जुलाई ३, २०१८
लगभग २४० वर्षोके नव इतिहासमें प्रथम बार काशी पुराधिपति बाबा ‘श्री काशी विश्वनाथ’का दरबार कुम्भाभिषेकसे ऊर्जित किया जा रहा है । दक्षिण भारतकी तरह ४ दिवसतक होने वाले इस अनुष्ठानको ‘कांची कामकोटि पीठ’के शंकराचार्य विजेन्द्र सरस्वतीकी देखरेखमें २०० ब्राह्मण पूर्ण करेंगे !
‘श्रीकाशी विश्वनाथ’ मन्दिरके इन्दौरकी महारानी रहीं अहिल्याबाई होल्करद्वारा कराए जीर्णोद्धारके पश्चात २४० वर्षोके नव इतिहासमें प्रथम बार यहां ‘श्री काशी विश्वनाथ’का कुम्भाभिषेक हो रहा है । सोमवारको देर शाम इन अनुष्ठान कराने वाले दक्षिण भारतके यजमान सुबू सुन्दरमको विधि विधानसे संकल्प दिलाया गया । इसके साथ ही अनुष्ठान आरम्भ हो गया । यह अनुष्ठान ५ जुलाईतक चलेगा । अनुष्ठान ‘कांची कामकोटि पीठ’के शंकराचार्य विजेन्द्र सरस्वतीकी देखरेखमें काशी और दक्षिण भारतीय ब्राह्मण स्वर्णशिखरसे लेकर गर्भगृहतक यह अनुष्ठान सम्पन्न कराएंगे !
दक्षिण भारतमें प्रत्येक १२ वर्षपर मन्दिरोंकी सकारात्मक ऊर्जा और पवित्रताको बनाए रखनेके लिए ये कुम्भाभिषेक अनुष्ठान किया जाता है । कुम्भाभिषेकमें गंगा तटसे कलश यात्रा आरम्भ होगी । बाबाके मन्दिरमे गंगाके जलकी लगभग १३ विधिसे पूजाकी जाएगी । २००-विद्वान ब्राह्मण मन्त्रोच्चार और पूजन करेंगे । पांच जुलाईतक पूजनकी प्रक्रिया निरन्तर चलती रहेगी । पांच जुलाईकी सुबहसे गंगा जलसे स्वर्ण शिखरसे कुम्भाभिषेककी प्रक्रिया आरम्भ होगी । काशी विश्वनाथ मन्दिरके इतिहासमें यहां कुम्भाभिषेक प्रथम बार हो रहा है !
स्रोत : न्यूज18इण्डिया
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