जनवरी १५, २०१९
लोकसभाके ६० प्रतिशत सांसदोंको लेकर कार्यकर्ताओंके विरोधसे भारतीय जनता पार्टी नेतृत्वकी चिंताएं बढ गई हैं । पार्टीको अपने अन्तरिम तन्त्रसे विभिन्न स्तरोंपर मिल रही सूचनाओंमें यह स्थिति सामने आई है । इनमेंसे कुछको तो बदला जा सकता है; परन्तु कई मन्त्री व बडे स्तरके नेता भी सम्मिलित हैं, जिनके टिकट काट पाना सम्भव नहीं है !
देहलीमें दो दिवस पूर्व हुई पार्टीकी राष्ट्रीय परिषदकी बैठकमें देशके प्रत्येक लोकसभा क्षेत्रके चयनित कार्यकर्ताओंने भाग लिया था । सूत्रोंके अनुसार, इस मध्य उनके क्षेत्रोंके सांसदोंको लेकर भी उनका परामर्श जाननेका प्रयास किया गया । पार्टीने लोकसभा क्षेत्र सामाजिक प्रसार माध्यम प्रभारियों, समाचार माध्यम प्रभारियों, विभिन्न मोर्चोंके प्रमुख कार्यकर्ताओंके साथ भिन्न-भिन्न बैठकें कीं । बिहार और उत्तरप्रदेशके कार्यकर्ताओंने तो कुछ मन्त्रियोंके भी नाम लिए और कहा कि यदि इनको पुनः टिकट दिया गया तो कठिनाई होगी !
संगठनसे जुडे एक प्रमुख नेताने कहा कि कार्यकर्ताओंकी अपेक्षाएं अधिक होती है और ऐसेमें विरोध होता ही है ।
“हिन्दुवादी संगठनों व दलोंके कार्यकर्ता पूर्ण निष्ठा व निस्वार्थ भावनासे धर्म व राष्ट्रोन्नति हेतु प्रचार करते हैं, इसमें कोई शंका नहीं है तो ऐसेमें कार्यकर्ताओंका विरोध उचित ही है; क्योंकि जिन आशाओंसे उन्होंने प्रचार किया होता है, परिणाममें उसका १०% भी नहीं दिखता है और जिन बडे नेताओंके आश्रयमें वे छोटे नेताओंके लिए प्रचार करता है, वह उस योग्य ही नहीं होता है; क्योंकि आजके निधर्मी लोकतन्त्रमें अधिकाधिक राजनेता केवल स्वार्थपूर्ति हेतु ही आते हैं । ऐसेमें अब हिन्दुवादी संगठनों व दलोंको समीक्षाकी आवश्यकता है !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : लाइव हिन्दुस्तान
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