनिक मन्दिरोंको लेकर राज्य धार्मिक न्यास समितिने बडा निर्णय लिया है । जिसके अन्तर्गत, अबसे राज्यमें सभी सार्वजनिक मन्दिरों को ४ प्रतिशतका कर देना होगा । धार्मिक न्यास समितिके इस निर्णयके कार्यक्षेत्रमें उन मन्दिरोंको भी सम्मिलित किया गया है, जिसे कोई व्यक्ति अपने घरमें बनवानेके उपरान्त उसे सभीके लिए खोल देता है । इन सभीको अबसे अपना पंजीकरण कराना होगा और कर देना पडेगा ।
धार्मिक न्यास समितिने एक दिसम्बरसे मन्दिरोंके पंजीकरणके लिए विशेष अभियान चलानेका निर्णय लिया है । इस पगको ध्यानमें रखते हुए समितिने राज्यके सभी जिलाधीशोंसे बिना पंजीकरणके चल रहे मन्दिरोंकी जानकारी मांगी है । जनपदोंसे सूची मिलते ही मन्दिरोंका पंजीकरण आरम्भ कर दिया जाएगा । अभीतक केवल भोजपुर जनपदके जिलाधीशने मन्दिरोंको लेकर जानकारी साझा की है ।
धार्मिक न्यास समितिके सदस्य और महन्त विजय शंकर गिरिका कहना है कि परिस्थिति बहुत ही स्पष्ट है कि जिन मन्दिरोंमें बाहरी लोग आकर पूजा-अर्चना करते हैं, वे सभी सार्वजनिक पूजा-स्थलके रूपमें गिने जाएंगे । चाहे वह मन्दिर किसी घरके भीतर ही क्यों न हो ? इन सभीको अपना पंजीयन करानेके पश्चात कर देना पडेगा ।
बिहार न्याय समितिके महन्तसे पूछा जाए कि क्या कभी ‘मस्जिदों’पर भी कर लगाया जाएगा ? क्या बिहारमें सभी ‘मस्जिदें’ पंजीकृत है ? बिहारमें जो साहस मन्दिरोंसे कर लेनेमें दिखाया है । क्या वहीं साहस ‘मस्जिदों’के विरुद्ध दिखा सकते है ? स्पष्ट है नहीं ! अतः इस निर्णयके ‘एकतरफा’ होनेका विरोध होना चाहिए और इसको न्यायालयमें चुनौती दी जानी चाहिए । मन्दिरका धन केवल मन्दिरके अनुरक्षणमें (रखरखावमें) ही लगना चाहिए । ऐसा सभी हिन्दुओंका मानना है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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