सभी जीवोंमें एक भी जीव किसी दूसरे जीव जैसा नहीं होता, उदा. वृक्ष, कुत्ते, उसीप्रकार पृथ्वीके ७५० कोटि मानवोंमें एक भी किसी दूसरे जैसा दिखाई नहीं देता । इतना ही नहीं, उनके वैशिष्ट्य भी भिन्न-भिन्न होते हैं, ऐसा होनेपर भी ‘साम्यवाद’ शब्दका प्रयोग करनेवालोंकी बुद्धि कितनी शूद्र है, यह ज्ञात होता है । – परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले, संस्थापक, सनातन संस्था
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